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भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक, वैश्विक उत्पादन में 8% हिस्सेदारी: मत्स्य मंत्रालय

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भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक, वैश्विक उत्पादन में 8% हिस्सेदारी: मत्स्य मंत्रालय

सारांश

भारत वैश्विक मत्स्य उत्पादन में दूसरे पायदान पर पहुँच गया है — 8% हिस्सेदारी, 3 करोड़ आजीविकाएँ और 2015 से अब तक ₹39,272 करोड़ का संचयी निवेश। ब्लू इकोनॉमी को नई गति देने की सरकारी कोशिश अब युवाओं और डिजिटल तकनीक पर दाँव लगा रही है।

मुख्य बातें

भारत वैश्विक मत्स्य उत्पादन में दूसरे स्थान पर है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 8% है।
जलीय कृषि उत्पादन में भी भारत विश्व में दूसरे स्थान पर; झींगा उत्पादन और निर्यात में अग्रणी देशों में शामिल।
यह क्षेत्र देश के करीब 3 करोड़ मछुआरों और मत्स्य किसानों की आजीविका से जुड़ा है।
2015 से अब तक मत्स्य क्षेत्र में ₹39,272 करोड़ का संचयी निवेश किया गया है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8 फरवरी 2024 को PM-MKSSY को मंजूरी दी; ₹6,000 करोड़ का प्रावधान, 2023-24 से 2026-27 तक लागू।
स्वतंत्रता दिवस के बाद PM-MKSSY लाभार्थियों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित।

भारत आज वैश्विक मत्स्य उत्पादन में दूसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत है। मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को यह जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, भारत जलीय कृषि उत्पादन में भी विश्व में दूसरे स्थान पर है और झींगा उत्पादन तथा निर्यात में अग्रणी देशों में अपनी जगह बना चुका है।

मत्स्य क्षेत्र की आर्थिक भूमिका

यह क्षेत्र देश के लगभग 3 करोड़ मछुआरों और मत्स्य किसानों की आजीविका का प्रमुख आधार है। मत्स्य मूल्य शृंखला के विभिन्न चरणों — प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन और विपणन — में भी बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत ग्रामीण रोजगार सृजन और निर्यात विविधीकरण दोनों मोर्चों पर दबाव में है।

₹39,272 करोड़ का संचयी निवेश

सरकार के अनुसार, वर्ष 2015 से अब तक मत्स्य क्षेत्र के सतत विकास और आधुनिकीकरण के लिए कुल ₹39,272 करोड़ का संचयी निवेश किया जा चुका है। यह निवेश चार प्रमुख माध्यमों से हुआ है — ब्लू रिवोल्यूशन योजना, फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और इसकी उप-योजना प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY)

PM-MKSSY: ₹6,000 करोड़ की उप-योजना

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8 फरवरी 2024 को PM-MKSSY को मंजूरी दी थी। यह PMMSY के अंतर्गत एक केंद्रीय क्षेत्र की उप-योजना है, जिसे वित्त वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक चार वर्षों के लिए लागू किया जा रहा है। इसके लिए ₹6,000 करोड़ का अनुमानित प्रावधान किया गया है और यह देश के सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में क्रियान्वित हो रही है। गौरतलब है कि इस योजना का उद्देश्य वित्तीय और तकनीकी हस्तक्षेपों के जरिये मत्स्य क्षेत्र की संरचनात्मक कमजोरियों को दूर करना और दीर्घकालिक संस्थागत सुधारों को प्रोत्साहित करना है।

युवाओं और तकनीक की भूमिका

मंत्रालय ने रेखांकित किया कि मत्स्य क्षेत्र का भविष्य युवाओं, मछुआरों और मछली किसानों की सक्रिय भागीदारी पर टिका है। यह वर्ग अब आधुनिक जलीय कृषि तकनीकों, डिजिटल ट्रेसबिलिटी, कोल्ड-चेन प्रबंधन, वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग और निर्यात गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरकार का मानना है कि उद्यमशील किसानों की बढ़ती भागीदारी भारत की ब्लू इकोनॉमी को नई गति देगी।

स्वतंत्रता दिवस के बाद विशेष संवाद

स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद मत्स्य पालन विभाग ने PM-MKSSY के लाभार्थियों और उनके जीवनसाथियों के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र में उनके योगदान को सम्मानित करना और सरकारी योजनाओं के प्रभाव को प्रदर्शित करना था। आने वाले वर्षों में मत्स्य निर्यात और घरेलू खपत दोनों में वृद्धि के लिए इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सरकार की नजर बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ₹39,272 करोड़ के निवेश का लाभ उन 3 करोड़ मछुआरों तक कितना पहुँचा जो अभी भी मौसमी आय, कर्ज और जलवायु जोखिम से जूझ रहे हैं। PM-MKSSY जैसी योजनाएँ संरचनात्मक सुधार का वादा करती हैं, पर डिजिटल ट्रेसबिलिटी और कोल्ड-चेन जैसे आधुनिक उपकरण तब तक प्रभावी नहीं होंगे जब तक छोटे मछुआरों की उन तक पहुँच सुनिश्चित नहीं होती। वैश्विक रैंकिंग में उछाल और जमीनी हकीकत के बीच की यह खाई ही नीति की असली परीक्षा है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत वैश्विक मत्स्य उत्पादन में किस स्थान पर है?
भारत वैश्विक मत्स्य उत्पादन में दूसरे स्थान पर है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत है। जलीय कृषि उत्पादन में भी भारत विश्व में दूसरे पायदान पर है।
प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) क्या है?
PM-MKSSY, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत एक केंद्रीय उप-योजना है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8 फरवरी 2024 को मंजूरी दी थी। इसके लिए ₹6,000 करोड़ का प्रावधान है और यह वित्त वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है।
मत्स्य क्षेत्र में 2015 से कितना निवेश हुआ है?
सरकार के अनुसार, 2015 से अब तक मत्स्य क्षेत्र में ₹39,272 करोड़ का संचयी निवेश हो चुका है। यह निवेश ब्लू रिवोल्यूशन योजना, FIDF, PMMSY और PM-MKSSY के माध्यम से किया गया है।
भारत का मत्स्य क्षेत्र कितने लोगों को रोजगार देता है?
मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अनुसार, यह क्षेत्र देश में लगभग 3 करोड़ मछुआरों और मत्स्य किसानों की आजीविका से सीधे जुड़ा है। मत्स्य मूल्य शृंखला के विभिन्न चरणों में भी बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं।
भारत की ब्लू इकोनॉमी को आगे बढ़ाने की सरकार की क्या योजना है?
सरकार का मानना है कि युवाओं और उद्यमशील किसानों की भागीदारी, आधुनिक जलीय कृषि तकनीक, डिजिटल ट्रेसबिलिटी, कोल्ड-चेन प्रबंधन और निर्यात प्रोत्साहन से ब्लू इकोनॉमी को नई गति मिलेगी। PM-MKSSY इसी दिशा में एक प्रमुख नीतिगत हस्तक्षेप है।
राष्ट्र प्रेस
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