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वेतनभोगी कर्मचारी टैक्स कैलकुलेशन में फॉर्म 122 और 124 का रखें ध्यान, समय पर मिलेगा रिफंड

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वेतनभोगी कर्मचारी टैक्स कैलकुलेशन में फॉर्म 122 और 124 का रखें ध्यान, समय पर मिलेगा रिफंड

सारांश

गलत टैक्स कैलकुलेशन से वित्त वर्ष के अंत में अतिरिक्त टीडीएस कटौती या डिमांड नोटिस का सामना करना पड़ सकता है। इनकम टैक्स रूल्स, 2026 के फॉर्म 122 और फॉर्म 124 को समझकर और समय पर नियोक्ता को सही जानकारी देकर वेतनभोगी कर्मचारी इन परेशानियों से बच सकते हैं और समय पर रिफंड पा सकते हैं।

मुख्य बातें

इनकम टैक्स रूल्स, 2026 के नियम 204 के तहत फॉर्म 122 नियोक्ता को सटीक टीडीएस कैलकुलेशन में सहायता करता है।
फॉर्म 124 ( नियम 205 ) के ज़रिए एचआरए , एलटीसी , होम लोन ब्याज जैसी छूटों की जानकारी नियोक्ता को दी जाती है।
छूट का दावा करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज़ी प्रमाण होना अनिवार्य है, अन्यथा अंतिम तिमाही में एकमुश्त टीडीएस कट सकता है।
फॉर्म 26एएस और एआईएस से नियमित मिलान कर एडवांस टैक्स देय तिथि से पहले समीक्षा करें।
समय पर सही जानकारी देने से इनकम टैक्स रिफंड जल्दी और बिना अड़चन के मिलता है।

इनकम टैक्स रूल्स, 2026 के तहत वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए सही टैक्स कैलकुलेशन अत्यंत महत्वपूर्ण है — क्योंकि गलत आकलन के चलते वित्त वर्ष के अंत में नियोक्ता द्वारा अतिरिक्त टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) कटौती या इनकम टैक्स विभाग से डिमांड नोटिस का सामना करना पड़ सकता है। वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ही सुनियोजित टैक्स प्लानिंग इन परेशानियों को काफी हद तक टाल सकती है।

फॉर्म 122 क्या है और इसकी भूमिका

इनकम टैक्स रूल्स, 2026 के नियम 204 के अंतर्गत आने वाला फॉर्म नंबर 122 नियोक्ताओं को कर्मचारियों के टीडीएस के सटीक आकलन में सहायता करता है। इस फॉर्म के माध्यम से कर्मचारी अपने पिछले या एकाधिक नियोक्ताओं से प्राप्त वेतन, अन्य कर योग्य आय और उस पर काटे गए टीडीएस, तथा किसी प्रेषण या भुगतान पर लिए गए टीसीएस (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) की जानकारी अपने वर्तमान नियोक्ता को देता है।

गौरतलब है कि यह जानकारी समय-समय पर नियोक्ता को उपलब्ध कराना ज़रूरी है, ताकि अन्य स्रोतों से आय को भी टीडीएस गणना में शामिल किया जा सके और भविष्य में अचानक उत्पन्न होने वाली टैक्स देनदारी से बचा जा सके।

फॉर्म 124 और छूट का दावा

नियम 205 के तहत आने वाले फॉर्म नंबर 124 के ज़रिए कर्मचारी अपने नियोक्ता को हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) छूट, लीव ट्रैवल कंसेशन (एलटीसी), होम लोन पर ब्याज और अन्य वैध कर छूटों की जानकारी देता है। इससे नियोक्ता टीडीएस की गणना करते समय इन छूटों को कर योग्य आय से घटा सकता है।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि किसी भी निवेश — जैसे छोटी बचत योजनाएँ — या भुगतान — जैसे होम लोन ब्याज या एचआरए छूट — का दावा करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज़ी प्रमाण होना अनिवार्य है। अन्यथा वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में वेतन का बड़ा हिस्सा एकमुश्त टीडीएस के रूप में कट सकता है।

एडवांस टैक्स और समय पर समीक्षा

वेतनभोगी कर्मचारियों को एडवांस टैक्स की प्रत्येक देय तिथि से पहले अपने कुल टैक्स भुगतान की समीक्षा करनी चाहिए। इसके लिए फॉर्म 26एएस और एनुअल इन्फॉरमेशन स्टेटमेंट (एआईएस) उपयोगी साधन हैं, जो भुगतान किए गए टैक्स और कटे हुए टीडीएस का समेकित विवरण प्रस्तुत करते हैं।

यह प्रक्रिया न केवल अप्रत्याशित टैक्स झटकों से बचाती है, बल्कि कम टैक्स भुगतान पर लगने वाले ब्याज से भी राहत दिलाती है।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में विशेष रूप से प्रासंगिक है जब नई कर व्यवस्था के तहत अधिक कर्मचारी स्थानांतरित हो रहे हैं और छूट के दावों की प्रक्रिया बदल गई है। जो कर्मचारी एक से अधिक नियोक्ताओं के लिए काम करते हैं या वित्त वर्ष के दौरान नौकरी बदलते हैं, उनके लिए फॉर्म 122 की जानकारी समय पर साझा करना और भी ज़रूरी हो जाता है।

सही टैक्स प्लानिंग से न केवल अनावश्यक टीडीएस कटौती रुकती है, बल्कि इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने के बाद समय पर रिफंड मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।

क्या होगा आगे

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए टैक्स प्लानिंग की शुरुआत पहली तिमाही से ही कर लेना उचित है। विशेषज्ञों के अनुसार, फॉर्म 122 और 124 में सटीक और अद्यतन जानकारी देना, तथा फॉर्म 26एएस से नियमित मिलान करना, एक वेतनभोगी व्यक्ति की टैक्स देनदारी को व्यवस्थित रखने का सबसे प्रभावी तरीका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

2026 में फॉर्म 122 और 124 की अनिवार्यता एक सकारात्मक कदम है, लेकिन असली चुनौती जागरूकता की है — अधिकांश वेतनभोगी कर्मचारी आज भी इन फॉर्म्स के अस्तित्व से अनजान हैं। नियोक्ता प्रायः वित्त वर्ष के अंत में ही टीडीएस समायोजन करते हैं, जिससे कर्मचारी के हाथ में आने वाला वेतन अचानक घट जाता है। यदि सरकार इन फॉर्म्स की जानकारी को कर्मचारी ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा बनाए और नियोक्ताओं पर त्रैमासिक सूचना संग्रह की बाध्यता लागू करे, तो टैक्स विवादों और अनावश्यक रिफंड दावों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इनकम टैक्स रूल्स 2026 में फॉर्म 122 क्या है?
फॉर्म 122 इनकम टैक्स रूल्स, 2026 के नियम 204 के तहत आने वाला वह फॉर्म है जिसके ज़रिए कर्मचारी अपने पिछले या एकाधिक नियोक्ताओं से प्राप्त वेतन, अन्य कर योग्य आय और उस पर काटे गए टीडीएस व टीसीएस की जानकारी वर्तमान नियोक्ता को देता है। इससे नियोक्ता सभी स्रोतों से आय को मिलाकर सटीक टीडीएस काट सकता है।
फॉर्म 124 और फॉर्म 122 में क्या अंतर है?
फॉर्म 122 आय और टीडीएस विवरण के लिए है, जबकि फॉर्म 124 (नियम 205) कर छूटों के लिए है — जैसे एचआरए, एलटीसी, होम लोन ब्याज। फॉर्म 124 की जानकारी देने से नियोक्ता टीडीएस गणना में इन छूटों को घटा देता है, जिससे कटौती कम होती है।
वेतनभोगी कर्मचारी समय पर इनकम टैक्स रिफंड कैसे पा सकते हैं?
फॉर्म 122 और 124 में सटीक जानकारी समय पर नियोक्ता को देकर, फॉर्म 26एएस और एआईएस से नियमित मिलान करके और एडवांस टैक्स देय तिथि से पहले टैक्स भुगतान की समीक्षा करके रिफंड प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सकता है।
एचआरए और होम लोन छूट के लिए कौन से दस्तावेज़ ज़रूरी हैं?
एचआरए छूट के लिए किरायानामा और मकान मालिक का पैन (किराया ₹1 लाख प्रति वर्ष से अधिक होने पर), तथा होम लोन ब्याज छूट के लिए बैंक का ब्याज प्रमाण पत्र अनिवार्य है। पर्याप्त प्रमाण न होने पर वित्त वर्ष के अंत में एकमुश्त टीडीएस कटौती का सामना करना पड़ सकता है।
फॉर्म 26एएस और एआईएस का उपयोग टैक्स प्लानिंग में कैसे करें?
फॉर्म 26एएस में कटे हुए टीडीएस और जमा किए गए एडवांस टैक्स का विवरण होता है, जबकि एनुअल इन्फॉरमेशन स्टेटमेंट (एआईएस) सभी वित्तीय लेनदेन का समेकित विवरण देता है। एडवांस टैक्स की प्रत्येक देय तिथि से पहले इन दोनों से मिलान करने पर अप्रत्याशित टैक्स देनदारी और ब्याज से बचा जा सकता है।
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