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भारत-अमेरिका ट्रेड डील सैद्धांतिक रूप से लगभग तय, कानूनी भाषा पर काम जारी: राजदूत सर्जियो गोर

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील सैद्धांतिक रूप से लगभग तय, कानूनी भाषा पर काम जारी: राजदूत सर्जियो गोर

सारांश

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता सैद्धांतिक रूप से लगभग तय हो चुका है — यह बात अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने नई दिल्ली में कही। अब केवल कानूनी और तकनीकी भाषा पर काम बाकी है। साथ ही गोर ने रूसी तेल पर 100% टैरिफ के प्रस्ताव और ट्रंप-मोदी की 'गहरी व्यक्तिगत दोस्ती' पर भी बात की।

मुख्य बातें

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 23 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील सैद्धांतिक रूप से लगभग पूरी हो चुकी है।
शेष कार्य में समझौते की कानूनी और तकनीकी भाषा को अंतिम रूप देना शामिल है।
अमेरिकी कांग्रेस में प्रस्तावित कानून के तहत रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लग सकता है; गोर ने कहा यह व्हाइट हाउस की पहल नहीं है।
गोर ने राष्ट्रपति ट्रंप और PM मोदी के संबंधों को 'गहरी और व्यक्तिगत दोस्ती' बताया।
गोर के अनुसार, 2020 के बाद जब ट्रंप पद पर नहीं थे, तब मोदी के समर्थन ने दोनों के रिश्ते को और मज़बूत किया।

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता सैद्धांतिक रूप से लगभग अंतिम चरण में पहुँच गया है। नई दिल्ली में 23 अगस्त 2026 को एक कार्यक्रम में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि समझौते की मूल शर्तें तय हो चुकी हैं और अब दोनों पक्ष केवल कानूनी एवं तकनीकी भाषा को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत-अमेरिका व्यापार संबंध कई मोर्चों पर नई दिशा तलाश रहे हैं।

समझौते की मौजूदा स्थिति

राजदूत सर्जियो गोर ने स्पष्ट किया कि ट्रेड डील का मुख्य ढाँचा तैयार हो चुका है। उन्होंने कहा, "सिद्धांत रूप में, ट्रेड डील का लगभग सारा काम पूरा हो चुका है।" उन्होंने बताया कि शेष कार्य में समझौते के कुछ हिस्सों को पुनर्व्यवस्थित करना और तकनीकी भाषा को परिष्कृत करना शामिल है — जो किसी भी बड़े द्विपक्षीय व्यापार वार्ता की सामान्य प्रक्रिया है।

रूसी तेल और टैरिफ प्रस्ताव पर चिंता

गोर ने अमेरिकी कांग्रेस में प्रस्तावित उस कानून पर भी बात की जिसके तहत रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव को दोनों राजनीतिक दलों के नेताओं का समर्थन मिल रहा है, लेकिन यह व्हाइट हाउस की पहल नहीं है। गोर ने कहा, "यह ऐसी चीज नहीं है जिसका व्हाइट हाउस ने समर्थन किया हो। आपको राष्ट्रपति ट्रंप का इसे आगे बढ़ाते हुए कोई क्लिप नहीं मिलेगा।" यह स्वीकार करते हुए कि इस कदम का भारत पर असर पड़ सकता है, उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ध्यान रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने पर केंद्रित है।

ट्रंप-मोदी की 'गहरी और व्यक्तिगत दोस्ती'

गोर ने राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंधों को "गहरी और व्यक्तिगत दोस्ती" बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता परिणाम-केंद्रित हैं और आपसी हित के मुद्दों पर तेज़ी से आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "वे दोनों ही आगे की सोचने वाले हैं, तेजी से काम करना चाहते हैं और नतीजों पर ध्यान देते हैं। हमारे राष्ट्रपति प्रधानमंत्री का बहुत सम्मान करते हैं।"

मोदी की वफ़ादारी ने ट्रंप पर छोड़ी गहरी छाप

2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद जब ट्रंप पद पर नहीं थे, उस दौर को याद करते हुए गोर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के निरंतर समर्थन ने ट्रंप पर गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने कहा, "जब आप ऊंचे ओहदे पर होते हैं, तो हर कोई आपका दोस्त बनना चाहता है। लेकिन जब आप पद पर नहीं होते, तभी आपको असल में पता चलता है कि आपके दोस्त कौन हैं। और उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके सच्चे दोस्त साबित हुए।" गोर के अनुसार, इसी आपसी भरोसे ने दोनों देशों के रिश्तों को और मज़बूत आधार दिया है।

आगे की राह

गौरतलब है कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता कई महीनों से चल रही है और दोनों पक्ष टैरिफ, बाज़ार पहुँच और डिजिटल व्यापार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश में हैं। कानूनी और तकनीकी भाषा को अंतिम रूप मिलने के बाद ही औपचारिक हस्ताक्षर की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'सैद्धांतिक रूप से लगभग पूरा' और 'वास्तव में हस्ताक्षरित' के बीच की दूरी भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं के इतिहास में कई बार बहुत लंबी साबित हुई है। रूसी तेल पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव — जिसे गोर ने व्हाइट हाउस से अलग बताया — भारत के लिए एक असली जोखिम है, क्योंकि भारत रूस से बड़ी मात्रा में रियायती तेल खरीदता है। यह विरोधाभास उजागर करता है कि ट्रेड डील की गर्मजोशी और कांग्रेसनल दबाव एक साथ चल रहे हैं — और भारत को दोनों मोर्चों पर सतर्क कूटनीति बरतनी होगी।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-अमेरिका ट्रेड डील अभी किस चरण में है?
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार, यह डील सैद्धांतिक रूप से लगभग पूरी हो चुकी है और अब केवल कानूनी एवं तकनीकी भाषा को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। औपचारिक हस्ताक्षर की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।
रूसी तेल पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव भारत को कैसे प्रभावित कर सकता है?
अमेरिकी कांग्रेस में प्रस्तावित इस कानून के तहत रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लग सकता है, जिससे भारत प्रभावित हो सकता है क्योंकि भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है। हालाँकि राजदूत गोर ने स्पष्ट किया कि यह व्हाइट हाउस की पहल नहीं है।
ट्रंप और मोदी के संबंध भारत-अमेरिका डील में क्या भूमिका निभाते हैं?
राजदूत गोर ने दोनों नेताओं के संबंधों को 'गहरी और व्यक्तिगत दोस्ती' बताया, जो व्यापार वार्ताओं को गति देने में सहायक मानी जा रही है। गोर के अनुसार, 2020 के बाद ट्रंप के पद से बाहर रहने के दौरान मोदी के समर्थन ने इस भरोसे को और मज़बूत किया।
ट्रेड डील में देरी का मुख्य कारण क्या है?
राजदूत गोर ने देरी का कारण कानूनी और तकनीकी भाषा से जुड़ी प्रक्रियाओं को बताया, न कि मूल शर्तों पर असहमति को। उन्होंने कहा कि समझौते के कुछ हिस्सों को पुनर्व्यवस्थित और परिष्कृत किया जा रहा है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष और भारत-अमेरिका ट्रेड डील में क्या संबंध है?
राजदूत गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने को 'बेहद जरूरी' मानते हैं और इस पर पहले दिन से प्रतिबद्ध हैं। यह संघर्ष भारत की ऊर्जा नीति और संभावित टैरिफ प्रस्ताव के ज़रिए ट्रेड डील की पृष्ठभूमि को प्रभावित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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