11 अगस्त 2026
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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा: एआई बदलेगा भारतीय बैंकिंग, क्रेडिट डिलीवरी और वित्तीय समावेशन में होगी निर्णायक भूमिका

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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा: एआई बदलेगा भारतीय बैंकिंग, क्रेडिट डिलीवरी और वित्तीय समावेशन में होगी निर्णायक भूमिका

सारांश

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने FIBAC 2026 में एआई को भारतीय बैंकिंग की अगली निर्णायक शक्ति बताया — जैसे 1990 में उदारीकरण और 2010 में डिजिटलाइजेशन था। उनका संदेश साफ था: एआई की यात्रा को बैंक खुद आकार दें, वरना यह उन्हें आकार देगा।

मुख्य बातें

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 11 अगस्त 2026 को FIBAC 2026 सम्मेलन में एआई को भारतीय बैंकिंग की परिवर्तनकारी शक्ति बताया।
एआई की तुलना 1990 के दशक के उदारीकरण और 2010 के दशक के डिजिटलाइजेशन से की गई।
एआई उन उधारकर्ताओं तक क्रेडिट पहुँचाने में मदद कर सकता है जिनके पास औपचारिक क्रेडिट हिस्ट्री नहीं है।
RBI एआई को केवल जोखिम नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से उपयोग की जाने वाली क्षमता मानता है।
बैंकों से आग्रह: एआई यात्रा को सचेत रूप से आकार दें , इसे स्वतः विकसित न होने दें।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 11 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित FIBAC 2026 सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में क्रेडिट डिलीवरी को आमूल रूप से बदलने, ग्राहक अनुभव को उन्नत करने और वित्तीय समावेशन की पहुँच बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। उन्होंने बैंकों से आग्रह किया कि वे एआई को जिम्मेदारी से अपनाएँ और इस यात्रा को सचेत रूप से आकार दें।

एआई: इस दशक की परिभाषित शक्ति

मल्होत्रा ने एआई की तुलना 1990 के दशक के आर्थिक उदारीकरण और 2010 के दशक के डिजिटलाइजेशन से करते हुए कहा कि यह तकनीक भारतीय बैंकिंग के इस दशक को उसी तरह परिभाषित करेगी। उनके शब्दों में, "कॉन्फ्रेंस का विषय 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' बहुत सोच-समझकर चुना गया है। यह बिल्कुल सही और समय के अनुकूल है। मेरा मानना है कि यह विषय भारतीय बैंकिंग के इस दशक को उसी तरह निर्णायक रूप से परिभाषित करेगा, जैसे 1990 के दशक को उदारीकरण ने और 2010 के दशक को डिजिटलाइजेशन ने परिभाषित किया था।"

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत के बैंकिंग क्षेत्र में डिजिटल ऋण और फिनटेक साझेदारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं और RBI स्वयं AI-आधारित निगरानी उपकरणों पर काम कर रहा है।

बैंकिंग के काम करने का नया तरीका

गवर्नर मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि एआई को महज़ एक अलग तकनीकी परियोजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोई ऐसी टेक्नोलॉजी नहीं है जिसे बस खरीद लिया जाए या कोई ऐसा प्रोजेक्ट नहीं है जिसे पूरा करके छोड़ दिया जाए। यह बिजनेस करने और बैंक चलाने का एक नया तरीका है। यह जोखिम का आकलन करने, ग्राहकों को सेवा देने, कैपिटल की कीमत तय करने और संस्थानों को व्यवस्थित करने के तरीके में एक बदलाव है।"

गौरतलब है कि यह बयान RBI की उस नीतिगत दिशा को रेखांकित करता है जिसमें केंद्रीय बैंक एआई को केवल जोखिम के रूप में नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से उपयोग की जाने वाली क्षमता के रूप में देखता है।

वित्तीय समावेशन और क्रेडिट डिलीवरी पर असर

मल्होत्रा के अनुसार, एआई उन उधारकर्ताओं का मूल्यांकन करने में बैंकों की सहायता कर सकता है जिनके पास औपचारिक क्रेडिट हिस्ट्री नहीं है — यानी देश के उन करोड़ों नागरिकों तक ऋण की पहुँच संभव हो सकती है जो अब तक बैंकिंग तंत्र के दायरे से बाहर रहे हैं। यह भारत के वित्तीय समावेशन लक्ष्यों के लिए एक महत्त्वपूर्ण कदम हो सकता है।

यह ऐसे समय में विशेष रूप से प्रासंगिक है जब भारत में अभी भी बड़ी संख्या में लघु व्यवसाय और ग्रामीण उधारकर्ता औपचारिक ऋण प्रणाली से वंचित हैं।

बैंकों के लिए RBI की अपेक्षाएँ

RBI गवर्नर ने सम्मेलन में उपस्थित बैंक प्रतिनिधियों को सीधे संबोधित करते हुए कहा, "इस कमरे में मौजूद कई बैंक पहले से ही एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं और कई अन्य बैंक भी ऐसा करने पर विचार कर रहे हैं। सवाल बस यह है कि क्या आप सोच-समझकर एआई के सफर को आकार देते हैं, या फिर आप इसे खुद को आकार देने देते हैं।"

यह चेतावनी उन संस्थाओं के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है जो बिना पर्याप्त जोखिम प्रबंधन ढाँचे के एआई को तेज़ी से तैनात कर रही हैं। आने वाले समय में RBI से एआई-संबंधी विनियामक दिशानिर्देश जारी होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो एक सकारात्मक बदलाव है। लेकिन असली सवाल यह है कि 'जिम्मेदार एआई' की परिभाषा कौन तय करेगा और उसका अनुपालन कैसे सुनिश्चित होगा — जब तक विनियामक ढाँचा नहीं आता, बैंक अपनी सुविधा से इसकी व्याख्या करते रहेंगे। वित्तीय समावेशन का वादा आकर्षक है, पर यह भी देखना होगा कि बिना क्रेडिट हिस्ट्री वाले उधारकर्ताओं के लिए एआई-आधारित मूल्यांकन में पूर्वाग्रह (bias) का जोखिम कैसे नियंत्रित किया जाएगा। भाषण की दिशा सही है, पर क्रियान्वयन की कसौटी अभी बाकी है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने FIBAC 2026 में एआई के बारे में क्या कहा?
मल्होत्रा ने कहा कि एआई भारतीय बैंकिंग के इस दशक को उसी तरह परिभाषित करेगा जैसे 1990 के दशक में उदारीकरण और 2010 के दशक में डिजिटलाइजेशन ने किया था। उन्होंने बैंकों से एआई को जिम्मेदारी से अपनाने और इसकी यात्रा को सचेत रूप से आकार देने का आग्रह किया।
एआई से वित्तीय समावेशन कैसे बढ़ेगा?
RBI गवर्नर के अनुसार, एआई उन उधारकर्ताओं का मूल्यांकन करने में बैंकों की मदद कर सकता है जिनके पास औपचारिक क्रेडिट हिस्ट्री नहीं है। इससे देश के उन करोड़ों नागरिकों तक ऋण की पहुँच संभव हो सकती है जो अब तक बैंकिंग तंत्र के दायरे से बाहर थे।
RBI एआई को किस नज़रिए से देखता है — अवसर या जोखिम?
मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि RBI एआई को केवल एक जोखिम के रूप में नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से उपयोग की जाने वाली क्षमता के रूप में देखता है। केंद्रीय बैंक चाहता है कि बैंक इसे एक नए व्यावसायिक ढाँचे के रूप में अपनाएँ।
FIBAC 2026 सम्मेलन क्या है और यह कहाँ हुआ?
FIBAC (Federation of Indian Banks' Association Conference) भारतीय बैंकिंग क्षेत्र का एक प्रमुख वार्षिक सम्मेलन है। 2026 का यह आयोजन नई दिल्ली में हुआ, जिसमें RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 11 अगस्त को उद्घाटन भाषण दिया।
बैंकों के लिए एआई अपनाने में RBI की क्या अपेक्षा है?
RBI गवर्नर ने बैंकों से कहा कि वे एआई को महज़ एक तकनीकी प्रोजेक्ट न मानें, बल्कि इसे बैंकिंग के संचालन, जोखिम मूल्यांकन और ग्राहक सेवा के नए तरीके के रूप में अपनाएँ। उन्होंने चेताया कि एआई यात्रा को सोच-समझकर आकार देना ज़रूरी है, अन्यथा यह संस्थाओं को खुद आकार देने लगेगा।
राष्ट्र प्रेस
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