भारत के डिजिटल निवेशकों की 80% संपत्ति SIP और डायरेक्ट इक्विटी में केंद्रित: रेडसीर रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत में एक औसत डिजिटल निवेशक का पोर्टफोलियो आकार लगभग ₹10 लाख है और वह प्रतिवर्ष करीब ₹3 लाख का नया निवेश जोड़ता है। फिर भी, उसकी कुल निवेश योग्य डिजिटल संपत्ति का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा SIP, डायरेक्ट इक्विटी और एकमुश्त म्यूचुअल फंड निवेशों में ही सिमटा हुआ है। यह जानकारी कंसल्टिंग फर्म रेडसीर स्ट्रेटेजी कंसल्टेंट्स की उस रिपोर्ट में सामने आई है जो 23 जून 2026 को जारी की गई।
निवेश का मौजूदा ढाँचा
रेडसीर की रिपोर्ट के अनुसार, कुल डिजिटल निवेश में SIP की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत और डायरेक्ट इक्विटी की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत है। इससे स्पष्ट होता है कि निवेशकों की संपत्ति भले ही बढ़ रही है, नए और विविध निवेश उत्पादों को अपनाने की रफ्तार अभी भी धीमी है।
ETF, ग्लोबल इक्विटी, मार्जिन ट्रेडिंग सुविधा और लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज जैसे उत्पादों के बारे में निवेशकों में जागरूकता तो है, लेकिन इनका वास्तविक उपयोग अभी भी सीमित बना हुआ है। यह 'जानना' और 'करना' के बीच की खाई को रेखांकित करता है।
तीन प्रमुख निवेशक वर्ग
रिपोर्ट में बाज़ार को प्रभावित करने वाले तीन निवेशक वर्गों की पहचान की गई है। पहला — 'गाइडेड सेवर्स', जो निवेश को दीर्घकालिक बचत का माध्यम मानते हैं। दूसरा — 'एस्पायरिंग इन्वेस्टर्स', जो धीरे-धीरे अपने निवेश का दायरा बढ़ा रहे हैं। तीसरा — 'कॉन्फिडेंट बिल्डर्स', जो अपनी संपत्ति को विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में वितरित करते हैं और बाज़ार के अवसरों का सक्रिय रूप से लाभ उठाते हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
रेडसीर स्ट्रेटेजी कंसल्टेंट्स के पार्टनर मृगांक गुटगुटिया ने कहा कि आज निवेश प्लेटफॉर्म्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती निवेशकों को व्यापक निवेश विकल्पों को समझने और उनमें विश्वास के साथ निवेश करने में सहयोग देना है। उन्होंने यह भी कहा कि जो प्लेटफॉर्म सही समय पर सही अवसरों की जानकारी देंगे, निर्णय प्रक्रिया को सरल बनाएंगे और भरोसा बनाए रखेंगे, वे भविष्य में अधिक एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) हासिल करने में सफल रहेंगे।
प्लेटफॉर्म की भूमिका और प्रतिस्पर्धा
रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रमुख निवेश प्लेटफॉर्म अकेले सक्रिय उपयोग का लगभग आधा हिस्सा नियंत्रित करता है, जबकि बाज़ार में कई अन्य प्लेटफॉर्म भी मौजूद हैं। उल्लेखनीय यह है कि करीब दो-तिहाई निवेशकों ने कहा कि वे शून्य ब्रोकरेज मिलने पर भी अपना प्लेटफॉर्म बदलने को तैयार नहीं हैं — यह संकेत देता है कि अब कीमत निवेशकों का प्राथमिक आकर्षण नहीं रही।
निवेशक अब सहज इंटरफेस, भरोसेमंद लेन-देन, एकीकृत पोर्टफोलियो दृश्य और ब्रांड विश्वसनीयता को अधिक महत्व दे रहे हैं। इन मानकों पर अग्रणी प्लेटफॉर्म अपने प्रतिस्पर्धियों से स्पष्ट रूप से आगे हैं।
आगे की राह
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि भारत की डिजिटल निवेश यात्रा का अगला अध्याय नए निवेशकों को जोड़ने से अधिक मौजूदा निवेशकों की निष्क्रिय भागीदारी को गहरी वित्तीय संलग्नता में बदलने पर निर्भर करेगा। जो प्लेटफॉर्म इस रूपांतरण में सफल होंगे, वे ही अगले दौर की वृद्धि का नेतृत्व करेंगे।