20 जुलाई 2026
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भारत बनेगा जैव-अर्थव्यवस्था का वैश्विक नेता: DCPC सचिव तेजवीर सिंह का बड़ा दावा

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भारत बनेगा जैव-अर्थव्यवस्था का वैश्विक नेता: DCPC सचिव तेजवीर सिंह का बड़ा दावा

सारांश

भारत की जैव-अर्थव्यवस्था की दौड़ अब केवल नीतिगत बयानबाज़ी नहीं रही। DCPC सचिव तेजवीर सिंह ने ‘बायोपीएसएफ 2026’ में स्पष्ट किया कि मज़बूत वैज्ञानिक आधार, जैव विविधता और स्टार्टअप इकोसिस्टम के दम पर देश जैव-आधारित कृषि इनपुट का वैश्विक नेता बन सकता है — बशर्ते फॉर्मूलेशन तकनीक और किसान-अपनाव की चुनौती हल हो।

मुख्य बातें

DCPC सचिव तेजवीर सिंह ने 3 जून को नई दिल्ली में ‘बायोपीएसएफ 2026’ के समापन सत्र में बयान दिया।
भारत के पास जैव-अर्थव्यवस्था और जैव-आधारित कृषि इनपुट में वैश्विक नेतृत्व की ‘अपार संभावनाएं’ बताई गईं।
तीन प्रमुख ताक़तें — मज़बूत वैज्ञानिक आधार, समृद्ध जैव विविधता और तेज़ी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम।
जैव-कीटनाशकों की सफलता मज़बूत फॉर्मूलेशन तकनीकों पर निर्भर बताई गई।
आयोजन IPFT, गुरुग्राम के 36वें स्थापना दिवस के तहत हुआ।
लक्ष्य ‘विकसित भारत 2047’ के तहत मज़बूत जैव-अर्थव्यवस्था का निर्माण।

भारत जैव-अर्थव्यवस्था और जैव-आधारित कृषि इनपुट क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, यह बात रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग (DCPC) के सचिव तेजवीर सिंह ने 3 जून को नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी ‘बायोपीएसएफ 2026’ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कही। सरकार के अनुसार, टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने वाली नीतियों और बायो-इकोनॉमी से जुड़ी लक्षित पहलों ने इस दिशा में गति प्रदान की है।

मुख्य घोषणा और संदर्भ

सिंह ने कहा कि भारत के पास इस क्षेत्र में वैश्विक नेता बनने की ‘अपार संभावनाएं’ हैं। उन्होंने इसके पीछे तीन प्रमुख कारण गिनाए — देश का मज़बूत वैज्ञानिक आधार, समृद्ध जैव विविधता और तेज़ी से विकसित हो रहा स्टार्टअप इकोसिस्टम।

उन्होंने विश्वास जताया कि वैज्ञानिक उत्कृष्टता, उद्योग-शैक्षणिक साझेदारी और युवा नवाचारकर्ताओं का तकनीकी योगदान भविष्य की टिकाऊ कृषि समाधान विकसित करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

जैव-कीटनाशकों पर फॉर्मूलेशन का ज़ोर

DCPC सचिव ने रेखांकित किया कि जैव-कीटनाशकों की वास्तविक सफलता मज़बूत फॉर्मूलेशन तकनीकों के विकास पर निर्भर करती है। उनके अनुसार, ऐसी तकनीकें उत्पाद की स्थिरता, खेतों में प्रभावशीलता, उपयोग में आसानी और किसानों द्वारा अपनाए जाने की संभावना — चारों को बढ़ा सकती हैं।

यह टिप्पणी इस मायने में अहम है कि भारत में जैव-कीटनाशकों की पैठ रासायनिक विकल्पों की तुलना में अब भी सीमित है, और किसानों तक पहुँच की चुनौती लंबे समय से बनी हुई है।

आयोजन और संस्थागत भूमिका

‘बायोपीएसएफ 2026’ का आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ पेस्टिसाइड फॉर्मूलेशन टेक्नोलॉजी (IPFT), गुरुग्राम ने किया, जो रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन DCPC की एक स्वायत्त संस्था है। मंत्रालय के अनुसार, यह कार्यक्रम IPFT के 36वें स्थापना दिवस समारोह के तहत आयोजित हुआ।

कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग प्रतिनिधियों, नियामक संस्थाओं, शिक्षाविदों, उद्यमियों, स्टार्टअप्स, छात्रों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया, और जैव-आधारित कृषि इनपुट से जुड़े नवीनतम विकास पर चर्चा की।

‘विकसित भारत 2047’ से जुड़ाव

सिंह ने कहा कि जैसे-जैसे देश ‘विकसित भारत 2047’ और मज़बूत जैव-अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को मज़बूत करने, अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ने और स्टार्टअप-आधारित नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता बढ़ रही है।

उन्होंने जैव-आधारित रसायनों, फसल सुरक्षा तकनीकों और टिकाऊ कृषि इनपुट के क्षेत्र में नवाचार को ‘समय की मांग’ बताया। आने वाले महीनों में IPFT जैसी संस्थाओं की भूमिका इस लक्ष्य की दिशा में और महत्वपूर्ण होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीनी आँकड़े बताते हैं कि जैव-कीटनाशकों की हिस्सेदारी रासायनिक विकल्पों के सामने अब भी मामूली है। तेजवीर सिंह का फॉर्मूलेशन तकनीक पर ज़ोर सही दिशा में है — क्योंकि किसान-अपनाव की असली बाधा उत्पाद की स्थिरता और खेत-स्तर पर प्रभावशीलता है, न कि सिर्फ़ नीति। ‘विकसित भारत 2047’ का जैव-अर्थव्यवस्था पिलर तभी ठोस बनेगा जब अनुसंधान, उद्योग और स्टार्टअप के बीच की कागज़ी साझेदारियाँ मापने योग्य उत्पाद-व्यावसायीकरण में बदलें।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

‘बायोपीएसएफ 2026’ कार्यक्रम क्या है?
यह जैव-आधारित कृषि इनपुट और फॉर्मूलेशन तकनीकों पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कार्यशाला है, जो नई दिल्ली में आयोजित हुई। इसका आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ पेस्टिसाइड फॉर्मूलेशन टेक्नोलॉजी (IPFT), गुरुग्राम ने अपने 36वें स्थापना दिवस के तहत किया।
DCPC सचिव तेजवीर सिंह ने जैव-अर्थव्यवस्था पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि भारत के पास जैव-अर्थव्यवस्था और जैव-आधारित कृषि इनपुट क्षेत्र में वैश्विक नेता बनने की अपार संभावनाएं हैं। इसके पीछे उन्होंने देश के मज़बूत वैज्ञानिक आधार, समृद्ध जैव विविधता और बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम को कारण बताया।
जैव-कीटनाशकों की सफलता किस पर निर्भर है?
DCPC सचिव के अनुसार, जैव-कीटनाशकों की वास्तविक सफलता मज़बूत फॉर्मूलेशन तकनीकों के विकास पर निर्भर करती है। ये तकनीकें उत्पाद की स्थिरता, खेत-स्तर पर प्रभावशीलता, उपयोग में आसानी और किसानों द्वारा अपनाए जाने की संभावना को बढ़ाती हैं।
IPFT क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
इंस्टीट्यूट ऑफ पेस्टिसाइड फॉर्मूलेशन टेक्नोलॉजी (IPFT), गुरुग्राम, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग (DCPC) की एक स्वायत्त संस्था है। यह कीटनाशक फॉर्मूलेशन से जुड़े अनुसंधान, प्रशिक्षण और नवाचार पर काम करती है।
‘विकसित भारत 2047’ से जैव-अर्थव्यवस्था का क्या जुड़ाव है?
सरकार के अनुसार, ‘विकसित भारत 2047’ के व्यापक लक्ष्य में मज़बूत जैव-अर्थव्यवस्था एक प्रमुख पिलर है। इसके लिए स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को मज़बूत करना, अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ना और स्टार्टअप-आधारित नवाचार को बढ़ावा देना आवश्यक बताया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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