आईबीएम की सब-1 नैनोमीटर चिप: 0.7nm 'नैनोस्टैक' तकनीक से सेमीकंडक्टर उद्योग में नया अध्याय
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी आईबीएम ने 25 जून 2026 को दुनिया की पहली सब-1 नैनोमीटर चिप तकनीक का अनावरण किया — एक ऐसी उपलब्धि जिसे सेमीकंडक्टर विशेषज्ञ भौतिक सीमाओं की दहलीज़ पर खड़े चिप उद्योग के लिए ऐतिहासिक मान रहे हैं। यह नई चिप 0.7 नैनोमीटर (7 एंग्स्ट्रॉम) प्रोसेस नोड पर आधारित है और इसमें 'नैनोस्टैक' नामक एक नवीन 3-डायमेंशनल ट्रांजिस्टर आर्किटेक्चर का उपयोग किया गया है।
नैनोस्टैक तकनीक क्या है और यह कैसे काम करती है
आईबीएम के अनुसार, नैनोस्टैक आर्किटेक्चर में ट्रांजिस्टरों को एक के ऊपर एक, अलग-अलग स्तरों पर व्यवस्थित किया जाता है। इससे एक ही चिप पर अधिक संख्या में ट्रांजिस्टर समाहित करना संभव होता है। साथ ही, विभिन्न सामग्रियों को स्वतंत्र रूप से अनुकूलित किया जा सकता है, जिससे प्रदर्शन और ऊर्जा दक्षता दोनों में एक साथ सुधार होता है।
इस चिप में लगभग 100 अरब ट्रांजिस्टर समाए हैं, जबकि इसका आकार एक सामान्य नाखून जितना है। यह 2021 में प्रस्तुत आईबीएम की 2 नैनोमीटर चिप की तुलना में लगभग दोगुनी ट्रांजिस्टर घनत्व प्रदान करती है।
प्रदर्शन और ऊर्जा दक्षता में कितना सुधार
कंपनी का दावा है कि नई तकनीक 2nm चिप्स की तुलना में 50 प्रतिशत तक बेहतर प्रदर्शन या 70 प्रतिशत अधिक ऊर्जा दक्षता प्रदान कर सकती है। आईबीएम के शोधकर्ताओं ने यह भी प्रदर्शित किया कि नैनोस्टैक तकनीक SRAM स्केलिंग को उल्लेखनीय रूप से बेहतर बना सकती है, जिससे चिप डिज़ाइनरों को AI-आधारित भारी डेटा प्रोसेसिंग और हाई-बैंडविड्थ वर्कलोड के लिए अधिक सक्षम प्रोसेसर बनाने में सहायता मिलेगी।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
आईबीएम रिसर्च के निदेशक और आईबीएम फेलो जे गैम्बेटा ने इसे कंप्यूटिंग जगत का एक ऐतिहासिक पड़ाव बताया। उन्होंने कहा, 'आईबीएम की यह नई चिप तकनीक कंप्यूटिंग को नैनोमीटर युग से आगे ले जाकर सीधे परमाणु स्तर तक पहुंचाने वाली बड़ी सफलता है।' विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आने वाले वर्षों में अधिक शक्तिशाली, तेज़ और ऊर्जा-कुशल AI सिस्टम, क्लाउड सर्वर और स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।
वैश्विक सहयोग और व्यावसायिक संभावनाएँ
यह शोध अल्बानी, न्यूयॉर्क स्थित आईबीएम के सेमीकंडक्टर रिसर्च सेंटर में किया गया। इस परियोजना में ASML, लैम रिसर्च, टोक्यो इलेक्ट्रॉन और स्क्रीन सेमीकंडक्टर सॉल्यूशंस जैसी प्रमुख वैश्विक कंपनियों ने सहयोग किया। कंपनी का अनुमान है कि इस तकनीक का पहला व्यावसायिक उपयोग अगले पाँच वर्षों के भीतर शुरू हो सकता है। भविष्य में जेनरेटिव AI, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस तकनीक के व्यापक अनुप्रयोग की संभावना है।