4 अगस्त 2026
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मानसून से भारत की बिजली मांग घटकर 241 गीगावाट, 21 मई के रिकॉर्ड 270.8 GW से काफी नीचे

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मानसून से भारत की बिजली मांग घटकर 241 गीगावाट, 21 मई के रिकॉर्ड 270.8 GW से काफी नीचे

सारांश

मानसून की दस्तक ने भारत की रिकॉर्ड बिजली माँग को 270.8 GW के शिखर से खींचकर 241 GW पर ला दिया और स्पॉट कीमतें एक साल के निचले स्तर पर आ गईं — लेकिन AI-संचालित डेटा सेंटर्स की वैश्विक भूख दीर्घकालिक ऊर्जा नियोजन के सामने नया सवाल खड़ा कर रही है।

मुख्य बातें

16 जून को भारत की उच्चतम बिजली माँग घटकर 241 गीगावाट रही, जो 21 मई के ऑल-टाइम हाई 270.8 गीगावाट से काफी कम है।
माँग में गिरावट का कारण देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून का आगमन और एसी-कूलिंग उपकरणों के उपयोग में कमी है।
इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) के अनुसार जून मध्य में औसत स्पॉट पावर कीमत ₹3.6 प्रति किलोवाट-घंटा — एक वर्ष पहले की तुलना में 18% कम।
भारत के ऊर्जा मिश्रण में कोयले की हिस्सेदारी 68% , सोलर 19% और हाइड्रो 7% रही।
गार्टनर के अनुसार वैश्विक डेटा सेंटर बिजली माँग 2026 में 26.4% बढ़कर 565 टेरावाट-घंटे होने का अनुमान है।

ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया के आँकड़ों के अनुसार, मानसून की दस्तक के साथ भारत की उच्चतम बिजली माँग 16 जून को घटकर 241 गीगावाट रह गई — जो 21 मई को दर्ज किए गए ऑल-टाइम हाई 270.8 गीगावाट और 9 जून की 259 गीगावाट की माँग से उल्लेखनीय रूप से कम है। देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश के कारण एयर-कंडीशनर और अन्य कूलिंग उपकरणों का उपयोग घटना इस राहत की प्रमुख वजह बताई जा रही है।

मांग में गिरावट की वजह

भारत में बिजली की माँग आमतौर पर मई-जून में अपने चरम पर होती है, जब भीषण गर्मी के चलते घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कूलिंग उपकरणों की खपत बढ़ जाती है। मानसून के आगमन से तापमान में गिरावट आती है, जिससे एसी और कूलर की ज़रूरत कम हो जाती है और ग्रिड पर दबाव घटता है। इस वर्ष भी यही पैटर्न दोहराया गया है।

ऊर्जा मिश्रण की स्थिति

ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया के डेटा के मुताबिक, भारत के ऊर्जा मिश्रण में कोयले से उत्पन्न बिजली की हिस्सेदारी 68% बनी हुई है, जबकि सोलर और हाइड्रो की भागीदारी क्रमशः 19% और 7% दर्ज की गई। नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती क्षमता के बावजूद कोयला अभी भी ग्रिड की रीढ़ बना हुआ है।

बिजली बाज़ार पर असर

इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) के आँकड़ों के अनुसार, जून के मध्य में औसत स्पॉट पावर की कीमत ₹3.6 प्रति किलोवाट-घंटा रही, जो एक वर्ष पहले की तुलना में 18% कम है। 16 जून को रियल-टाइम मार्केट में कीमतें ₹4.5 प्रति किलोवाट-घंटा थीं, जबकि 21 मई को रिकॉर्ड माँग के समय ये ₹6.5 प्रति किलोवाट-घंटा तक पहुँच गई थीं। यह गिरावट उद्योग और बड़े उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है।

वैश्विक परिदृश्य: डेटा सेंटर से बढ़ती माँग

जहाँ भारत में मौसमी राहत मिली है, वहीं वैश्विक स्तर पर बिजली की खपत में तेज़ी का रुझान जारी है। व्यापार और प्रौद्योगिकी अनुसंधान कंपनी गार्टनर, इंक. की रिपोर्ट के अनुसार, डेटा सेंटर्स के लिए वैश्विक बिजली माँग 2026 में 26.4% बढ़ने का अनुमान है — 2025 के 447 टेरावाट-घंटे से बढ़कर 565 टेरावाट-घंटे तक पहुँचने की संभावना है। इस वृद्धि का मुख्य कारण कंप्यूट-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वर्कलोड है, जो बिजली की माँग को नए उच्चतम स्तरों तक धकेल रहा है।

आगे की राह

मानसून की प्रगति के साथ अगले कुछ हफ्तों में बिजली माँग और बाज़ार कीमतों में नरमी बने रहने की संभावना है। हालाँकि, AI और डेटा सेंटर्स की बढ़ती माँग दीर्घकालिक ऊर्जा नियोजन के लिए एक नई चुनौती के रूप में उभर रही है, जिस पर नीति-निर्माताओं और ग्रिड प्रबंधकों की नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

संरचनात्मक समाधान नहीं — भारत का ऊर्जा मिश्रण अभी भी 68% कोयले पर टिका है, जो नवीकरणीय ऊर्जा के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों से मेल नहीं खाता। इससे भी बड़ा सवाल यह है कि AI-संचालित डेटा सेंटर्स की वैश्विक माँग जब 2026 में 26.4% उछलेगी, तो भारत के ग्रिड पर दबाव फिर बढ़ेगा — और तब मानसून राहत देने नहीं आएगा। नीति-निर्माताओं को मौसमी उतार-चढ़ाव की आड़ में दीर्घकालिक ग्रिड लचीलेपन की ज़रूरत को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मानसून के बाद भारत की बिजली माँग कितनी घटी?
ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया के आँकड़ों के अनुसार, 16 जून को भारत की उच्चतम बिजली माँग 241 गीगावाट रही — जो 21 मई के रिकॉर्ड 270.8 गीगावाट से लगभग 30 गीगावाट कम है। एसी और कूलिंग उपकरणों के उपयोग में कमी इसकी प्रमुख वजह है।
भारत में बिजली की स्पॉट कीमतों पर क्या असर पड़ा?
इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) के अनुसार, जून मध्य में औसत स्पॉट पावर कीमत ₹3.6 प्रति किलोवाट-घंटा रही, जो एक साल पहले की तुलना में 18% कम है। 21 मई को रिकॉर्ड माँग के समय यह कीमत ₹6.5 प्रति किलोवाट-घंटा तक पहुँच गई थी।
भारत के ऊर्जा मिश्रण में किसकी हिस्सेदारी सबसे अधिक है?
ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया के डेटा के मुताबिक, कोयले से उत्पन्न बिजली की हिस्सेदारी 68% है, इसके बाद सोलर 19% और हाइड्रो 7% है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ने के बावजूद कोयला अभी भी ग्रिड का मुख्य आधार बना हुआ है।
डेटा सेंटर्स से वैश्विक बिजली माँग पर क्या असर पड़ेगा?
गार्टनर, इंक. की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में डेटा सेंटर्स की वैश्विक बिजली माँग 26.4% बढ़कर 565 टेरावाट-घंटे होने का अनुमान है, जो 2025 में 447 टेरावाट-घंटे थी। AI वर्कलोड की बढ़ती कंप्यूटिंग ज़रूरतें इस उछाल की मुख्य वजह हैं।
भारत में बिजली माँग सबसे अधिक कब होती है?
भारत में बिजली माँग आमतौर पर मई और जून में सर्वाधिक होती है, जब भीषण गर्मी के कारण घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कूलिंग उपकरणों का उपयोग चरम पर होता है। मानसून के आगमन के साथ तापमान गिरने से माँग में स्वाभाविक कमी आती है।
राष्ट्र प्रेस
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