बॉन्ड यील्ड 2002 के बाद सर्वोच्च स्तर पर, जेफरीज के क्रिस वुड ने एआई निवेश चक्र पर जताई चिंता
सारांश
मुख्य बातें
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के ग्लोबल इक्विटी रणनीतिकार क्रिस वुड ने अपने साप्ताहिक न्यूजलेटर 'ग्रीड एंड फियर' में कहा है कि अमेरिकी शेयर बाजार बढ़ती बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद अब तक टिका हुआ है — लेकिन अब इक्विटी बाजारों पर दबाव बढ़ने के संकेत साफ हैं। उनके अनुसार इस स्थिरता के पीछे मजबूत कॉरपोरेट आय और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े निवेश उछाल की बड़ी भूमिका रही है।
बॉन्ड यील्ड 2002 के बाद सर्वोच्च स्तर पर
10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 5.34 प्रतिशत और 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.69 प्रतिशत तक पहुँच गई है — जो वर्ष 2002 के बाद का उच्चतम स्तर है। वुड का कहना है कि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में यह हालिया उछाल शेयर बाजारों के लिए एक निर्णायक जोखिम बिंदु बनता जा रहा है। जब बॉन्ड पर रिटर्न इतने ऊँचे स्तरों पर हो, तो फिक्स्ड इनकम एसेट्स निवेशकों को इक्विटी की तुलना में अधिक आकर्षक लगने लगते हैं, जिससे शेयर बाजारों में पूँजी प्रवाह कमजोर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि जी7 देशों के सरकारी बॉन्ड बाजार भी वुड के अनुसार संरचनात्मक मंदी के दौर में हैं। लगातार ऊँची बनी हुई बॉन्ड यील्ड वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों को और कड़ा कर सकती है, जिसका असर विकसित और उभरते — दोनों बाजारों पर पड़ेगा।
भारतीय बाजारों पर असर
वुड ने स्पष्ट किया कि वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का प्रभाव भारतीय शेयर बाजारों पर भी दिख रहा है। भारतीय शेयर बाजार लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ, और अमेरिकी यील्ड में तेजी निवेशकों की सतर्कता का एक प्रमुख कारण रही। यह ऐसे समय में आया है जब घरेलू स्तर पर भी कॉरपोरेट आय के मोर्चे पर मिश्रित संकेत मिल रहे हैं।
एआई निवेश चक्र: ताकत और अनिश्चितता
वुड के विश्लेषण के अनुसार अमेरिकी बाजारों की मजबूती के पीछे एक बड़ा कारण प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया जा रहा विशाल पूंजीगत व्यय है। इससे तकनीकी कंपनियों की आय और मुनाफे को मजबूत आधार मिला है। ऐतिहासिक रूप से अमेरिकी बाजारों में मिड-टर्म चुनावों से पहले कमजोरी और बाद में रिकवरी का चक्र देखा जाता रहा है, लेकिन वुड का कहना है कि इस बार कॉरपोरेट आय की बेहतर-से-अपेक्षित स्थिति ने उस पैटर्न को स्पष्ट रूप से उभरने नहीं दिया।
हालाँकि, अब निवेशकों के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि एआई निवेश चक्र कितने समय तक जारी रहेगा। वुड के अनुसार बाजार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कंपनियाँ एआई परियोजनाओं पर किए जा रहे विशाल निवेश से पर्याप्त रिटर्न हासिल कर पाएंगी या नहीं।
विशेषज्ञ की चेतावनी
वुड ने चेताया कि यदि एआई परियोजनाओं से अपेक्षित लाभ नहीं मिला, तो मौजूदा निवेश चक्र की गति धीमी पड़ सकती है। इसका सीधा असर तकनीकी कंपनियों की कमाई पर और परोक्ष रूप से वैश्विक शेयर बाजारों के वैल्यूएशन पर पड़ने की आशंका है। यह वैश्विक निवेशकों के लिए एक ऐसे दोहरे जोखिम की तस्वीर है — एक तरफ चढ़ती बॉन्ड यील्ड का दबाव, दूसरी तरफ एआई रिटर्न को लेकर बढ़ती अनिश्चितता।
आने वाले हफ्तों में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड की दिशा और बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के तिमाही नतीजे यह तय करेंगे कि बाजारों का यह संतुलन टिक पाएगा या नहीं।