16 सितंबर 2026
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लैम रिसर्च का भारत में ₹10,000 करोड़ का निवेश, बेंगलुरु में पहली सिलिकॉन कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी

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लैम रिसर्च का भारत में ₹10,000 करोड़ का निवेश, बेंगलुरु में पहली सिलिकॉन कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी

सारांश

अमेरिकी दिग्गज लैम रिसर्च का ₹10,000 करोड़ का दांव बताता है कि भारत अब सेमीकंडक्टर असेंबली से आगे बढ़कर कोर मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की राह पर है। AI-युग की बढ़ती चिप माँग और IISc जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी इसे महज़ एक निवेश घोषणा से कहीं बड़ा बनाती है।

मुख्य बातें

लैम रिसर्च कॉरपोरेशन ने 16 सितंबर 2026 को भारत में ₹10,000 करोड़ के निवेश की घोषणा की।
भारत में कंपनी की पहली सिलिकॉन कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित होगी, जो सिलिकॉन इनगट उत्पादन और प्रोसेसिंग को कवर करेगी।
इंडिया सेंटर ऑफ इंजीनियरिंग के जरिए R&D क्षमताओं का भी विस्तार किया जाएगा।
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के साथ साझेदारी के तहत 60,000 छात्रों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य।
यह घोषणा सेमीकॉन इंडिया 2026 से पूर्व आई है और लैम रिसर्च की 25 वर्षों से अधिक की भारतीय उपस्थिति के अगले चरण को दर्शाती है।
निवेश से भारतीय सप्लायर्स के साथ नई साझेदारियाँ और एडवांस्ड इंजीनियरिंग में रोज़गार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

अमेरिकी सेमीकंडक्टर उपकरण निर्माता लैम रिसर्च कॉरपोरेशन ने 16 सितंबर 2026 को घोषणा की कि वह आने वाले कई वर्षों में भारत में लगभग ₹10,000 करोड़ का निवेश करेगी। इसके तहत देश में कंपनी की पहली सिलिकॉन कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित की जाएगी और एडवांस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा। यह घोषणा सेमीकॉन इंडिया 2026 से ठीक पहले आई है, जो भारत के बढ़ते सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं को वैश्विक उद्योग की मान्यता का संकेत देती है।

निवेश में क्या शामिल है

प्रस्तावित सिलिकॉन कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी एक वर्टिकली इंटीग्रेटेड प्रक्रिया पर आधारित होगी, जिसमें उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीकों और अत्याधुनिक नोड्स के लिए सिलिकॉन इनगट का उत्पादन और प्रोसेसिंग शामिल होगी। मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ लैम रिसर्च अपने 'इंडिया सेंटर ऑफ इंजीनियरिंग' के माध्यम से R&D क्षमताओं को भी विस्तार देगी। यह केंद्र वर्तमान में डिज़ाइन, टेस्टिंग, वैलिडेशन और अगली पीढ़ी की तकनीक विकास सहित कई क्षेत्रों में वैश्विक ग्राहकों के कार्यक्रमों को समर्थन देता है।

भारत में 25 वर्षों की उपस्थिति के बाद अगला चरण

गौरतलब है कि लैम रिसर्च पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से भारत में कार्यरत है। यह निवेश उस दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के अगले चरण को दर्शाता है। लैम रिसर्च इंडिया के कॉरपोरेट वाइस प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर रंगेश राघवन ने कहा, 'भारत लैम की वैश्विक इनोवेशन और ग्रोथ स्ट्रैटेजी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।' उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी का निरंतर विस्तार भारत की प्रतिभा, तेज़ी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और सहयोगी नीतिगत माहौल में उसके विश्वास को दर्शाता है।

भारतीय सप्लायर्स और स्थानीय इकोसिस्टम पर असर

इस निवेश से भारतीय सप्लायर्स के साथ साझेदारी के नए अवसर खुलने की उम्मीद है। लैम रिसर्च वर्तमान में स्थानीय कंपनियों के साथ काम करती है, जो सेमीकंडक्टर उत्पादन के लिए विशेष सामग्री, सटीक कंपोनेंट्स, गैस, केमिकल्स, मेट्रोलॉजी सॉल्यूशंस और मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज की आपूर्ति करती हैं। राघवन ने बताया कि कंपनी सरकार, शिक्षा जगत, सप्लायर्स, स्टार्टअप्स और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

कौशल विकास और शैक्षणिक साझेदारी

लैम रिसर्च ने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के साथ साझेदारी की है ताकि सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग शिक्षा को अधिक सुलभ बनाया जा सके। कंपनी के सेमीवर्स सॉल्यूशंस वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अगले कई वर्षों में 60,000 तक छात्रों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह ऐसे समय में आया है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विस्तार के साथ वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर कुशल जनशक्ति की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।

क्या होगा आगे

यह निवेश भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में और मज़बूती से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। एडवांस्ड इंजीनियरिंग और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में नए रोज़गार अवसर पैदा होने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर वर्कफोर्स के निर्माण में योगदान मिलने की उम्मीद जताई गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ का निवेश सिर्फ एक कंपनी का फैसला नहीं — यह इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला भारत को अब असेंबली हब से आगे, कोर मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में देख रही है। हालाँकि असली सवाल यह है कि क्या भारत का इन्फ्रास्ट्रक्चर, रेगुलेटरी तेज़ी और स्थानीय सप्लाई चेन इस महत्वाकांक्षा के साथ कदमताल कर सकते हैं — क्योंकि पिछले कई 'मेगा इन्वेस्टमेंट' ऐलान ज़मीनी अमल में धीमे साबित हुए हैं। 60,000 छात्रों का प्रशिक्षण लक्ष्य उत्साहजनक है, लेकिन सेमीकंडक्टर-ग्रेड कुशल जनशक्ति की कमी एक संरचनात्मक चुनौती बनी हुई है जिसे कोई एक प्लेटफॉर्म अकेले नहीं सुलझा सकता।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लैम रिसर्च भारत में क्या निवेश करने जा रही है?
लैम रिसर्च कॉरपोरेशन भारत में लगभग ₹10,000 करोड़ का निवेश करेगी, जिसके तहत देश की पहली सिलिकॉन कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित की जाएगी और एडवांस R&D गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा। यह निवेश अगले कई वर्षों में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
लैम रिसर्च की सिलिकॉन कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में क्या होगा?
यह फैसिलिटी एक वर्टिकली इंटीग्रेटेड प्रक्रिया पर आधारित होगी, जिसमें उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीकों और अत्याधुनिक नोड्स के लिए सिलिकॉन इनगट का उत्पादन और प्रोसेसिंग शामिल है। यह कंपनी की भारत में पहली ऐसी सुविधा होगी।
लैम रिसर्च भारत में छात्रों के लिए क्या कर रही है?
लैम रिसर्च ने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के साथ साझेदारी की है। कंपनी अपने सेमीवर्स सॉल्यूशंस वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अगले कई वर्षों में 60,000 तक छात्रों को सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग शिक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखती है।
यह घोषणा सेमीकॉन इंडिया 2026 से पहले क्यों महत्वपूर्ण है?
सेमीकॉन इंडिया 2026 से ठीक पहले की गई यह घोषणा भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में वैश्विक निवेशकों के बढ़ते भरोसे को रेखांकित करती है। लैम रिसर्च की 25 वर्षों से अधिक की भारत में उपस्थिति के बाद यह कदम देश को वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण भूमिका दिलाने की दिशा में बड़ा माना जा रहा है।
इस निवेश से भारतीय सप्लायर्स को क्या फायदा होगा?
लैम रिसर्च वर्तमान में भारतीय स्थानीय कंपनियों के साथ काम करती है जो विशेष सामग्री, सटीक कंपोनेंट्स, गैस, केमिकल्स, मेट्रोलॉजी सॉल्यूशंस और मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज की आपूर्ति करती हैं। इस विस्तार से इन साझेदारियों के और गहरे होने और नए सप्लायर्स के लिए अवसर खुलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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