12 जुलाई 2026
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क्या देश के आर्थिक विकास में केंद्र और आरबीआई दो महत्वपूर्ण इंजन हैं?

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क्या देश के आर्थिक विकास में केंद्र और आरबीआई दो महत्वपूर्ण इंजन हैं?

सारांश

आर्थिक विश्लेषकों ने बताया है कि आरबीआई और केंद्र सरकार के सामूहिक प्रयासों से पब्लिक सेक्टर बैंकों के एनपीए में कमी आई है। इस लेख में जानें कि कैसे ये दोनों संस्थाएं मिलकर देश की आर्थिक स्थिति को सुधारने में लगी हैं।

मुख्य बातें

आरबीआई और केंद्र सरकार का सहयोग महत्वपूर्ण है।
एनपीए में कमी एक बड़ी उपलब्धि है।
आईबीसी ने कंपनियों के पुनरुद्धार में मदद की है।
बैंकिंग प्रणाली में सुधार हो रहा है।
लोन देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है।

नई दिल्ली, 23 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। अर्थशास्त्रियों ने बुधवार को बताया कि पब्लिक सेक्टर बैंक के ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) में कमी आरबीआई और केंद्र के संयुक्त प्रयास का परिणाम है।

अर्थशास्त्री पंकज जायसवाल ने न्यूज एजेंसी राष्ट्र प्रेस से कहा, "एनपीए में सुधार आरबीआई और केंद्र दोनों के प्रयासों से संभव हुआ है। केंद्रीय बैंक और केंद्र सरकार ने एक-दूसरे के पूरक के रूप में कार्य किया है। दोनों ने मिलकर एक ही दिशा में काम किया।"

उन्होंने आगे बताया कि वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के अनुसार, एनपीए में गिरावट आई है और यह 2025 तक 2.58 प्रतिशत पर आ जाएगा। यह केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

जायसवाल ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) पर चर्चा करते हुए कहा, "10 साल पहले एनपीए अत्यधिक था। उद्योग क्षेत्र में कई खाते तनाव में थे, जिसे एनडीए सरकार ने समाप्त किया। सरकार ने आईबीसी पेश कर कंपनियों की सहायता के लिए रिसॉल्यूशन योजनाएं बनाई।"

उन्होंने कहा कि आईबीसी ने फुल डिफॉल्टर्स और प्रमोटरों को प्रबंधन से बाहर करने का कार्य किया। एनपीए को नियंत्रित करने के लिए सरकार की दृष्टिकोण विशेष रूप से केंद्रित रही, और पारदर्शिता के साथ कार्य किया गया।

आरबीआई के बारे में उन्होंने कहा, "आरबीआई ने एसेट क्वालिटी रिव्यू पेश किया, जिसने लोन के एनपीए की ओर बढ़ने को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।"

पब्लिक सेक्टर बैंक में सुधार पर जायसवाल ने कहा, "एनडीए के शासन में पब्लिक सेक्टर बैंक को प्राइवेट बैंक के तर्ज पर तैयार किया जा रहा है। बैंक के फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार हो रहा है और बिजनेस मॉड्यूल में भी बदलाव लाया जा रहा है।"

उन्होंने बताया कि अब लोन देने से पहले व्यक्ति की क्षमता और क्रेडिट हिस्ट्री की समीक्षा की जाती है, जिससे लोन देने और मॉनिटर करने की प्रक्रिया में सुधार हुआ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईबीसी का क्या महत्व है?
आईबीसी का उद्देश्य दिवालिया कंपनियों के लिए एक तंत्र प्रदान करना है, जिससे उनका पुनरुद्धार किया जा सके।
आरबीआई की भूमिका क्या है?
आरबीआई का कार्य वित्तीय स्थिरता बनाए रखना और बैंकों की एसेट क्वालिटी की निगरानी करना है।
केंद्र सरकार ने एनपीए को कम करने के लिए क्या कदम उठाए?
केंद्र सरकार ने रिसॉल्यूशन योजनाएं और आईबीसी जैसे सुधार पेश किए हैं।
क्या एनपीए में और कमी आएगी?
विश्लेषकों के अनुसार, अगर ये प्रयास जारी रहे, तो एनपीए में और कमी आ सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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