भारत-ब्रिटेन ने लॉन्च की क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी, GSCO से मजबूत होगी खनिज नीति
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी और ब्रिटेन की विदेश, राष्ट्रमंडल एवं विकास मामलों की राज्य सचिव यवेट कूपर ने 4 जून 2026 को नई दिल्ली में भारत-ब्रिटेन महत्वपूर्ण खनिज वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला वेधशाला (GSCO) का औपचारिक उद्घाटन किया। यह साझा मंच स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और उन्नत विनिर्माण के लिए अनिवार्य खनिजों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी और विश्लेषण करेगा।
GSCO क्या है और कैसे काम करेगी
GSCO एक डेटा-संचालित प्लेटफॉर्म है जिसे टेक्समिन (TechSMIN — Technology Innovation in Exploration and Mining Foundation) की संयुक्त पहल के रूप में विकसित किया गया है। यह आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित एक तकनीकी ट्रांसलेशनल रिसर्च पार्क की उपज है। यह प्लेटफॉर्म वैश्विक क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन की निगरानी, आपूर्ति जोखिमों एवं व्यवधानों की पहचान, बाज़ार-आसूचना तैयार करने और नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत तथा शोधकर्ताओं को साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सहायता करेगा।
लॉन्च कार्यक्रम में टेक्समिन और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने मिलकर ऑब्जर्वेटरी का एक इंटरैक्टिव प्रदर्शन भी प्रस्तुत किया।
मुख्य घटनाक्रम और पृष्ठभूमि
इस पहल की नींव अक्टूबर 2025 में भारत-ब्रिटेन प्रधानमंत्रियों की द्विपक्षीय वार्ता के दौरान रखी गई थी। इसके बाद मार्च 2026 में एक शोध सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर कर इसे औपचारिक स्वरूप दिया गया। गौरतलब है कि यह लॉन्च ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति पर भू-राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है और प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ अपनी सप्लाई चेन को विविध एवं सुरक्षित बनाने की होड़ में हैं।
मंत्रियों के वक्तव्य
संबोधन में किशन रेड्डी ने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तथा रणनीतिक क्षेत्रों के लिए अपरिहार्य हैं। उन्होंने कहा कि यह ऑब्जर्वेटरी क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन इंटेलिजेंस में भारत की क्षमताओं को सुदृढ़ करेगी और राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) के लक्ष्यों को गति देगी।
यवेट कूपर ने जोर देते हुए कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स तक व्यापक पहुँच और बेहतर सूचना-साझाकरण दोनों देशों के साझा हित में है, जिससे आर्थिक विकास और सप्लाई चेन की सुरक्षा दोनों को बल मिलेगा। उनके अनुसार, यह साझेदारी रणनीतिक उद्योगों में गहरे सहयोग की नींव बन सकती है।
आम जनता और उद्योग पर असर
आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के निदेशक एवं टेक्समिन गवर्निंग बोर्ड के अध्यक्ष सुकुमार मिश्रा ने NCMM और भारत-ब्रिटेन तकनीकी सुरक्षा पहल के तहत इस कदम के महत्व को रेखांकित किया। लॉन्च कार्यक्रम में भारत के खनिज मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ब्रिटेन उच्चायोग, टेक्समिन, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों के साथ-साथ दोनों देशों के उद्योग, शिक्षा जगत और शोध संस्थानों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
क्या होगा आगे
उम्मीद है कि GSCO आने वाले समय में भारत-ब्रिटेन क्रिटिकल मिनरल सहयोग को एक संस्थागत ढाँचा प्रदान करेगी और लचीली, सुरक्षित तथा टिकाऊ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण में सहायक सिद्ध होगी। यह पहल भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें विश्वसनीय भागीदारों के साथ मिलकर खनिज मूल्य श्रृंखला को विविध और आत्मनिर्भर बनाया जाना है।