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जीआरएसई का पश्चिम बंगाल में ₹2,670 करोड़ का निवेश, रायचक में बनेगा लार्ज वैसल शिपयार्ड

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जीआरएसई का पश्चिम बंगाल में ₹2,670 करोड़ का निवेश, रायचक में बनेगा लार्ज वैसल शिपयार्ड

सारांश

जीआरएसई ने पश्चिम बंगाल में ₹2,670 करोड़ के निवेश की घोषणा की है — रायचक में नया लार्ज वैसल शिपयार्ड और कोलकाता-शालीमार सुविधाओं का उन्नयन। देश के 270 युद्धपोतों में 40% जीआरएसई निर्मित हैं, और नई सुविधाओं से क्षमता 28 से बढ़कर 32 प्लेटफॉर्म हो जाएगी।

मुख्य बातें

जीआरएसई पश्चिम बंगाल में ₹2,670 करोड़ का निवेश करेगी, जिसमें तीन शिपयार्ड सुविधाओं का विकास शामिल है।
दक्षिण 24 परगना के रायचक में नया स्वतंत्र शिपयार्ड बनेगा, जहाँ बड़े आकार के जलपोत निर्मित होंगे।
देश में अब तक 270 युद्धपोत बने हैं, जिनमें से 40% जीआरएसई ने बनाए हैं; पिछले 3 प्रोजेक्ट में 80% स्वदेशीकरण हासिल।
2019 से जीआरएसई ने 24 युद्धपोत लॉन्च किए और 22 की डिलीवरी की, हाल के दो प्रोजेक्ट समयसीमा से पहले पूरे हुए।
नई सुविधाओं के बाद जीआरएसई की कुल क्षमता 28 से बढ़कर 32 प्लेटफॉर्म हो जाएगी।

सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) लिमिटेड ने पश्चिम बंगाल में ₹2,670 करोड़ का बड़ा निवेश करने की घोषणा की है, जिसके तहत तीन शिपयार्ड सुविधाओं का विकास और उन्नयन किया जाएगा। कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर पी.आर. हरि (सेवानिवृत्त) ने रविवार, 23 अगस्त को यह जानकारी दी।

रायचक में नया स्वतंत्र शिपयार्ड

जीआरएसई के चेयरमैन ने बताया कि इस निवेश योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दक्षिण 24 परगना जिले के रायचक में एक स्वतंत्र शिपयार्ड की स्थापना है। इस शिपयार्ड में विशेष रूप से बड़े आकार के जलपोतों का निर्माण किया जाएगा, जो कंपनी की क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार करेगा।

कोलकाता और शालीमार सुविधाओं का उन्नयन

रायचक शिपयार्ड के अलावा, जीआरएसई अपनी कोलकाता और हावड़ा के शालीमार स्थित मौजूदा सुविधाओं के बुनियादी ढाँचे को भी अपग्रेड करेगी। कोलकाता इकाई में मध्यम और छोटे आकार के जहाज़ बनाए जाएंगे, जबकि शालीमार सुविधा में बोट, फेरी और एस-टाइप शिप का निर्माण होगा।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की राह

युद्धपोत निर्माण में भारत की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कमोडोर हरि ने कहा कि देश इस क्षेत्र में पहले ही आत्मनिर्भर हो चुका है। उन्होंने बताया कि अब तक देश में 270 युद्धपोत बनाए गए हैं, जिनमें से 40 प्रतिशत का निर्माण जीआरएसई ने किया है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले तीन प्रोजेक्ट्स में कंपनी ने 80 प्रतिशत तक स्वदेशीकरण हासिल किया है और शेष 20 प्रतिशत में भी स्वदेशी तकनीक अपनाने का लक्ष्य है।

समयसीमा और तकनीकी दक्षता

कमोडोर हरि ने बताया कि जहाँ पहले शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट में 5 से 10 साल का समय लगता था, वहीं अब कार्यगति में उल्लेखनीय तेज़ी आई है। उन्होंने कहा कि हाल ही में डिलीवर किए गए दो प्रोजेक्ट निर्धारित समयसीमा से पहले पूरे किए गए। साथ ही उन्होंने कंपनी की डिज़ाइन परिपक्वता का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीकी बदलावों को आसानी से अपग्रेड करके ग्राहकों को दिया जा सकता है।

क्षमता विस्तार और आगे की राह

2019 से अब तक जीआरएसई ने 24 युद्धपोत लॉन्च किए हैं और उनमें से 22 की डिलीवरी की जा चुकी है। वर्तमान में कंपनी के पास एक साथ अलग-अलग श्रेणी के 28 जहाज़ बनाने की क्षमता है। नई सुविधाओं के चालू होने के बाद यह क्षमता बढ़कर 32 प्लेटफॉर्म तक पहुँच जाएगी। जीआरएसई राज्य की सबसे बड़ी हेवी इंजीनियरिंग इकाई है और यह निवेश पश्चिम बंगाल के रक्षा औद्योगिक परिदृश्य को नई ऊँचाई देने का काम करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

670 करोड़ का विस्तार महज़ एक कॉर्पोरेट घोषणा नहीं — यह भारत की समुद्री रक्षा आत्मनिर्भरता की रणनीति का ज़मीनी अनुवाद है। 80% स्वदेशीकरण की उपलब्धि उल्लेखनीय है, लेकिन असली परीक्षा शेष 20% में है, जो अभी भी आयात पर निर्भर है। रायचक शिपयार्ड यदि समयसीमा में चालू होता है, तो यह पश्चिम बंगाल को देश के रक्षा औद्योगिक मानचित्र पर एक नई धुरी के रूप में स्थापित कर सकता है — लेकिन भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरियाँ और कुशल श्रमबल की उपलब्धता जैसी चुनौतियाँ इस महत्वाकांक्षा की असली कसौटी होंगी।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीआरएसई पश्चिम बंगाल में कितना निवेश करेगी और कहाँ?
जीआरएसई पश्चिम बंगाल में कुल ₹2,670 करोड़ का निवेश करेगी। इसके तहत दक्षिण 24 परगना के रायचक में एक नया लार्ज वैसल शिपयार्ड बनेगा, जबकि कोलकाता और हावड़ा के शालीमार स्थित मौजूदा सुविधाओं का बुनियादी ढाँचा अपग्रेड किया जाएगा।
रायचक शिपयार्ड में क्या बनाया जाएगा?
रायचक में बनने वाले नए स्वतंत्र शिपयार्ड में विशेष रूप से बड़े आकार के जलपोतों का निर्माण किया जाएगा। यह जीआरएसई की मौजूदा क्षमता से अलग एक नई श्रेणी होगी जो कंपनी के पोर्टफोलियो को विस्तार देगी।
भारत में युद्धपोत निर्माण में जीआरएसई की क्या भूमिका है?
देश में अब तक निर्मित 270 युद्धपोतों में से 40 प्रतिशत जीआरएसई ने बनाए हैं। पिछले तीन प्रोजेक्ट्स में कंपनी ने 80 प्रतिशत तक स्वदेशीकरण हासिल किया है और शेष 20 प्रतिशत में भी स्वदेशी तकनीक अपनाने का लक्ष्य है।
नई सुविधाओं के बाद जीआरएसई की कुल क्षमता कितनी हो जाएगी?
फिलहाल जीआरएसई के पास एक साथ अलग-अलग श्रेणी के 28 जहाज़ बनाने की क्षमता है। नई सुविधाएँ चालू होने के बाद यह क्षमता बढ़कर 32 प्लेटफॉर्म तक पहुँच जाएगी।
जीआरएसई के हालिया प्रोजेक्ट डिलीवरी का रिकॉर्ड कैसा है?
2019 से जीआरएसई ने 24 युद्धपोत लॉन्च किए हैं और उनमें से 22 की डिलीवरी की जा चुकी है। कंपनी के चेयरमैन के अनुसार, हाल के दो प्रोजेक्ट निर्धारित समयसीमा से पहले पूरे किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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