21 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत-यूके क्रिटिकल मिनरल्स ऑब्जर्वेटरी सेंटर लॉन्च, $4 अरब के राष्ट्रीय मिशन को मिली नई रफ़्तार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत-यूके क्रिटिकल मिनरल्स ऑब्जर्वेटरी सेंटर लॉन्च, $4 अरब के राष्ट्रीय मिशन को मिली नई रफ़्तार

सारांश

भारत और ब्रिटेन ने क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्र में एक नया संस्थागत स्तंभ खड़ा किया है। जीएससीओ सैटेलाइट सेंटर का उद्घाटन $4 अरब के राष्ट्रीय मिशन और 2047 के 'विकसित भारत' लक्ष्य की दिशा में एक ठोस कदम है — और वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला में भारत की बढ़ती भूमिका का संकेत।

मुख्य बातें

किशन रेड्डी और ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेटे कूपर ने नई दिल्ली में भारत-यूके जीएससीओ सैटेलाइट सेंटर का संयुक्त उद्घाटन किया।
यह केंद्र प्रधानमंत्री मोदी और कीर स्टार्मर की 2025 की साझा घोषणा का परिणाम है।
सरकार ने $4 अरब के नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के तहत खनन, प्रसंस्करण और रीसाइक्लिंग को प्राथमिकता दी है।
रीसाइक्लिंग के लिए $18 करोड़ की विशेष योजना और देशभर में 9 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं।
ऑब्जर्वेटरी दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल मटेरियल फ्लो मैप का केंद्र बनेगी।

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी और ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेटे कूपर ने 5 जून 2025 को संयुक्त रूप से भारत-यूके क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी (जीएससीओ) सैटेलाइट सेंटर का उद्घाटन किया। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर द्वारा वर्ष 2025 में की गई उस साझा घोषणा का अनुसरण करता है, जिसमें दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन के क्षेत्र में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई थी। नई दिल्ली में हुए इस उद्घाटन के साथ भारत-यूके रणनीतिक साझेदारी ने एक ठोस संस्थागत रूप ले लिया है।

ऑब्जर्वेटरी की भूमिका और महत्व

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह ऑब्जर्वेटरी दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल मटेरियल फ्लो मैप का प्रमुख केंद्र बनेगी। इसका उद्देश्य उद्योगों, शोधकर्ताओं और निवेशकों को क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा और विश्लेषण उपलब्ध कराना है, ताकि बेहतर निर्णय लिए जा सकें और नई परियोजनाओं को प्रोत्साहन मिले। मंत्री रेड्डी ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत तकनीकों और डिजिटल परिवर्तन के तेज़ विस्तार के साथ क्रिटिकल मिनरल्स वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनते जा रहे हैं।

राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन और निवेश योजनाएँ

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य के तहत क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसी क्रम में $4 अरब (लगभग ₹33,000 करोड़) के नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन की शुरुआत की गई है, जिसका लक्ष्य खनिजों की खोज, खनन, प्रसंस्करण, रीसाइक्लिंग और नवाचार को मज़बूत बनाना है। इसके अतिरिक्त, सरकार क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए $18 करोड़ की विशेष योजना लागू कर रही है और देश भर में 9 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं।

नीतिगत सुधार और निवेश का माहौल

रेड्डी ने बताया कि सरकार पारदर्शी ई-नीलामी व्यवस्था के साथ-साथ निजी और जूनियर माइनिंग कंपनियों को नए अवसर दे रही है। तेज़ मंजूरी प्रक्रियाओं और निवेश-अनुकूल नीतियों के ज़रिए भारत को खनिज क्षेत्र में दुनिया के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में शुमार करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार औद्योगिक कचरे से मूल्यवान खनिजों की पुनर्प्राप्ति और विदेशों में खनिज संपत्तियों के विकास जैसे कदम भी उठा रही है।

ब्रिटेन को निवेश का आमंत्रण

केंद्रीय मंत्री ने ब्रिटेन की कंपनियों, निवेशकों और तकनीकी संस्थानों को भारत के क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्र में निवेश करने का खुला आमंत्रण दिया। उनके अनुसार, खनिज प्रसंस्करण और खनन तकनीक में ब्रिटेन की विशेषज्ञता भारत के इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, एयरोस्पेस और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को नई गति दे सकती है। यह ऑब्जर्वेटरी आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त क्रिटिकल मिनरल्स इंटेलिजेंस केंद्र के रूप में विकसित होने की राह पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि यह 'इंटेलिजेंस हब' व्यावसायिक निर्णयों को किस हद तक प्रभावित करता है। $4 अरब का राष्ट्रीय मिशन महत्वाकांक्षी है, पर भारत अभी भी लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा खनिजों के प्रसंस्करण में चीन पर भारी निर्भर है — एक संरचनात्मक कमज़ोरी जिसे कोई भी ऑब्जर्वेटरी अकेले नहीं पाट सकती। ब्रिटेन की विशेषज्ञता और भारत की खनिज क्षमता का संयोजन सैद्धांतिक रूप से मज़बूत है, लेकिन जब तक घरेलू प्रसंस्करण अवसंरचना में वास्तविक निवेश नहीं होता, यह साझेदारी डेटा-साझाकरण से आगे नहीं बढ़ पाएगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-यूके क्रिटिकल मिनरल्स जीएससीओ सैटेलाइट सेंटर क्या है?
यह भारत और यूनाइटेड किंगडम द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित एक संस्थागत केंद्र है, जो वैश्विक क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन की निगरानी, डेटा विश्लेषण और डिजिटल मैपिंग करेगा। इसका उद्घाटन नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी और ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेटे कूपर ने किया।
नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन का बजट और लक्ष्य क्या है?
$4 अरब के इस मिशन का लक्ष्य भारत में खनिजों की खोज, खनन, प्रसंस्करण, रीसाइक्लिंग और नवाचार को मज़बूत करना है। यह मिशन 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य के तहत खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया है।
इस ऑब्जर्वेटरी से भारत को क्या फायदा होगा?
यह ऑब्जर्वेटरी उद्योगों, शोधकर्ताओं और निवेशकों को क्रिटिकल मिनरल्स का वास्तविक समय डेटा और विश्लेषण उपलब्ध कराएगी। इससे इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, एयरोस्पेस और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए सप्लाई चेन सुरक्षित करने में मदद मिलेगी।
क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग के लिए सरकार क्या कर रही है?
सरकार $18 करोड़ की विशेष रीसाइक्लिंग योजना लागू कर रही है और देश भर में 9 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं। औद्योगिक कचरे से मूल्यवान खनिजों की पुनर्प्राप्ति और विदेशों में खनिज संपत्तियों के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
भारत-यूके क्रिटिकल मिनरल्स साझेदारी की शुरुआत कब हुई?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने वर्ष 2025 में क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी स्थापित करने की संयुक्त घोषणा की थी। जीएससीओ सैटेलाइट सेंटर का उद्घाटन उसी घोषणा का व्यावहारिक क्रियान्वयन है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले