ऑटो सेक्टर में औद्योगिक लीजिंग 54 लाख वर्ग फुट पर पहुंची, पुणे सबसे बड़ा बाज़ार: CBRE रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत के ऑटोमोबाइल और सहायक उद्योगों ने 2024 से 2026 की पहली छमाही के दौरान लगभग 54 लाख वर्ग फुट औद्योगिक जगह लीज पर ली — जो इस अवधि में देश की कुल निर्मित औद्योगिक मांग का करीब 13 प्रतिशत है। CBRE की बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, वाहन निर्माताओं का विस्तार और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उत्पादन में तेज़ी इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारण हैं।
मांग का स्वरूप और प्रमुख खिलाड़ी
CBRE रिपोर्ट के अनुसार, औद्योगिक जगह की लीजिंग में घरेलू कंपनियों की सबसे बड़ी भागीदारी रही — कुल मांग में उनका योगदान 57 प्रतिशत था। एशिया-प्रशांत क्षेत्र की कंपनियों की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत और यूरोप, मध्य पूर्व एवं अफ्रीका (EMEA) की कंपनियों की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत रही।
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत के ऑटो सेक्टर में विदेशी निवेश की रुचि बनी हुई है, लेकिन विस्तार की बागडोर अभी भी घरेलू कंपनियों के हाथ में है।
शहरों में पुणे सबसे आगे
शहरवार विश्लेषण में पुणे ऑटोमोबाइल क्षेत्र की औद्योगिक लीजिंग में 28 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष स्थान पर रहा। दिल्ली-एनसीआर 25 प्रतिशत के साथ दूसरे और चेन्नई 20 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
गौरतलब है कि पुणे लंबे समय से भारत का ऑटोमोबाइल हब रहा है, जहाँ Tata Motors, Bajaj Auto और कई वैश्विक ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं की प्रमुख इकाइयाँ स्थित हैं।
बड़ी इकाइयों को प्राथमिकता
2026 की पहली छमाही में 1 लाख से 2 लाख वर्ग फुट क्षेत्रफल वाली इकाइयों की लीजिंग कुल मांग का 46 प्रतिशत रही, जबकि 2 लाख वर्ग फुट से बड़ी इकाइयों की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत रही। इस तरह, बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ मिलकर ऑटो सेक्टर की कुल लीजिंग का 84 प्रतिशत भाग बनाती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोमोबाइल कंपनियाँ अब बड़ी और आधुनिक विनिर्माण सुविधाओं को प्राथमिकता दे रही हैं — जो तकनीकी उन्नयन और EV उत्पादन लाइनों की माँग को दर्शाता है।
उत्पादन और निर्यात में उछाल
CBRE के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वाहन उत्पादन 3.5 करोड़ इकाइयों तक पहुँच गया। इसके साथ ही ऑटोमोबाइल निर्यात सालाना आधार पर 14.7 प्रतिशत बढ़कर करीब 26 अरब डॉलर हो गया।
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि यह क्षेत्र अभी भारत के विनिर्माण GDP में करीब आधे का योगदान देता है — जो इसे औद्योगिक नीति की दृष्टि से सर्वोच्च प्राथमिकता वाला क्षेत्र बनाता है।
वेयरहाउसिंग: चेन्नई का दबदबा
वेयरहाउसिंग के मोर्चे पर, ऑटोमोबाइल और सहायक उद्योगों ने 2021 से 2026 की पहली छमाही के बीच लगभग 1.24 करोड़ वर्ग फुट जगह लीज पर ली। इस श्रेणी में चेन्नई 29 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अग्रणी रहा, उसके बाद दिल्ली-एनसीआर (22 प्रतिशत) और बेंगलुरु (14 प्रतिशत) का स्थान रहा।
टायर निर्माताओं, यात्री वाहन निर्माताओं और ऑटोमोबाइल कलपुर्जा कंपनियों ने मिलकर वेयरहाउस की कुल मांग में दो-तिहाई से अधिक योगदान दिया।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
CBRE के भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के चेयरमैन एवं सीईओ अंशुमान मैगजीन ने कहा कि भारत का ऑटोमोबाइल विनिर्माण आधार लगातार विविधतापूर्ण हो रहा है। उनके अनुसार, 'घरेलू मांग उद्योग को बड़े पैमाने पर उत्पादन का आधार दे रही है, जबकि निर्यात में मजबूती, EV और उन्नत ऑटोमोबाइल कलपुर्जों का बढ़ता उत्पादन इस क्षेत्र का विस्तार कर रहा है।'
मैगजीन ने यह भी जोड़ा कि वाहन निर्माताओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता अब औद्योगिक भूमि, भरोसेमंद बुनियादी ढाँचे, कुशल कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं के नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी पर निर्भर करेगी। आने वाले वर्षों में EV और तकनीकी-उन्नत कलपुर्जों की माँग बढ़ने के साथ इस क्षेत्र में और विस्तार की संभावना बनी रहेगी।