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नैसकॉम: कृषि और जल क्षेत्र का डीपटेक इकोसिस्टम तेज़ी से बढ़ रहा है, 12 स्टार्टअप्स ने पेश किए स्केलेबल समाधान

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नैसकॉम: कृषि और जल क्षेत्र का डीपटेक इकोसिस्टम तेज़ी से बढ़ रहा है, 12 स्टार्टअप्स ने पेश किए स्केलेबल समाधान

सारांश

नैसकॉम के 'डीपटेक कॉन्फ्लुएंस 2026' में भारत के कृषि और जल क्षेत्र की डीपटेक क्रांति का नया अध्याय खुला — 12 स्टार्टअप्स पायलट से निकलकर असली उद्योग-स्तरीय विस्तार की दहलीज़ पर खड़े हैं। AI, IoT और जलवायु तकनीक के मेल से बने ये समाधान जलवायु संकट और खाद्य सुरक्षा की दोहरी चुनौती का जवाब देने का दावा करते हैं।

मुख्य बातें

नैसकॉम ने 12 जून 2026 को नई दिल्ली में 'डीपटेक कॉन्फ्लुएंस 2026' कार्यक्रम आयोजित किया।
डीटीसी एक्सेलेरेट के 20 सप्ताह के कार्यक्रम से जुड़े 12 स्टार्टअप्स ने कृषि और जल प्रबंधन के स्केलेबल समाधान प्रस्तुत किए।
नैसकॉम की वरिष्ठ उपाध्यक्ष संगीता गुप्ता ने कहा कि AI, IoT, जैव प्रौद्योगिकी और जलवायु तकनीकें इन क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकती हैं।
कई एग्रीटेक और वॉटरटेक स्टार्टअप्स अभी भी पायलट स्तर से बड़े पैमाने पर विस्तार में कठिनाइयाँ महसूस कर रहे हैं।
नैसकॉम का लक्ष्य स्टार्टअप्स को उद्योगों, निवेशकों और सरकारी एजेंसियों से जोड़कर तकनीकों का वास्तविक क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।

नई दिल्ली में 12 जून 2026 को आयोजित 'डीपटेक कॉन्फ्लुएंस 2026' कार्यक्रम में नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज़ (नैसकॉम) ने घोषणा की कि भारत का कृषि और जल प्रबंधन क्षेत्र से जुड़ा डीपटेक इकोसिस्टम अब पायलट चरण से आगे निकलकर बड़े पैमाने पर व्यावसायिक विस्तार की ओर बढ़ रहा है। संस्था के अनुसार, उद्यमी, निवेशक और नीति-निर्माता तेज़ी से ऐसे स्केलेबल समाधानों की ओर आकर्षित हो रहे हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), जैव प्रौद्योगिकी और जलवायु तकनीकों पर आधारित हैं।

मुख्य घटनाक्रम

इस कार्यक्रम में नैसकॉम डीपटेक क्लब के 20 सप्ताह के विकास कार्यक्रम 'डीटीसी एक्सेलेरेट' से जुड़े 12 नवोन्मेषी स्टार्टअप्स ने अपने समाधान प्रस्तुत किए। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य डीपटेक स्टार्टअप्स को पायलट परियोजनाओं से आगे बढ़ाकर उद्योगों में बड़े स्तर पर लागू करने योग्य बनाना है।

डीपटेक कॉन्फ्लुएंस 2026 ने बाज़ार तक पहुँच, उद्योगों द्वारा तकनीक अपनाने, निवेश की तैयारी, पायलट परियोजनाओं के विस्तार और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषयों पर गहन चर्चा के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराया।

विशेषज्ञ की राय

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नैसकॉम की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और मुख्य रणनीति अधिकारी संगीता गुप्ता ने कहा, 'कृषि और जल प्रबंधन ऐसे दो महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, जहाँ डीपटेक तकनीकें आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक स्तर पर बड़ा प्रभाव डाल सकती हैं।'

उन्होंने आगे कहा, 'भारत में ऐसे उद्यमियों की मज़बूत आधारशिला मौजूद है, जो AI, IoT, जैव प्रौद्योगिकी, मटेरियल साइंस, सेंसर तकनीक, ऑटोमेशन और जलवायु तकनीकों को मिलाकर नए समाधान विकसित कर रहे हैं।' गुप्ता ने यह भी बताया कि नैसकॉम इस मंच के ज़रिए स्टार्टअप्स को बेहतर बाज़ार पहुँच, उद्योगों के साथ जुड़ाव और तकनीकों के प्रभावी क्रियान्वयन के अवसर उपलब्ध करा रहा है।

चुनौतियाँ और संदर्भ

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब भारत का कृषि और जल क्षेत्र जलवायु परिवर्तन, स्थिरता संबंधी चिंताओं, सीमित संसाधनों और उत्पादन क्षमता बनाए रखने की बढ़ती ज़रूरत जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में एग्रीटेक और वॉटरटेक क्षेत्र में नवाचार तेज़ी से बढ़े हैं, फिर भी कई स्टार्टअप्स अपनी तकनीकों को पायलट स्तर से बड़े पैमाने पर लागू करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

नैसकॉम के अनुसार, डीपटेक कॉन्फ्लुएंस का उद्देश्य इसी अंतर को पाटना है — नवाचार करने वाले स्टार्टअप्स को उद्योगों, निवेशकों, सरकारी एजेंसियों और क्रियान्वयन भागीदारों से जोड़कर उनकी तकनीकों का वास्तविक दुनिया में उपयोग और विस्तार सुनिश्चित करना।

आगे की राह

नैसकॉम की यह पहल भारत के व्यापक डिजिटल कृषि और जल सुरक्षा एजेंडे के साथ संरेखित है। आने वाले समय में डीटीसी एक्सेलेरेट कार्यक्रम के तहत और अधिक स्टार्टअप्स को उद्योग-स्तरीय तैनाती के लिए तैयार किए जाने की उम्मीद है, जो भारत के कृषि और जल प्रबंधन क्षेत्र में तकनीकी परिवर्तन की गति को और तेज़ कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'पायलट से स्केल' का यह सफर कितने स्टार्टअप्स वास्तव में तय कर पाते हैं। भारत में एग्रीटेक और वॉटरटेक में नवाचार की कमी नहीं है, कमी है उस संस्थागत समर्थन की जो तकनीक को खेत और नहर तक पहुँचाए। जलवायु परिवर्तन और घटते भूजल स्तर को देखते हुए यह क्षेत्र अब 'भविष्य की प्राथमिकता' नहीं, बल्कि 'तत्काल ज़रूरत' बन चुका है। नैसकॉम जैसी संस्थाओं की भूमिका तब सार्थक होगी जब इन 12 स्टार्टअप्स की सफलता को मापने योग्य परिणामों — जैसे जल बचत के आँकड़े, किसानों की आय में वृद्धि — से जोड़ा जाए।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नैसकॉम का 'डीपटेक कॉन्फ्लुएंस 2026' क्या है?
यह नैसकॉम द्वारा नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य कृषि और जल प्रबंधन क्षेत्र के डीपटेक स्टार्टअप्स को उद्योगों, निवेशकों और नीति-निर्माताओं से जोड़ना है। इसमें बाज़ार पहुँच, तकनीक अपनाने और पायलट परियोजनाओं के विस्तार पर चर्चा हुई।
डीटीसी एक्सेलेरेट कार्यक्रम क्या है?
डीटीसी एक्सेलेरेट नैसकॉम डीपटेक क्लब का 20 सप्ताह का विकास कार्यक्रम है, जो डीपटेक स्टार्टअप्स को पायलट चरण से आगे बढ़ाकर उद्योग-स्तरीय क्रियान्वयन के लिए तैयार करता है। इस कार्यक्रम के तहत 12 स्टार्टअप्स ने डीपटेक कॉन्फ्लुएंस 2026 में अपने समाधान प्रस्तुत किए।
भारत के कृषि और जल क्षेत्र में डीपटेक क्यों ज़रूरी है?
भारत का कृषि और जल क्षेत्र जलवायु परिवर्तन, सीमित संसाधनों और उत्पादन क्षमता बनाए रखने की चुनौतियों से जूझ रहा है। AI, IoT और जलवायु तकनीक आधारित डीपटेक समाधान इन समस्याओं का स्केलेबल और डेटा-संचालित तरीके से समाधान करने में सक्षम हैं।
एग्रीटेक और वॉटरटेक स्टार्टअप्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
नैसकॉम के अनुसार, अधिकांश स्टार्टअप्स अपनी तकनीकों को पायलट स्तर पर तो सफलतापूर्वक प्रदर्शित कर लेते हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर उद्योगों में लागू करने में कठिनाई होती है। उद्योगों, निवेशकों और सरकारी एजेंसियों से संपर्क की कमी इस 'पायलट से स्केल' की खाई का मुख्य कारण है।
नैसकॉम इन स्टार्टअप्स की कैसे मदद कर रहा है?
नैसकॉम डीपटेक कॉन्फ्लुएंस जैसे मंचों के ज़रिए स्टार्टअप्स को बेहतर बाज़ार पहुँच, उद्योग जुड़ाव और निवेश की तैयारी में सहायता कर रहा है। इसके अलावा डीटीसी एक्सेलेरेट कार्यक्रम के माध्यम से स्टार्टअप्स को क्रियान्वयन भागीदारों और सरकारी एजेंसियों से जोड़ा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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