त्रिपुरा ने पूर्वोत्तर में पीएम-कुसुम योजना में मारी बाज़ी, 8,364 सौर पंप स्थापित, 2,531 और प्रगति पर

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त्रिपुरा ने पूर्वोत्तर में पीएम-कुसुम योजना में मारी बाज़ी, 8,364 सौर पंप स्थापित, 2,531 और प्रगति पर

सारांश

पूर्वोत्तर भारत में त्रिपुरा ने पीएम-कुसुम योजना के क्रियान्वयन में शीर्ष स्थान हासिल किया है — 8,364 सौर पंप स्थापित, 41,820 कनी भूमि सिंचित और किसान को केवल ₹15,000 में ₹3 लाख की इकाई। 2,531 और पंपों के साथ यह अभियान और व्यापक होने वाला है।

मुख्य बातें

त्रिपुरा ने पीएम-कुसुम योजना के तहत पूर्वोत्तर में पहला स्थान हासिल किया।
अब तक 8,364 सौर सिंचाई पंप स्थापित, जिससे 41,820 कनी भूमि सिंचाई के दायरे में।
2,531 और पंपों की स्थापना जारी; पूर्ण होने पर 12,655 कनी अतिरिक्त भूमि लाभान्वित होगी।
प्रत्येक पंप की कुल लागत ₹3 लाख ; किसान का अंशदान केवल ₹15,000 , शेष राज्य सरकार वहन करती है।
राज्य सरकार का मूल लक्ष्य 10,895 पंप और 54,475 कनी भूमि को सिंचित करना है।

त्रिपुरा के विद्युत विभाग ने त्रिपुरा नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (TREDA) के सहयोग से पीएम-कुसुम योजना के तहत राज्य भर में 8,364 सौर ऊर्जा संचालित सिंचाई पंप सफलतापूर्वक स्थापित कर दिए हैं, जिससे 41,820 कनी कृषि भूमि को सिंचाई के दायरे में लाया गया है। पूर्वोत्तर भारत में यह उपलब्धि सबसे बड़ी है और त्रिपुरा इस योजना के क्रियान्वयन में इस क्षेत्र में पहले स्थान पर आ गया है। इसके अतिरिक्त, 2,531 और पंपों की स्थापना का कार्य अभी प्रगति पर है।

योजना का विस्तार और लाभार्थी

त्रिपुरा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (पीएम-कुसुम) योजना के तहत अब तक 8,364 किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिल चुका है। जब चल रहे 2,531 पंपों की स्थापना पूरी होगी, तब 12,655 कनी अतिरिक्त भूमि सिंचित होगी और 2,531 और किसान इस योजना से जुड़ेंगे। राज्य सरकार का प्रारंभिक लक्ष्य 10,895 सौर सिंचाई पंप स्थापित करना था, जिससे 54,475 कनी कृषि भूमि को सिंचाई के अंतर्गत लाना था।

लागत संरचना और किसानों को राहत

मंत्री नाथ के अनुसार, प्रत्येक सौर पंप इकाई की कुल लागत लगभग ₹3 लाख है। इसमें से किसान को केवल ₹15,000 का योगदान देना होता है, जबकि शेष पूरी राशि त्रिपुरा सरकार वहन करती है। मुफ्त सौर ऊर्जा और सिंचाई जल मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों में उत्साह है और उनकी कृषि लागत में उल्लेखनीय कमी आई है।

मंत्री का स्थलीय निरीक्षण

मंत्री रतन लाल नाथ ने सोमवार को पश्चिम त्रिपुरा जिले के मोहनपुर के सतदुबिया गाँव में पीएम-कुसुम परियोजना के तहत स्थापित सौर ऊर्जा संचालित कृषि सिंचाई प्रणाली का व्यक्तिगत दौरा किया। उन्होंने मोहनपुर के सौर ऊर्जा संचालित चाय बागान गाँव का भी निरीक्षण किया और स्थानीय किसानों से सीधी बातचीत की।

मंत्री ने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या ये पंप दीर्घकालिक रूप से चालू रहते हैं और किसानों की आय में मापनीय वृद्धि होती है। ₹3 लाख प्रति इकाई की लागत में से किसान का मात्र ₹15,000 का योगदान एक साहसिक सब्सिडी मॉडल है, जो राज्य के वित्त पर टिकाऊपन के सवाल उठाता है। गौरतलब है कि देश भर में कई सौर सिंचाई परियोजनाएँ रखरखाव की कमी के कारण कुछ वर्षों में निष्क्रिय हो जाती हैं। त्रिपुरा सरकार को संख्याओं की उपलब्धि के साथ-साथ दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव की ठोस योजना भी सार्वजनिक करनी चाहिए।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-कुसुम योजना क्या है?
पीएम-कुसुम यानी प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान, केंद्र सरकार की एक योजना है जिसके तहत किसानों को सौर ऊर्जा संचालित सिंचाई पंप उपलब्ध कराए जाते हैं। इसका उद्देश्य डीज़ल-आधारित सिंचाई को सौर ऊर्जा से प्रतिस्थापित करना और किसानों की लागत कम करना है।
त्रिपुरा में पीएम-कुसुम के तहत अब तक कितने किसानों को लाभ मिला है?
त्रिपुरा में अब तक 8,364 किसानों को पीएम-कुसुम योजना के तहत सौर सिंचाई पंप मिल चुके हैं। 2,531 और पंपों की स्थापना पूरी होने पर यह संख्या 10,895 तक पहुँच जाएगी।
त्रिपुरा में सौर पंप के लिए किसान को कितना खर्च करना होता है?
प्रत्येक सौर पंप इकाई की कुल लागत लगभग ₹3 लाख है, जिसमें से किसान को केवल ₹15,000 देने होते हैं। शेष पूरी राशि त्रिपुरा सरकार वहन करती है।
पूर्वोत्तर में त्रिपुरा का पीएम-कुसुम में कौन-सा स्थान है?
कृषि मंत्री रतन लाल नाथ के अनुसार, त्रिपुरा ने पीएम-कुसुम योजना के क्रियान्वयन में पूर्वोत्तर भारत में पहला स्थान हासिल किया है।
त्रिपुरा सरकार का पीएम-कुसुम के तहत अंतिम लक्ष्य क्या है?
राज्य सरकार का लक्ष्य कुल 10,895 सौर सिंचाई पंप स्थापित करना है, जिससे 54,475 कनी कृषि भूमि को सिंचाई के अंतर्गत लाया जा सके।
राष्ट्र प्रेस