ऑयल इंडिया को अंडमान अपतटीय ब्लॉक में प्राकृतिक गैस की नई खोज, तीसरे कुएं में हाइड्रोकार्बन की पुष्टि
सारांश
मुख्य बातें
ऑयल इंडिया लिमिटेड ने 6 जून 2025 को घोषणा की कि अंडमान अपतटीय ब्लॉक एएन-ओएसएचपी-2018/1 में ड्रिल किए गए तीसरे खोजी कुएं विजयपुरम-3 में प्राकृतिक गैस की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। यह कुआं अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से 15 किलोमीटर दूर 355 मीटर जल गहराई पर स्थित है। यह इस ब्लॉक में हाइड्रोकार्बन की दूसरी आधिकारिक पुष्टि है।
खोज का विवरण और तकनीकी पहलू
कंपनी की नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, विजयपुरम-3 कुएं को ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (ओएएलपी) के तहत ड्रिल किया गया है। ड्रिलिंग कार्य इयोसीन भू-स्तर में 1,900 मीटर से अधिक गहराई तक किया गया। प्रारंभिक उत्पादन परीक्षण में छिद्रण (परफोरेशन) के बाद लगातार गैस जलती हुई दिखाई दी, और कुएं में दबाव तेजी से बढ़ने के साथ गैस का प्रवाह शुरू हुआ।
नमूना परीक्षण और आगे की जाँच
ऑयल इंडिया ने बताया कि फिलहाल गैस के नमूनों का परीक्षण किया जा रहा है, जिससे उसकी संरचना और ऊष्मीय क्षमता (कैलोरिफिक वैल्यू) का पता लगाया जा सके। इसके साथ ही समस्थानिक (आइसोटोप) अध्ययन भी जारी है, जो हाइड्रोकार्बन के स्रोत और उत्पत्ति को समझने में सहायक होगा। ये परीक्षण भविष्य में उत्पादन की व्यावसायिक व्यवहार्यता तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
पिछली खोज से संदर्भ
गौरतलब है कि इससे पहले सितंबर 2025 में इसी ब्लॉक के दूसरे खोजी कुएं विजयपुरम-2 (स्थान ओएईए) में भी प्राकृतिक गैस की खोज हुई थी। अब तक इस ब्लॉक में तीन खोजी कुएं ड्रिल किए जा चुके हैं, जिनमें से दो में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी के ठोस संकेत मिले हैं। यह क्रमिक सफलता इस क्षेत्र में एक सक्रिय हाइड्रोकार्बन तंत्र की ओर संकेत करती है।
रणनीतिक महत्व
ऑयल इंडिया ने इस खोज को इस क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन के स्रोत, प्रवाह मार्ग और संभावित भंडार की मौजूदगी का महत्वपूर्ण संकेतक बताया है। कंपनी का मानना है कि यह खोज भविष्य में क्षेत्र में अन्वेषण और उत्पादन गतिविधियों की रणनीति तैयार करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। यह ऐसे समय में आई है जब भारत अपनी ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधनों के दोहन पर ज़ोर दे रहा है।
क्या होगा आगे
नमूना परीक्षण और आइसोटोप विश्लेषण के नतीजे आने के बाद कंपनी इस ब्लॉक में आगे की खोज और संभावित उत्पादन योजना पर निर्णय लेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गैस की व्यावसायिक मात्रा की पुष्टि होती है, तो यह भारत के पूर्वी अपतटीय क्षेत्र में ऊर्जा अन्वेषण को नई गति दे सकता है।