4 नवंबर 2026
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ऑटो सेक्टर में औद्योगिक लीजिंग 54 लाख वर्ग फुट पर पहुंची, पुणे सबसे बड़ा बाज़ार: CBRE रिपोर्ट

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ऑटो सेक्टर में औद्योगिक लीजिंग 54 लाख वर्ग फुट पर पहुंची, पुणे सबसे बड़ा बाज़ार: CBRE रिपोर्ट

सारांश

भारत के ऑटो सेक्टर ने 2024–2026 पहली छमाही में 54 लाख वर्ग फुट औद्योगिक जगह लीज पर ली — कुल औद्योगिक मांग का 13%। पुणे 28% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर, EV और कलपुर्जों के उत्पादन से विस्तार को रफ्तार। वाहन निर्यात सालाना 14.7% बढ़कर 26 अरब डॉलर पर पहुँचा।

मुख्य बातें

भारत के ऑटोमोबाइल और सहायक उद्योगों ने 2024 से 2026 की पहली छमाही में लगभग 54 लाख वर्ग फुट औद्योगिक जगह लीज पर ली — कुल औद्योगिक मांग का 13% ।
पुणे ने 28% हिस्सेदारी के साथ ऑटो औद्योगिक लीजिंग में पहला स्थान हासिल किया; दिल्ली-एनसीआर ( 25% ) और चेन्नई ( 20% ) का क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान।
घरेलू कंपनियों की हिस्सेदारी 57% ; एशिया-प्रशांत 26% और EMEA 15% ।
2 लाख वर्ग फुट से बड़ी इकाइयाँ और 1–2 लाख वर्ग फुट वाली इकाइयाँ मिलकर कुल लीजिंग का 84% हिस्सा बनाती हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में वाहन उत्पादन 3.5 करोड़ इकाइयों पर पहुँचा; ऑटो निर्यात 14.7% बढ़कर करीब 26 अरब डॉलर ।
वेयरहाउसिंग में 2021–2026 के दौरान 1.24 करोड़ वर्ग फुट लीज; चेन्नई 29% के साथ शीर्ष पर।

भारत के ऑटोमोबाइल और सहायक उद्योगों ने 2024 से 2026 की पहली छमाही के दौरान लगभग 54 लाख वर्ग फुट औद्योगिक जगह लीज पर ली — जो इस अवधि में देश की कुल निर्मित औद्योगिक मांग का करीब 13 प्रतिशत है। CBRE की बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, वाहन निर्माताओं का विस्तार और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उत्पादन में तेज़ी इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारण हैं।

मांग का स्वरूप और प्रमुख खिलाड़ी

CBRE रिपोर्ट के अनुसार, औद्योगिक जगह की लीजिंग में घरेलू कंपनियों की सबसे बड़ी भागीदारी रही — कुल मांग में उनका योगदान 57 प्रतिशत था। एशिया-प्रशांत क्षेत्र की कंपनियों की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत और यूरोप, मध्य पूर्व एवं अफ्रीका (EMEA) की कंपनियों की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत रही।

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत के ऑटो सेक्टर में विदेशी निवेश की रुचि बनी हुई है, लेकिन विस्तार की बागडोर अभी भी घरेलू कंपनियों के हाथ में है।

शहरों में पुणे सबसे आगे

शहरवार विश्लेषण में पुणे ऑटोमोबाइल क्षेत्र की औद्योगिक लीजिंग में 28 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष स्थान पर रहा। दिल्ली-एनसीआर 25 प्रतिशत के साथ दूसरे और चेन्नई 20 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

गौरतलब है कि पुणे लंबे समय से भारत का ऑटोमोबाइल हब रहा है, जहाँ Tata Motors, Bajaj Auto और कई वैश्विक ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं की प्रमुख इकाइयाँ स्थित हैं।

बड़ी इकाइयों को प्राथमिकता

2026 की पहली छमाही में 1 लाख से 2 लाख वर्ग फुट क्षेत्रफल वाली इकाइयों की लीजिंग कुल मांग का 46 प्रतिशत रही, जबकि 2 लाख वर्ग फुट से बड़ी इकाइयों की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत रही। इस तरह, बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ मिलकर ऑटो सेक्टर की कुल लीजिंग का 84 प्रतिशत भाग बनाती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोमोबाइल कंपनियाँ अब बड़ी और आधुनिक विनिर्माण सुविधाओं को प्राथमिकता दे रही हैं — जो तकनीकी उन्नयन और EV उत्पादन लाइनों की माँग को दर्शाता है।

उत्पादन और निर्यात में उछाल

CBRE के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वाहन उत्पादन 3.5 करोड़ इकाइयों तक पहुँच गया। इसके साथ ही ऑटोमोबाइल निर्यात सालाना आधार पर 14.7 प्रतिशत बढ़कर करीब 26 अरब डॉलर हो गया।

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि यह क्षेत्र अभी भारत के विनिर्माण GDP में करीब आधे का योगदान देता है — जो इसे औद्योगिक नीति की दृष्टि से सर्वोच्च प्राथमिकता वाला क्षेत्र बनाता है।

वेयरहाउसिंग: चेन्नई का दबदबा

वेयरहाउसिंग के मोर्चे पर, ऑटोमोबाइल और सहायक उद्योगों ने 2021 से 2026 की पहली छमाही के बीच लगभग 1.24 करोड़ वर्ग फुट जगह लीज पर ली। इस श्रेणी में चेन्नई 29 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अग्रणी रहा, उसके बाद दिल्ली-एनसीआर (22 प्रतिशत) और बेंगलुरु (14 प्रतिशत) का स्थान रहा।

टायर निर्माताओं, यात्री वाहन निर्माताओं और ऑटोमोबाइल कलपुर्जा कंपनियों ने मिलकर वेयरहाउस की कुल मांग में दो-तिहाई से अधिक योगदान दिया।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

CBRE के भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के चेयरमैन एवं सीईओ अंशुमान मैगजीन ने कहा कि भारत का ऑटोमोबाइल विनिर्माण आधार लगातार विविधतापूर्ण हो रहा है। उनके अनुसार, 'घरेलू मांग उद्योग को बड़े पैमाने पर उत्पादन का आधार दे रही है, जबकि निर्यात में मजबूती, EV और उन्नत ऑटोमोबाइल कलपुर्जों का बढ़ता उत्पादन इस क्षेत्र का विस्तार कर रहा है।'

मैगजीन ने यह भी जोड़ा कि वाहन निर्माताओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता अब औद्योगिक भूमि, भरोसेमंद बुनियादी ढाँचे, कुशल कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं के नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी पर निर्भर करेगी। आने वाले वर्षों में EV और तकनीकी-उन्नत कलपुर्जों की माँग बढ़ने के साथ इस क्षेत्र में और विस्तार की संभावना बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत के ऑटो सेक्टर में संरचनात्मक बदलाव का संकेत है — घरेलू माँग से निर्यात-केंद्रित और EV-तैयार उत्पादन की ओर। लेकिन ध्यान देने योग्य यह है कि बड़ी इकाइयों की लीजिंग (84%) तो बढ़ रही है, पर रोज़गार-सघन छोटे कलपुर्जा निर्माताओं की स्थिति इस तस्वीर में धुंधली रहती है। वाहन निर्यात में 14.7% की बढ़ोतरी उत्साहजनक है, मगर वैश्विक मंदी के जोखिम और EV संक्रमण में आपूर्ति श्रृंखला की जटिलता इस विस्तार को चुनौती दे सकती है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के ऑटो सेक्टर ने 2024-2026 में कितनी औद्योगिक जगह लीज पर ली?
CBRE की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के ऑटोमोबाइल और सहायक उद्योगों ने 2024 से 2026 की पहली छमाही के दौरान लगभग 54 लाख वर्ग फुट औद्योगिक क्षेत्र लीज पर लिया। यह इस अवधि में देश की कुल निर्मित औद्योगिक मांग का करीब 13 प्रतिशत है।
ऑटोमोबाइल औद्योगिक लीजिंग में कौन-सा शहर सबसे आगे रहा?
पुणे 28% हिस्सेदारी के साथ ऑटोमोबाइल औद्योगिक लीजिंग का सबसे बड़ा बाज़ार रहा। दिल्ली-एनसीआर 25% और चेन्नई 20% के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
ऑटो सेक्टर की लीजिंग में घरेलू बनाम विदेशी कंपनियों का हिस्सा क्या रहा?
घरेलू कंपनियों की हिस्सेदारी 57% रही, जो सबसे अधिक थी। एशिया-प्रशांत क्षेत्र की कंपनियों का योगदान 26% और यूरोप, मध्य पूर्व एवं अफ्रीका की कंपनियों का हिस्सा 15% रहा।
भारत का ऑटोमोबाइल निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में कितना रहा?
CBRE रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का ऑटोमोबाइल निर्यात सालाना आधार पर 14.7 प्रतिशत बढ़कर करीब 26 अरब डॉलर हो गया। इसी अवधि में वाहन उत्पादन 3.5 करोड़ इकाइयों तक पहुँचा।
ऑटो सेक्टर की वेयरहाउसिंग लीजिंग में कौन-से शहर और कंपनियाँ अग्रणी रहीं?
2021 से 2026 की पहली छमाही के दौरान ऑटोमोबाइल और सहायक उद्योगों ने करीब 1.24 करोड़ वर्ग फुट वेयरहाउस जगह लीज पर ली। चेन्नई 29% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर रहा, उसके बाद दिल्ली-एनसीआर (22%) और बेंगलुरु (14%) का स्थान रहा। टायर निर्माताओं, यात्री वाहन निर्माताओं और कलपुर्जा कंपनियों ने मिलकर दो-तिहाई से अधिक वेयरहाउस मांग का प्रतिनिधित्व किया।
राष्ट्र प्रेस
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