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महाराष्ट्र बना देश का शीर्ष इनोवेशन हब: 1.5 लाख+ DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप, GDP में 14% हिस्सेदारी

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महाराष्ट्र बना देश का शीर्ष इनोवेशन हब: 1.5 लाख+ DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप, GDP में 14% हिस्सेदारी

सारांश

महाराष्ट्र के उद्योग विभाग के प्रधान सचिव डॉ. पी. अनबलगन ने CII-HBNI समिट में बताया कि राज्य में 1.5 लाख से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं और यह GDP में 14% योगदान के साथ देश का शीर्ष इनोवेशन हब बन चुका है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र में 1.5 लाख से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप — देश में सर्वाधिक।
राज्य भारत की GDP में 14% और औद्योगिक उत्पादन में 25% का योगदान करता है।
मुंबई, पुणे और नागपुर फिनटेक, डीप-टेक, मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप इनक्यूबेशन में अग्रणी।
CII-HBNI रिसर्च स्कॉलर समिट में अकादमिक-उद्योग सहयोग, रिसर्च व्यावसायीकरण और कौशल सृजन पर विमर्श।
समिट में HBNI, BARC, CII महाराष्ट्र और विश्वकर्मा विश्वविद्यालय के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल हुए।

महाराष्ट्र अब देश के सबसे मजबूत इनोवेशन और एंटरप्राइज हब के रूप में स्थापित हो रहा है। राज्य में 1.5 लाख से अधिक उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं, जो इसे स्टार्टअप पंजीकरण के मामले में देश में अग्रणी बनाते हैं। यह बात महाराष्ट्र सरकार के उद्योग विभाग के प्रधान सचिव डॉ. पी. अनबलगन (IAS) ने CII-HBNI रिसर्च स्कॉलर समिट में कही।

महाराष्ट्र की आर्थिक ताकत

डॉ. अनबलगन ने समिट में रेखांकित किया कि महाराष्ट्र भारत की GDP में 14 प्रतिशत और देश के औद्योगिक उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत का योगदान करता है। उन्होंने कहा कि मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहर फिनटेक, डीप-टेक, मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग रिसर्च और स्टार्टअप इनक्यूबेशन के क्षेत्र में विकास की रफ्तार को और तेज़ कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में स्टार्टअप फंडिंग में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, फिर भी महाराष्ट्र का इकोसिस्टम स्थिर बना हुआ है।

इनोवेशन इकोसिस्टम की भूमिका

डॉ. अनबलगन ने आगे कहा कि राज्य का इनोवेशन इकोसिस्टम रिसर्च-आधारित उद्यमिता, रोजगार सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत आधार दे रहा है। समिट के विभिन्न सत्रों में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि शोधार्थियों को मार्गदर्शन, इनक्यूबेशन सहायता, वित्तपोषण तक पहुँच और उद्योग से सीधा जुड़ाव मिले — ये चार स्तंभ तकनीक-आधारित आर्थिक विकास की नींव हैं।

CII-HBNI समिट में मुख्य विमर्श

इस शिखर सम्मेलन में उद्योग, सरकार, शिक्षा जगत, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधियों ने अकादमिक-उद्योग सहयोग को गहरा करने पर विचार-विमर्श किया। चर्चाओं में रिसर्च के व्यावसायीकरण, स्टार्टअप विकास, कौशल निर्माण और उद्यम विकास में इनोवेशन इकोसिस्टम की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया गया। गौरतलब है कि शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग के बीच की खाई को पाटना भारत की स्टार्टअप नीति की दीर्घकालिक चुनौती रही है।

समिट में प्रमुख भागीदार

उद्घाटन सत्र में होमी भाभा नेशनल इंस्टीट्यूट (HBNI) के कुलपति प्रोफेसर यू. कामाची मुदाली, CII महाराष्ट्र की उपाध्यक्ष आरती कुचिभटला, CII WR एजुकेशन टास्कफोर्स के अध्यक्ष एवं विश्वकर्मा विश्वविद्यालय के अध्यक्ष भरत अग्रवाल, CII के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अल्पा अंतानी और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के बीम प्रौद्योगिकी विकास समूह के निदेशक एवं अटल इनक्यूबेशन सेंटर के अध्यक्ष मार्टिन मैस्करेनहास उपस्थित रहे।

आगे की राह

समिट ने उद्योग जगत के नेताओं को उभरती अनुसंधान प्रतिभाओं से जोड़ने, विस्तार योग्य प्रौद्योगिकियों की पहचान करने और व्यावसायिक क्षमता वाले इनोवेशन-आधारित सहयोगों की संभावनाएँ तलाशने का एक सक्रिय मंच प्रदान किया। भविष्य के लिए तैयार प्रतिभाओं और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्यमों के निर्माण के लिए शैक्षणिक संस्थानों, स्टार्टअप और उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि समिट में हुए विमर्श ठोस नीतिगत कदमों में कितनी जल्दी तब्दील होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन DPIIT पंजीकरण और वास्तविक रूप से सक्रिय, राजस्व-अर्जित करने वाले स्टार्टअप के बीच का अंतर अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है। GDP में 14% हिस्सेदारी दशकों पुरानी औद्योगिक बढ़त को दर्शाती है, न कि केवल इनोवेशन इकोसिस्टम की नई उपलब्धि को। असली सवाल यह है कि इन स्टार्टअप्स में से कितने गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा कर रहे हैं और कितने महज़ कागज़ी इकाइयाँ हैं — यह डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। CII-HBNI जैसे मंच सही दिशा में हैं, पर अकादमिक-उद्योग सहयोग की बात वर्षों से होती रही है; अब ज़रूरत ठोस मापदंडों और जवाबदेही की है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र को देश का शीर्ष इनोवेशन हब क्यों कहा जा रहा है?
महाराष्ट्र में 1.5 लाख से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं और यह भारत की GDP में 14% तथा औद्योगिक उत्पादन में 25% का योगदान देता है। मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहर फिनटेक, डीप-टेक और मैन्युफैक्चरिंग में नवाचार की अगुवाई कर रहे हैं।
CII-HBNI रिसर्च स्कॉलर समिट में क्या चर्चा हुई?
समिट में अकादमिक-उद्योग सहयोग को गहरा करने, रिसर्च के व्यावसायीकरण, स्टार्टअप विकास, कौशल सृजन और तकनीक-आधारित रोजगार पर केंद्रित विमर्श हुआ। शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शन, इनक्यूबेशन और वित्तपोषण तक पहुँच को उद्यम निर्माण का मूल आधार बताया गया।
महाराष्ट्र के स्टार्टअप इकोसिस्टम से किसे फायदा होगा?
इस इकोसिस्टम से युवा उद्यमियों, शोधार्थियों, तकनीकी पेशेवरों और उन उद्योगों को लाभ होगा जो नवाचार-आधारित सहयोग की तलाश में हैं। विशेष रूप से फिनटेक, EV, सेमीकंडक्टर और डीप-टेक क्षेत्रों में नए अवसर बनने की संभावना है।
DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप क्या होते हैं?
DPIIT यानी उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप वे उद्यम हैं जो सरकार की स्टार्टअप इंडिया नीति के तहत पंजीकृत हैं और कर छूट, फंडिंग सुविधा व सरकारी योजनाओं के लाभ के पात्र होते हैं। यह मान्यता किसी स्टार्टअप की आधिकारिक स्वीकृति का प्रमाण मानी जाती है।
महाराष्ट्र के इनोवेशन इकोसिस्टम में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?
CII-HBNI समिट में शैक्षणिक संस्थानों, स्टार्टअप और उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी बनाने पर सहमति जताई गई। उद्योग जगत के नेताओं को उभरती अनुसंधान प्रतिभाओं से जोड़ने और विस्तार योग्य प्रौद्योगिकियों की पहचान करने की दिशा में ठोस सहयोग की संभावनाएँ तलाशी जाएंगी।
राष्ट्र प्रेस
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