25 जुलाई 2026
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भारत बनेगा माइनिंग-कंस्ट्रक्शन उपकरणों का वैश्विक हब: CII-BCG रिपोर्ट में ₹9-10 लाख करोड़ के कैपेक्स का रोडमैप

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भारत बनेगा माइनिंग-कंस्ट्रक्शन उपकरणों का वैश्विक हब: CII-BCG रिपोर्ट में ₹9-10 लाख करोड़ के कैपेक्स का रोडमैप

सारांश

CII और BCG की नई रिपोर्ट भारत के माइनिंग-कंस्ट्रक्शन उपकरण उद्योग को वैश्विक हब बनाने का रोडमैप देती है। ₹17 अरब डॉलर के इस उद्योग में सालाना 10-12% वृद्धि का अनुमान है और 2030 तक कैपेक्स ₹9-10 लाख करोड़ तक पहुँच सकता है।

मुख्य बातें

CII और BCG ने 25 जुलाई 2026 को भारत के माइनिंग-कंस्ट्रक्शन उपकरण उद्योग पर संयुक्त रिपोर्ट जारी की।
उद्योग का मौजूदा अनुमानित आकार 17 अरब अमेरिकी डॉलर ; सालाना 10-12% वृद्धि का अनुमान।
संबंधित क्षेत्रों में पूंजीगत व्यय 2025 के ₹5.5 लाख करोड़ से बढ़कर 2030 तक ₹9-10 लाख करोड़ होने का अनुमान।
भारत में मशीनीकरण का स्तर अभी वैश्विक औसत से काफी कम — आधुनिक उपकरणों की माँग के लिए व्यापक संभावना।
रिपोर्ट में स्थानीयकरण, ऑटोमेशन, इलेक्ट्रिफिकेशन और कनेक्टेड इक्विपमेंट पर ज़ोर।
CII महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी और BCG पार्टनर अभिषेक भाटिया ने उद्योग-सरकार सहयोग को निर्णायक बताया।

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) ने 25 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में संयुक्त रूप से एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की, जिसमें भारत को माइनिंग और कंस्ट्रक्शन उपकरणों के निर्माण एवं निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने की विस्तृत रणनीति प्रस्तुत की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस उद्योग का मौजूदा अनुमानित आकार 17 अरब अमेरिकी डॉलर है और इसमें सालाना 10 से 12 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।

रिपोर्ट में क्या है रोडमैप

रिपोर्ट — जिसका शीर्षक 'Pressing the Throttle: How India's Mining and Construction Equipment Industry Can Support Domestic Ambitions and Become a Global Force' है — में घरेलू विनिर्माण को सशक्त बनाने, स्थानीयकरण बढ़ाने, नई तकनीकों को तेज़ी से अपनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति मज़बूत करने के लिए स्पष्ट कदम सुझाए गए हैं। रिपोर्ट में ऑटोमेशन, इलेक्ट्रिफिकेशन और कनेक्टेड इक्विपमेंट को उद्योग के भविष्य की धुरी बताया गया है।

पूंजीगत व्यय में बड़ी छलांग का अनुमान

रिपोर्ट के अनुसार, सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, शहरी बुनियादी ढाँचे, खनन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में लगातार बढ़ते निवेश के चलते माइनिंग और कंस्ट्रक्शन उपकरण क्षेत्र से जुड़ा पूंजीगत व्यय 2025 के लगभग ₹5.5 लाख करोड़ से बढ़कर 2030 तक ₹9 से 10 लाख करोड़ तक पहुँच सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में मशीनीकरण का स्तर अभी भी वैश्विक औसत से काफी कम है, जो भविष्य में आधुनिक उपकरणों की माँग के लिए व्यापक संभावनाएँ दर्शाता है।

विशेषज्ञों की राय

CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि माइनिंग और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर भारत की आधारभूत संरचना और औद्योगिक विकास की महत्वाकांक्षाओं का अहम हिस्सा है। उन्होंने उद्योग-सरकार सहयोग, निवेश, नवाचार, कौशल विकास और 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत रेखांकित की।

CII माइनिंग एंड कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट डिवीज़न के चेयरमैन विवेक भाटिया ने कहा कि 'विकसित भारत' का सपना विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना, मज़बूत विनिर्माण और आधुनिक खनन क्षेत्र के दम पर ही साकार होगा। उनके अनुसार यह उद्योग उस परिवर्तन का प्रमुख आधार बनेगा।

BCG के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं पार्टनर अभिषेक भाटिया ने कहा कि भारतीय निर्माताओं के पास वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षमता विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भारत की स्थिति मज़बूत करने का सुनहरा अवसर है — विशेषकर जब ऑटोमेशन, इलेक्ट्रिफिकेशन और कनेक्टेड इक्विपमेंट जैसी तकनीकें तेज़ी से उद्योग का चेहरा बदल रही हैं।

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर

गौरतलब है कि यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत सरकार बुनियादी ढाँचे पर रिकॉर्ड खर्च कर रही है। यदि रोडमैप के सुझावों पर अमल हुआ, तो इससे न केवल घरेलू उद्योग को बल मिलेगा, बल्कि रोज़गार सृजन, निर्यात आय और तकनीकी उन्नयन के मोर्चे पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। भारत में मशीनीकरण का स्तर वैश्विक औसत से नीचे होना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन रिपोर्ट इसे अवसर के रूप में देखती है।

आगे की राह

रिपोर्ट में सुझाए गए कदमों को लागू करने के लिए उद्योग जगत और नीति-निर्माताओं के बीच ठोस समन्वय की ज़रूरत होगी। स्थानीयकरण, कौशल विकास और तकनीकी नवाचार — ये तीनों स्तंभ भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या नीतिगत इच्छाशक्ति इस बार ज़मीन पर उतरेगी — क्योंकि भारत में मशीनीकरण का वैश्विक औसत से पिछड़ना दशकों पुरानी समस्या है, जिसे पहले भी कई रिपोर्टें रेखांकित कर चुकी हैं। ₹9-10 लाख करोड़ के कैपेक्स का अनुमान तभी सार्थक होगा जब घरेलू निर्माताओं को आयात-प्रतिस्पर्धा से संरक्षण, तकनीकी साझेदारी और कौशल विकास का ठोस ढाँचा एक साथ मिले। स्थानीयकरण और निर्यात महत्वाकांक्षा के बीच संतुलन साधना इस उद्योग की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CII-BCG की माइनिंग और कंस्ट्रक्शन उपकरण रिपोर्ट क्या है?
यह 25 जुलाई 2026 को जारी संयुक्त रिपोर्ट है, जिसमें भारत को माइनिंग और कंस्ट्रक्शन उपकरणों के निर्माण एवं निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने की रणनीति प्रस्तुत की गई है। रिपोर्ट में स्थानीयकरण, नवाचार, ऑटोमेशन और उद्योग-सरकार सहयोग पर विशेष ज़ोर दिया गया है।
भारत के माइनिंग-कंस्ट्रक्शन उपकरण उद्योग का मौजूदा आकार कितना है?
रिपोर्ट के अनुसार इस उद्योग का अनुमानित आकार वर्तमान में 17 अरब अमेरिकी डॉलर है और इसमें सालाना 10 से 12 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है।
2030 तक इस क्षेत्र में कितना पूंजीगत व्यय अपेक्षित है?
रिपोर्ट के अनुसार, बुनियादी ढाँचे में बढ़ते निवेश के चलते माइनिंग और कंस्ट्रक्शन उपकरण क्षेत्र से जुड़ा पूंजीगत व्यय 2025 के लगभग ₹5.5 लाख करोड़ से बढ़कर 2030 तक ₹9 से 10 लाख करोड़ तक पहुँच सकता है।
भारत में मशीनीकरण की स्थिति वैश्विक स्तर पर कहाँ है?
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मशीनीकरण का स्तर अभी भी वैश्विक औसत से काफी कम है। यही कमी भविष्य में आधुनिक उपकरणों की माँग और नई तकनीकों को अपनाने के लिए व्यापक अवसर भी प्रस्तुत करती है।
इस रिपोर्ट में किन तकनीकों को उद्योग का भविष्य बताया गया है?
रिपोर्ट में ऑटोमेशन, इलेक्ट्रिफिकेशन और कनेक्टेड इक्विपमेंट को उद्योग के भविष्य की धुरी बताया गया है। BCG के अनुसार ये तकनीकें तेज़ी से उद्योग का चेहरा बदल रही हैं और भारतीय निर्माताओं के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने का सुनहरा अवसर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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