इंफोसिस Q1 नेट प्रॉफिट 8.6% घटकर ₹7,775 करोड़; आशीष कुमार डैश बने नए CEO
सारांश
मुख्य बातें
इंफोसिस लिमिटेड ने 23 जुलाई 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी किए, जिसमें कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा तिमाही आधार पर 8.6 प्रतिशत घटकर ₹7,775 करोड़ रह गया। इसके साथ ही कंपनी ने एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन का ऐलान करते हुए आशीष कुमार डैश को सीईओ डिजिग्नेट नियुक्त किया।
तिमाही वित्तीय प्रदर्शन
जनवरी-मार्च तिमाही में इंफोसिस का शुद्ध मुनाफा ₹8,509 करोड़ था, जो अप्रैल-जून तिमाही में घटकर ₹7,775 करोड़ हो गया — तिमाही आधार पर 8.6 प्रतिशत की गिरावट। हालांकि, सालाना आधार पर तस्वीर अलग है: पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के ₹6,921 करोड़ के मुकाबले इस बार मुनाफे में 12.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू अप्रैल-जून तिमाही में बढ़कर ₹48,211 करोड़ हो गया, जो एक साल पहले की ₹42,279 करोड़ की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है। तिमाही आधार पर भी रेवेन्यू में 3.9 प्रतिशत की वृद्धि रही — जनवरी-मार्च में यह ₹46,402 करोड़ था।
खर्च में भी उछाल
कंपनी का कुल परिचालन व्यय इस तिमाही में बढ़कर ₹38,157 करोड़ हो गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह ₹33,581 करोड़ था। खर्च में यह उछाल मुनाफे पर दबाव का प्रमुख कारण माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आईटी क्षेत्र मांग में उतार-चढ़ाव और मैक्रोइकोनॉमिक अनिश्चितताओं से जूझ रहा है।
बड़ा नेतृत्व परिवर्तन
नतीजों के साथ-साथ इंफोसिस ने एक ऐतिहासिक नेतृत्व बदलाव की घोषणा की। कंपनी के चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने बताया कि बोर्ड ने आशीष कुमार डैश को सीईओ डिजिग्नेट नियुक्त किया है। नीलेकणी ने कहा कि आशीष कंपनी के भीतर से उभरे ऐसे नेता हैं, 'जो कंपनी के मूल्यों और ग्राहकों के भरोसे को कायम रखते हुए बड़े बदलावों का नेतृत्व करने में सक्षम हैं।'
नीलेकणी ने निवर्तमान मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ सलिल पारेख के 9 वर्षों के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कंपनी की बाज़ार स्थिति मजबूत की, क्षमताओं का विस्तार किया, शेयरधारकों के लिए उल्लेखनीय मूल्य सृजित किया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित रणनीति की मजबूत नींव रखी।
सलिल पारेख का विदाई संदेश
सलिल पारेख ने कहा कि इंफोसिस का नेतृत्व करना उनके लिए 'सम्मान की बात' रही। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में कंपनी का वार्षिक रेवेन्यू 10 अरब डॉलर से बढ़कर 20 अरब डॉलर से अधिक हो गया। गौरतलब है कि इंफोसिस ने इस दौरान डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में अग्रणी भूमिका निभाई और एआई ट्रांसफॉर्मेशन के लिए एक अलग रणनीति भी तैयार की।
शेयर बाज़ार पर असर
नतीजे बाज़ार बंद होने के बाद जारी किए गए। उससे पहले नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर इंफोसिस का शेयर 0.08 प्रतिशत यानी ₹0.80 की मामूली गिरावट के साथ ₹1,052.90 पर बंद हुआ। आने वाले सत्रों में निवेशकों की नज़र नए CEO की रणनीतिक प्राथमिकताओं और कंपनी के वार्षिक मार्गदर्शन पर रहेगी।