भारत को FY35 तक 1.5 अरब स्क्वायर फीट प्राइवेट एजुकेशन इन्फ्रा की ज़रूरत: CBRE रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
सीबीआरई साउथ एशिया की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत को वित्त वर्ष 2034-35 तक लगभग 1.5 अरब स्क्वायर फीट अतिरिक्त प्राइवेट एजुकेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी। यह रिपोर्ट 30 अक्टूबर 2026 को जारी की गई और इसमें कहा गया है कि यह विशाल मांग रियल एस्टेट डेवलपर्स तथा संस्थागत निवेशकों के लिए अभूतपूर्व अवसर खोलेगी।
मांग का स्रोत और विभाजन
रिपोर्ट के अनुसार, कुल 1.5 अरब स्क्वायर फीट की इस अतिरिक्त माँग में सबसे बड़ा हिस्सा निजी के-12 स्कूलों का होगा, जो लगभग 0.9 बिलियन वर्ग फुट होगा। इसके अलावा, बिना सरकारी सहायता वाले निजी उच्च शिक्षण संस्थानों से लगभग 0.4 बिलियन वर्ग फुट की माँग आने का अनुमान है। यह मांग मुख्य रूप से भारत की युवा आबादी, स्कूलों एवं कॉलेजों में बढ़ते नामांकन, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की लगातार बढ़ती माँग से प्रेरित है।
निवेशकों की रणनीति और 'OpCo-PropCo' मॉडल
रिपोर्ट में बताया गया है कि संस्थागत निवेशक, विशेष रूप से समृद्ध शहरी बाज़ारों में, बड़े स्तर पर विस्तार करने वाले प्रीमियम के-12 प्लेटफॉर्म्स में गहरी रुचि दिखा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 'निवेशक स्ट्रक्चर्ड ऑपरेटिंग कंपनी-प्रॉपर्टी कंपनी (OpCo-PropCo) मॉडल पर भी विचार कर रहे हैं, जो रियल एस्टेट के स्वामित्व को शैक्षणिक कार्यों से अलग करता है।' इस व्यवस्था से डेवलपर्स और प्रॉपर्टी मालिकों को लीज़ या रेवेन्यू-शेयरिंग के ज़रिए कमाई के अवसर मिल सकते हैं, साथ ही शिक्षा के बुनियादी ढाँचे का विस्तार भी सुनिश्चित हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय
सीबीआरई में भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के चेयरमैन एवं सीईओ अंशुमान मैगज़ीन ने कहा, 'जैसे-जैसे निजी शिक्षा प्रदाता अलग-अलग बाज़ारों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं, वैसे-वैसे स्केलेबल बुनियादी ढाँचा और ऑपरेटिंग मॉडल लंबी अवधि की वृद्धि में मददगार साबित हो सकते हैं। इस माँग को पूरा करने में डेवलपर्स और स्थापित शिक्षा संचालकों के बीच की साझेदारी एक अहम भूमिका निभा सकती है।'
सीबीआरई में भारत, मध्य पूर्व और अफ्रीका के कंसल्टिंग एवं वैल्युएशन सर्विसेज़ के मैनेजिंग डायरेक्टर रामी कौशल ने कहा, 'स्थापित शिक्षा केंद्र और बड़ी छात्र आबादी वाले उभरते शहर विस्तार के अच्छे अवसर देते हैं। लेकिन किसी प्रोजेक्ट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उसकी लोकेशन कैसी है, बुनियादी ढाँचा कितना उपयुक्त है, और क्या वे भरोसेमंद शिक्षा संचालकों के साथ साझेदारी कर रहे हैं।'
भौगोलिक विस्तार: महानगरों से टियर-II शहरों तक
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में शिक्षा के बुनियादी ढाँचे का दायरा भौगोलिक रूप से भी फैल रहा है। बड़े महानगरों में पहले से ही संगठित निजी स्कूल और उच्च शिक्षा संस्थान सक्रिय हैं, जबकि अब कुछ टियर-II शहर भी निवेशकों का ध्यान खींच रहे हैं। शैक्षणिक संस्थान क्षेत्रीय बाज़ारों में अपने विस्तार की संभावनाएँ तलाश रहे हैं, जो दीर्घकालिक निवेश की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण संकेत है।
आगे की संभावनाएँ
गौरतलब है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े के-12 और उच्च शिक्षा बाज़ारों में से एक है, और निजीकरण की रफ़्तार आने वाले वर्षों में और तेज़ होने की उम्मीद है। CBRE की इस रिपोर्ट के बाद शिक्षा क्षेत्र में अवसंरचना निवेश की दिशा और रणनीति को लेकर नीति-निर्माताओं, डेवलपर्स तथा निवेशकों के बीच संवाद और तेज़ होने की संभावना है।