रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स 2026 बेंगलुरु में जारी, पृथ्वी और मानवता के प्रति जिम्मेदारी से आंके जाएंगे देश
सारांश
मुख्य बातें
वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन (WIF) ने 27 जून 2026 को बेंगलुरु में पहली बार 'रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स (RNI) 2026' रिपोर्ट सार्वजनिक की। विशेषज्ञों के अनुसार यह सूचकांक देशों का आकलन इस आधार पर करेगा कि वे पृथ्वी और दुनिया के लोगों के प्रति कितने जिम्मेदार हैं — न कि उनकी सैन्य या आर्थिक शक्ति के आधार पर।
क्या है रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स
गौरतलब है कि भारत ने इसी वर्ष जनवरी 2026 में इस सूचकांक की नींव रखी थी। यह एक वैश्विक मूल्यांकन ढाँचा है जो देशों को नैतिक शासन, सामाजिक कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक जिम्मेदारी जैसे मानकों पर परखता है। यह पारंपरिक आर्थिक और सैन्य ताकत पर आधारित सूचकांकों से सर्वथा भिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
WIF के अनुसार यह सूचकांक तीन वर्षों के अकादमिक और नीतिगत शोध का परिणाम है, जिसमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) मुंबई के विशेषज्ञों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
विशेषज्ञों की राय: पारंपरिक सूचकांकों से अलग क्यों
WIF के अध्यक्ष प्रोफेसर जगदीश मुखी ने कहा कि अब तक दुनिया में जारी अधिकांश वैश्विक सूचकांक शक्तिशाली देशों द्वारा तैयार किए जाते रहे हैं और उनमें देशों का आकलन उन्हीं के अपने मानकों पर होता है। उन्होंने कहा, "इनमें से कई सूचकांकों में यह देखा जाता है कि किसी देश के पास कितनी सैन्य शक्ति, कितने हथियार या कितना प्रभाव है। लेकिन 'रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स' का उद्देश्य इससे अलग है।"
आरिन कैपिटल के चेयरमैन और इन्फोसिस के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) टी.वी. मोहनदास पई ने कहा, "रिस्पॉन्सिबल नेशन इंडेक्स यह आकलन करने के लिए विकसित किया गया है कि देश पृथ्वी और दुनिया के लोगों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। हर देश को अपने हितों की रक्षा करने का अधिकार है, लेकिन हम सभी एक ही ग्रह पर रहते हैं। इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि हमारे देश के भीतर किए गए कार्यों से पृथ्वी को नुकसान न पहुंचे और न ही अन्य देशों या लोगों के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़े। यही एक जिम्मेदार राष्ट्र की पहचान है।"
भारतीय संस्कृति और वसुधैव कुटुंबकम्
पई ने आगे कहा कि भारत की संस्कृति और सभ्यता हमेशा से 'वसुधैव कुटुंबकम्' — यानी पूरी दुनिया को एक परिवार मानने — का संदेश देती रही है। यह दर्शन RNI के मूल उद्देश्य के साथ स्वाभाविक रूप से मेल खाता है।
JNU की भूमिका और वैश्विक विमर्श
कार्यक्रम में JNU की कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री धुलीपुड़ी पंडित ने बताया कि JNU देश का एकमात्र ऐसा विश्वविद्यालय है जहाँ लगभग 10,000 छात्रों के लिए 1,000 फैकल्टी सदस्य हैं और जिसे पूर्णतः भारत सरकार का वित्तीय सहयोग प्राप्त है। उन्होंने कहा कि JNU अब वैश्विक विमर्श में अपना वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने की दिशा में सक्रिय है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संकट, जलवायु परिवर्तन और असमानता को लेकर देशों की जवाबदेही पर बहस तेज हो रही है। RNI 2026 इस दिशा में एक नई वैचारिक रूपरेखा प्रस्तुत करता है।