रेजरपे वल्कन लॉन्च: भारत का पहला एआई पेमेंट्स फाउंडेशन मॉडल, धोखाधड़ी पहचान 8 गुना बेहतर
सारांश
मुख्य बातें
फिनटेक कंपनी रेजरपे ने 18 अगस्त 2026 को 'रेजरपे वल्कन' लॉन्च किया — जिसे कंपनी भारत का पहला ट्रांसफॉर्मर-आधारित एआई फाउंडेशन मॉडल बताती है, जिसे विशेष रूप से पेमेंट्स इकोसिस्टम के लिए विकसित किया गया है। इस मॉडल का लक्ष्य भुगतान विफलताओं, धोखाधड़ी और चेकआउट बाधाओं को कम कर डिजिटल लेनदेन को अधिक सुरक्षित और निर्बाध बनाना है।
तकनीकी आधार और साझेदारी
रेजरपे वल्कन को एनवीडिया (NVIDIA) और अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) की तकनीक के सहयोग से तैयार किया गया है। कंपनी के अनुसार, यह मॉडल Amazon SageMaker पर निर्मित है और रेजरपे के पेमेंट नेटवर्क पर मौजूद लगभग 3 ट्रिलियन डेटा पॉइंट्स पर इसके शुरुआती घटकों को पहले ही लागू किया जा चुका है। यह डेटा वास्तविक समय में ट्रांजैक्शन रूटिंग, जोखिम मूल्यांकन और धोखाधड़ी की पहचान के लिए उपयोग में लाया गया।
AWS इंडिया एवं दक्षिण एशिया के एफएसआई और कॉन्ग्लोमेरेट्स प्रमुख किरण जगन्नाथ ने कहा कि यह मॉडल अरबों ट्रांजैक्शन से प्राप्त जानकारियों को एकीकृत कर एक ऐसा इंटेलिजेंट प्लेटफॉर्म तैयार करता है 'जो लगातार सीखता रहता है और पारंपरिक मशीन लर्निंग मॉडलों की सीमाओं को पार करता है।'
आंतरिक अध्ययन के निष्कर्ष
कंपनी के मुताबिक, इस मॉडल को विकसित करने से पहले 15 लाख उपभोक्ताओं और 51,000 से अधिक व्यवसायों पर आधारित एक आंतरिक अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में पाया गया कि भुगतान प्रक्रिया से जुड़ी समस्याएँ केवल महानगरों तक सीमित नहीं हैं — छोटे शहरों और कस्बों के उपभोक्ता भी इन चुनौतियों का सामना करते हैं। यह निष्कर्ष भारत की डिजिटल समावेशन की व्यापक चुनौती को रेखांकित करता है।
प्रदर्शन के दावे
रेजरपे का दावा है कि वल्कन की तैनाती के बाद पेमेंट सक्सेस रेट में 10 प्रतिशत तक सुधार हुआ है। अंतरराष्ट्रीय कार्ड धोखाधड़ी की पहचान और रोकथाम की क्षमता 8 गुना तक बढ़ी है, और बिना अतिरिक्त अलर्ट बढ़ाए 5 गुना अधिक संदिग्ध व विवादित ट्रांजैक्शन की पहचान की गई है। इसके अलावा, कंपनी के मैजिक चेकआउट प्लेटफॉर्म पर अब 40 प्रतिशत अधिक उपभोक्ताओं को उनकी पसंदीदा यूपीआई एप्लिकेशन दिखाई जा रही है, जिससे हर महीने अतिरिक्त 1 से 2 लाख खरीदारी ट्रांजैक्शन संभव हो रहे हैं।
सीईओ और साझेदारों की राय
रेजरपे के सह-संस्थापक और सीईओ हर्षिल माथुर ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य उन उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाना है जो अभी भी नकद और डिजिटल भुगतान के बीच निर्णय लेने की स्थिति में हैं। उनके अनुसार, अधिक विश्वसनीय और निर्बाध भुगतान अनुभव डिजिटल लेनदेन को तेजी से अपनाने में मदद करेगा।
एनवीडिया में ग्लोबल इंडस्ट्री बिजनेस डेवलपमेंट एंड पेमेंट्स के प्रमुख पहल पटांगिया ने कहा कि भारत की तेजी से विकसित हो रही डिजिटल अर्थव्यवस्था भुगतान प्रणालियों को अधिक बुद्धिमान, सुरक्षित और कुशल बनाने का बड़ा अवसर प्रदान कर रही है।
भविष्य की योजना और व्यापक संदर्भ
भारत का डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम आज यूपीआई, कार्ड, नेट बैंकिंग, वॉलेट और कैश ऑन डिलीवरी जैसे कई माध्यमों पर आधारित है, जिनका संचालन सैकड़ों बैंकों और पेमेंट गेटवे के ज़रिए होता है। रेजरपे के अनुसार, वल्कन रीयल-टाइम में विभिन्न भुगतान मार्गों का विश्लेषण कर सबसे उपयुक्त रूट का चयन कर सकता है, जिससे विफल ट्रांजैक्शन की संभावना घटती है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में डिजिटल धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और नियामक एजेंसियाँ फिनटेक कंपनियों पर सुरक्षा मानकों को कड़ा करने का दबाव बना रही हैं। कंपनी ने बताया कि भविष्य में 'वल्कन' का विस्तार ऑथेंटिकेशन, फ्रॉड डिटेक्शन, रिस्क मैनेजमेंट और डिजिटल लेंडिंग जैसे क्षेत्रों में भी किया जाएगा, जिससे यह प्लेटफॉर्म भुगतान से परे एक व्यापक फिनटेक इंफ्रास्ट्रक्चर बन सके।