भारत-अमेरिका ट्रेड डील सैद्धांतिक रूप से लगभग तय, कानूनी भाषा पर अंतिम काम जारी: राजदूत सर्जियो गोर
सारांश
मुख्य बातें
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 23 अगस्त को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान घोषणा की कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील सैद्धांतिक रूप से लगभग पूरी हो चुकी है और अब दोनों पक्ष केवल कानूनी एवं तकनीकी भाषा को अंतिम रूप देने के काम में जुटे हैं। गोर के अनुसार, समझौते की मुख्य शर्तें तय हो चुकी हैं और शेष प्रक्रिया में दस्तावेज़ के कुछ अनुभागों को पुनर्व्यवस्थित एवं परिष्कृत करना शामिल है।
समझौते की मौजूदा स्थिति
राजदूत गोर ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "सिद्धांत रूप में, ट्रेड डील का लगभग सारा काम पूरा हो चुका है।" उन्होंने बताया कि अंतिम रूप देने में हो रही देरी का मुख्य कारण कानूनी और तकनीकी भाषा से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाएँ हैं, न कि किसी मूलभूत मतभेद का अभाव। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता कई महीनों से चल रही है और वैश्विक टैरिफ तनाव के बीच इस डील को रणनीतिक महत्व का माना जा रहा है।
रूसी तेल पर टैरिफ और भारत की चिंताएँ
गोर ने अमेरिकी कांग्रेस में प्रस्तावित उस विधेयक पर भी चर्चा की, जिसके तहत रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस कदम का भारत पर असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। हालाँकि, गोर ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस की पहल नहीं है, बल्कि इसे अमेरिकी कांग्रेस के दोनों दलों के नेताओं का समर्थन मिल रहा है।
उन्होंने कहा, "यह ऐसी चीज नहीं है जिसका व्हाइट हाउस ने समर्थन किया हो। आपको राष्ट्रपति ट्रंप का इसे आगे बढ़ाते हुए कोई क्लिप नहीं मिलेगा।" गोर ने यह भी जोड़ा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ध्यान फिलहाल रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने पर केंद्रित है, और उन्होंने इस युद्ध को खत्म करना "बेहद जरूरी" बताया।
मोदी-ट्रंप संबंध: व्यक्तिगत दोस्ती का असर
राजदूत गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच के संबंधों को "गहरी और व्यक्तिगत दोस्ती" करार दिया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता नतीजों पर ध्यान देने वाले और तेज़ी से काम करने में विश्वास रखने वाले हैं। गोर के अनुसार, "वे दोनों ही आगे की सोचने वाले हैं, तेजी से काम करना चाहते हैं और नतीजों पर ध्यान देते हैं। हमारे राष्ट्रपति प्रधानमंत्री का बहुत सम्मान करते हैं।"
गोर ने 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद के उस दौर का भी उल्लेख किया, जब ट्रंप पद पर नहीं थे। उनके अनुसार, उस कठिन समय में मोदी के निरंतर समर्थन ने ट्रंप पर गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने कहा, "जब आप ऊंचे ओहदे पर होते हैं तो हर कोई आपका दोस्त बनना चाहता है। लेकिन जब आप पद पर नहीं होते, तभी आपको असल में पता चलता है कि आपके दोस्त कौन हैं। और उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके सच्चे दोस्त साबित हुए।"
द्विपक्षीय संबंधों पर असर
गोर के अनुसार, मोदी और ट्रंप के बीच आपसी भरोसे ने भारत-अमेरिका संबंधों को एक नई मजबूती दी है। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है और यह ट्रेड डील उसे और गति देने की उम्मीद जगाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते के लागू होने से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाज़ार में बेहतर पहुँच मिल सकती है, हालाँकि अंतिम शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं।
आगे की राह
कानूनी और तकनीकी भाषा पर काम पूरा होते ही दोनों पक्षों द्वारा समझौते को औपचारिक रूप दिए जाने की उम्मीद है। रूसी तेल पर प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ विधेयक की स्थिति और ट्रेड डील के बीच संतुलन बनाना आने वाले हफ्तों में भारत की कूटनीतिक प्राथमिकता रहेगी।