MCX पर सोना-चांदी धड़ाम: सिल्वर 2.80% गिरकर ₹2,44,750, फेड ने दरें 3.75% पर रोकीं
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 18 जून को गुरुवार के कारोबारी सत्र में सोने और चांदी की कीमतों में तीखी गिरावट दर्ज की गई, जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने लगातार चौथी बैठक में बेंचमार्क ब्याज दर को अपरिवर्तित रखा और साथ ही अमेरिका व ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने से सुरक्षित निवेश की माँग कमज़ोर पड़ी। MCX सिल्वर जुलाई फ्यूचर्स ₹2,48,000 के शुरुआती भाव से लुढ़ककर दिन के निम्नतम स्तर ₹2,44,495 प्रति किलोग्राम तक पहुँच गया — पिछले बंद ₹2,51,807 की तुलना में 2.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट।
MCX पर सोने-चांदी का हाल
सुबह करीब 11:43 बजे IST तक जुलाई डिलीवरी वाली चांदी ₹7,057 यानी 2.80 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹2,44,750 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। वहीं, MCX अगस्त गोल्ड फ्यूचर्स उसी समय तक ₹2,378 यानी 1.55 प्रतिशत टूटकर ₹1,51,501 प्रति 10 ग्राम पर था। दिन के कारोबार में सोना अपने पिछले बंद ₹1,53,879 से 1.64 प्रतिशत गिरकर ₹1,51,348 प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक पहुँचा।
फेडरल रिजर्व का फैसला और बाज़ार पर असर
फेडरल रिजर्व ने बुधवार, 17 जून को सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय में बेंचमार्क ब्याज दर को 3.5–3.75 प्रतिशत पर स्थिर रखा — यह लगातार चौथी बैठक है जब दर में कोई बदलाव नहीं हुआ। केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर तक मौद्रिक नीति को और सख्त करने के संकेत भी दिए। विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च ब्याज दरें कीमती धातुओं के लिए प्रतिकूल होती हैं क्योंकि सोने-चांदी पर कोई ब्याज आय नहीं मिलती, जिससे निवेशक ब्याज देने वाली संपत्तियों की ओर रुख करते हैं।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते की भूमिका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान वर्साय पैलेस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ भोजन के दौरान इस अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। ईरान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने समझौते पर दस्तखत किए। गौरतलब है कि वैश्विक बाज़ार में भू-राजनीतिक तनाव घटने पर सोने जैसी 'सुरक्षित पनाह' की माँग आमतौर पर कमज़ोर पड़ती है।
ऊर्जा बाज़ार और अनिश्चितता
इस समझौते से वैश्विक ऊर्जा संकट में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, जिसने मुद्रास्फीति की चिंताओं और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की अटकलों को हवा दी थी। हालाँकि, यह अनिश्चितता अभी बनी हुई है कि ईंधन की कीमतें कितनी जल्दी घट सकती हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य से आवागमन कब युद्ध-पूर्व स्तर पर लौट पाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पहले से दबाव में है।
आगे क्या
बाज़ार विश्लेषकों की नज़र अब फेडरल रिजर्व के अगले संकेतों और ईरान-अमेरिका समझौते के क्रियान्वयन पर टिकी है। यदि अक्टूबर में दरें वास्तव में बढ़ाई जाती हैं, तो कीमती धातुओं पर और दबाव बन सकता है। घरेलू निवेशकों के लिए MCX पर अल्पकालिक अस्थिरता बने रहने की संभावना है।