भारतीय फिनटेक सेक्टर में बड़ा बदलाव: 59% कंपनियों के लिए प्रतिष्ठा जोखिम सबसे बड़ी चिंता — FACE-Grant Thornton रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
फिनटेक एसोसिएशन फॉर कंज्यूमर एम्पावरमेंट (FACE) और ग्रांट थॉर्नटन भारत की 7 जुलाई 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत का फिनटेक सेक्टर अब तेज़ विस्तार की होड़ से हटकर ग्राहकों का भरोसा, सुशासन और दीर्घकालिक मज़बूती हासिल करने की दिशा में मुड़ रहा है। सर्वे में शामिल 59 प्रतिशत कंपनियों ने प्रतिष्ठा और ब्रांड से जुड़े जोखिम को सबसे गंभीर खतरा बताया। यह सर्वे लेंडिंग, पेमेंट, रेगटेक, कलेक्शन-टेक और टेकफिन्स क्षेत्रों में काम करने वाली 39 FACE सदस्य फिनटेक कंपनियों पर आधारित है।
प्रतिष्ठा जोखिम सबसे ऊपर, इंफ्रास्ट्रक्चर दूसरे स्थान पर
रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिष्ठा से जुड़े जोखिम के बाद इंटरऑपरेबिलिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर जोखिम को 51 प्रतिशत कंपनियों ने दूसरी सबसे बड़ी चिंता माना। तीसरे स्थान पर मार्केट कॉम्पिटिशन और कंडक्ट रिस्क रहे, जिनका औसत गंभीरता स्कोर 6.9 था। डेटा एक्सेस, प्राइवेसी और सुरक्षा का स्कोर 6.6 और साइबर सुरक्षा, टेक्नोलॉजी व बिजनेस कंटिन्यूटी का स्कोर 6.5 दर्ज किया गया। यह रैंकिंग 1 से 10 के पैमाने पर उत्तरदाताओं के वेटेड एवरेज गंभीरता स्कोर पर आधारित है।
ग्राहक भरोसे पर क्या है खतरा
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि ग्राहकों का विश्वास कई कारणों से डगमगा सकता है — डेटा लीक, साइबर सुरक्षा उल्लंघन और अनधिकृत संस्थाओं की गलत हरकतें इनमें प्रमुख हैं। इस प्रकार, किसी कंपनी की प्रतिष्ठा केवल उसके उत्पाद तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह गवर्नेंस, नियामक अनुपालन, ग्राहक अनुभव और डेटा सुरक्षा का सामूहिक परिणाम होती है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ती निर्भरता
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि फिनटेक कंपनियाँ UPI, आधार, ई-KYC और अकाउंट एग्रीगेटर जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) पर तेज़ी से निर्भर हो रही हैं। इन्हीं साधनों की बदौलत भारत का फिनटेक इकोसिस्टम देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न स्तंभ बन चुका है। कंपनियों ने भारत के DPI इकोसिस्टम के निरंतर विकास पर भरोसा जताया है, हालाँकि इसी निर्भरता को इंफ्रास्ट्रक्चर जोखिम का स्रोत भी माना जा रहा है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और फाइनेंशियल सर्विसेज रिस्क एडवाइजरी लीडर विवेक अय्यर ने कहा, 'मुनाफे, विकास और भरोसे के बीच संतुलन बनाना फिनटेक इकोसिस्टम के लिए मुख्य कारकों में से एक बन गया है, और फिनटेक बैरोमीटर रिपोर्ट इसी बात पर जोर देती है। पेमेंट, निवेश, क्रेडिट और बीमा जैसे क्षेत्रों में फिनटेक इकोसिस्टम के पास एक दशक पहले की तुलना में अधिक मज़बूत आय और गवर्नेंस मॉडल हैं, जो उन्हें विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने में मदद कर रहे हैं।'
साइबर जोखिम और धोखाधड़ी पर नज़रिया
लगभग 46 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने साइबर और कंटिन्यूटी जोखिमों को उच्च गंभीरता वाला माना, जो साइबर रेजिलिएंस, धोखाधड़ी की रोकथाम और ऑपरेशनल कंटिन्यूटी में लगातार निवेश की ज़रूरत को दर्शाता है। वहीं, धोखाधड़ी, AML/CFT और वित्तीय अपराध से जुड़े जोखिम तथा मैक्रो-इकोनॉमिक व फंडिंग जोखिमों को अपेक्षाकृत संभालने योग्य माना गया — इसमें नियामक हस्तक्षेप, बेहतर धोखाधड़ी नियंत्रण और निवेशकों के स्थिर भरोसे ने अहम भूमिका निभाई है। यह रिपोर्ट भारत के फिनटेक सेक्टर के परिपक्व होने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण संकेत है, और आने वाले समय में नियामक ढाँचे तथा उद्योग मानकों पर इसका असर देखा जा सकता है।