FSSAI का नेस्ले इंडिया को नोटिस: लैक्टोजेन प्रो 1 के व्हे प्रोटीन पाचन दावे पर माँगे वैज्ञानिक प्रमाण
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 21 अक्टूबर 2026 को नेस्ले इंडिया को नोटिस जारी किया, जिसमें कंपनी से लैक्टोजेन प्रो 1 पाउडर की पैकेजिंग और विज्ञापन में किए गए उस दावे के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा गया है कि उत्पाद में मौजूद व्हे प्रोटीन 'आसानी से पच जाता है'। प्राधिकरण के अनुसार, यह कार्रवाई खाद्य कारोबार संचालकों (FBO) द्वारा किए जाने वाले भ्रामक दावों और गैर-अनुपालन प्रचार के विरुद्ध जारी व्यापक अभियान का हिस्सा है।
नोटिस की मुख्य वजह
FSSAI ने स्पष्ट किया कि लैक्टोजेन प्रो 1 की पैकेजिंग या विज्ञापन सामग्री पर यह दावा दर्ज पाया गया कि इसमें व्हे प्रोटीन होता है, जो दूध प्रोटीन का एक घटक है और शरीर द्वारा सरलता से पचाया जा सकता है। प्राधिकरण ने कहा कि खाद्य कंपनियों के लिए ऐसे किसी भी दावे को पर्याप्त वैज्ञानिक साक्ष्यों से समर्थित करना अनिवार्य है।
नोटिस में कंपनी को निर्देश दिया गया है कि वह नोटिस जारी होने की तारीख से निर्धारित अवधि के भीतर सभी संबंधित दस्तावेज़ और सहायक प्रमाण FSSAI को सौंपे। साथ ही यह भी बताए कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के तहत उसके विरुद्ध कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
व्यापक अभियान के दायरे में कौन-से उत्पाद
यह नोटिस अकेले नेस्ले इंडिया तक सीमित नहीं है। FSSAI ने पुष्टि की कि नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1 और शिशुओं के लिए दूध के विकल्प (Infant Milk Substitutes) जैसे अन्य उत्पादों से जुड़े भ्रामक दावों पर भी संबंधित खाद्य कारोबार संचालकों को नोटिस भेजे गए हैं।
इस अभियान में कॉम्प्लान सहित विभिन्न कंपनियों के पोषण-आधारित उत्पाद और शिशु आहार श्रेणी के उत्पाद भी शामिल हैं। गौरतलब है कि शिशु आहार से जुड़े उत्पादों पर नियामकीय निगरानी देश में पहले से ही कड़ी रही है, क्योंकि ये उत्पाद नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित करते हैं।
नियामकीय ढाँचा और अनुपालन की अनिवार्यता
FSSAI ने स्पष्ट किया कि सभी खाद्य कंपनियों के लिए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि उत्पादों के लेबल, पैकेजिंग और विज्ञापनों पर किए गए दावों को पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण समर्थित करें और वे देश के खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम तथा विज्ञापन संबंधी विनियमों के अनुरूप हों।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार और खाद्य नियामक उपभोक्ता संरक्षण को लेकर अधिक सक्रिय हो रहे हैं — विशेष रूप से शिशु और बाल पोषण उत्पादों के क्षेत्र में, जहाँ पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई विवाद सामने आए हैं।
आगे क्या होगा
यदि नेस्ले इंडिया और अन्य संबंधित कंपनियाँ निर्धारित समयसीमा में संतोषजनक वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं करतीं, तो FSSAI खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत उनके विरुद्ध औपचारिक कार्रवाई शुरू कर सकता है, जिसमें जुर्माना और उत्पाद की बिक्री पर प्रतिबंध शामिल हो सकते हैं। इस मामले का परिणाम भारत में शिशु आहार उत्पादों के विज्ञापन और लेबलिंग मानकों पर दूरगामी असर डाल सकता है।