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ऑयल इंडिया को अंडमान अपतटीय ब्लॉक में प्राकृतिक गैस की नई खोज, तीसरे कुएं में हाइड्रोकार्बन की पुष्टि

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ऑयल इंडिया को अंडमान अपतटीय ब्लॉक में प्राकृतिक गैस की नई खोज, तीसरे कुएं में हाइड्रोकार्बन की पुष्टि

सारांश

ऑयल इंडिया को अंडमान के अपतटीय ब्लॉक में एक और सफलता मिली है — तीसरे खोजी कुएं विजयपुरम-3 में प्राकृतिक गैस की पुष्टि हुई है। सितंबर 2025 के बाद यह इस ब्लॉक में हाइड्रोकार्बन की दूसरी खोज है, जो इस क्षेत्र में एक सक्रिय गैस तंत्र की संभावना को बल देती है।

मुख्य बातें

ऑयल इंडिया लिमिटेड ने अंडमान अपतटीय ब्लॉक एएन-ओएसएचपी-2018/1 के तीसरे खोजी कुएं विजयपुरम-3 में प्राकृतिक गैस की पुष्टि की।
कुआं अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से 15 किलोमीटर दूर, 355 मीटर जल गहराई पर स्थित है।
ड्रिलिंग इयोसीन भू-स्तर में 1,900 मीटर से अधिक गहराई तक की गई; परफोरेशन के बाद लगातार गैस प्रवाह दर्ज।
यह इस ब्लॉक में हाइड्रोकार्बन की दूसरी पुष्टि है; इससे पहले सितंबर 2025 में विजयपुरम-2 में भी गैस मिली थी।
गैस की संरचना, कैलोरिफिक वैल्यू और आइसोटोप परीक्षण जारी; व्यावसायिक व्यवहार्यता का आकलन बाकी।

ऑयल इंडिया लिमिटेड ने 6 जून 2025 को घोषणा की कि अंडमान अपतटीय ब्लॉक एएन-ओएसएचपी-2018/1 में ड्रिल किए गए तीसरे खोजी कुएं विजयपुरम-3 में प्राकृतिक गैस की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। यह कुआं अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से 15 किलोमीटर दूर 355 मीटर जल गहराई पर स्थित है। यह इस ब्लॉक में हाइड्रोकार्बन की दूसरी आधिकारिक पुष्टि है।

खोज का विवरण और तकनीकी पहलू

कंपनी की नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, विजयपुरम-3 कुएं को ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (ओएएलपी) के तहत ड्रिल किया गया है। ड्रिलिंग कार्य इयोसीन भू-स्तर में 1,900 मीटर से अधिक गहराई तक किया गया। प्रारंभिक उत्पादन परीक्षण में छिद्रण (परफोरेशन) के बाद लगातार गैस जलती हुई दिखाई दी, और कुएं में दबाव तेजी से बढ़ने के साथ गैस का प्रवाह शुरू हुआ।

नमूना परीक्षण और आगे की जाँच

ऑयल इंडिया ने बताया कि फिलहाल गैस के नमूनों का परीक्षण किया जा रहा है, जिससे उसकी संरचना और ऊष्मीय क्षमता (कैलोरिफिक वैल्यू) का पता लगाया जा सके। इसके साथ ही समस्थानिक (आइसोटोप) अध्ययन भी जारी है, जो हाइड्रोकार्बन के स्रोत और उत्पत्ति को समझने में सहायक होगा। ये परीक्षण भविष्य में उत्पादन की व्यावसायिक व्यवहार्यता तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

पिछली खोज से संदर्भ

गौरतलब है कि इससे पहले सितंबर 2025 में इसी ब्लॉक के दूसरे खोजी कुएं विजयपुरम-2 (स्थान ओएईए) में भी प्राकृतिक गैस की खोज हुई थी। अब तक इस ब्लॉक में तीन खोजी कुएं ड्रिल किए जा चुके हैं, जिनमें से दो में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी के ठोस संकेत मिले हैं। यह क्रमिक सफलता इस क्षेत्र में एक सक्रिय हाइड्रोकार्बन तंत्र की ओर संकेत करती है।

रणनीतिक महत्व

ऑयल इंडिया ने इस खोज को इस क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन के स्रोत, प्रवाह मार्ग और संभावित भंडार की मौजूदगी का महत्वपूर्ण संकेतक बताया है। कंपनी का मानना है कि यह खोज भविष्य में क्षेत्र में अन्वेषण और उत्पादन गतिविधियों की रणनीति तैयार करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। यह ऐसे समय में आई है जब भारत अपनी ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधनों के दोहन पर ज़ोर दे रहा है।

क्या होगा आगे

नमूना परीक्षण और आइसोटोप विश्लेषण के नतीजे आने के बाद कंपनी इस ब्लॉक में आगे की खोज और संभावित उत्पादन योजना पर निर्णय लेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गैस की व्यावसायिक मात्रा की पुष्टि होती है, तो यह भारत के पूर्वी अपतटीय क्षेत्र में ऊर्जा अन्वेषण को नई गति दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'खोज' और 'व्यावसायिक उत्पादन' के बीच की दूरी अक्सर लंबी और खर्चीली होती है। गैस की मात्रा, कैलोरिफिक वैल्यू और जलाशय की निरंतरता का आकलन अभी बाकी है। भारत के पूर्वी अपतटीय क्षेत्र में अन्वेषण का इतिहास बताता है कि प्रारंभिक संकेत हमेशा उत्पादन-योग्य भंडार में नहीं बदलते। असली कसौटी तब होगी जब आइसोटोप और नमूना परीक्षण के नतीजे सामने आएंगे और कंपनी अगले अन्वेषण कुएं या मूल्यांकन कार्यक्रम की घोषणा करेगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑयल इंडिया की अंडमान में नई गैस खोज क्या है?
ऑयल इंडिया लिमिटेड ने अंडमान अपतटीय ब्लॉक एएन-ओएसएचपी-2018/1 के तीसरे खोजी कुएं विजयपुरम-3 में प्राकृतिक गैस की मौजूदगी की पुष्टि की है। यह कुआं ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी के तहत ड्रिल किया गया है और अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से 15 किलोमीटर दूर 355 मीटर जल गहराई पर स्थित है।
क्या इससे पहले भी इस ब्लॉक में गैस मिली थी?
हाँ, सितंबर 2025 में इसी ब्लॉक के दूसरे खोजी कुएं विजयपुरम-2 में भी प्राकृतिक गैस की खोज हुई थी। विजयपुरम-3 की पुष्टि इस ब्लॉक में हाइड्रोकार्बन की दूसरी आधिकारिक खोज है।
विजयपुरम-3 कुएं की तकनीकी विशेषताएँ क्या हैं?
यह कुआं इयोसीन भू-स्तर में 1,900 मीटर से अधिक गहराई तक ड्रिल किया गया है। परफोरेशन के बाद लगातार गैस जलती हुई दिखाई दी और कुएं में दबाव तेजी से बढ़ा, जो गैस के प्रवाह का संकेत है।
अब आगे क्या होगा — क्या गैस का उत्पादन शुरू होगा?
फिलहाल गैस के नमूनों का परीक्षण किया जा रहा है ताकि उसकी संरचना और कैलोरिफिक वैल्यू का पता चल सके। आइसोटोप अध्ययन भी जारी है। इन परीक्षणों के नतीजों के आधार पर ही व्यावसायिक उत्पादन की संभावना और आगे की अन्वेषण रणनीति तय होगी।
यह खोज भारत की ऊर्जा नीति के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत अपनी ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए घरेलू हाइड्रोकार्बन अन्वेषण पर ज़ोर दे रहा है। अंडमान जैसे अपेक्षाकृत अनछुए अपतटीय क्षेत्रों में लगातार खोज इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और भविष्य में गैस आयात पर निर्भरता कम करने में सहायक हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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