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म्यूचुअल फंड हर भारतीय की वित्तीय नींव बने: सेबी सदस्य अमरजीत सिंह का एसोचैम समिट में आह्वान

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म्यूचुअल फंड हर भारतीय की वित्तीय नींव बने: सेबी सदस्य अमरजीत सिंह का एसोचैम समिट में आह्वान

सारांश

सेबी सदस्य अमरजीत सिंह ने एसोचैम समिट में साफ़ कहा — म्यूचुअल फंड अब कुछ चुनिंदा लोगों की पहुँच तक सीमित नहीं रहना चाहिए। करोड़ों भारतीय परिवार अभी भी इससे बाहर हैं, और 'विकसित भारत' का सपना तब तक अधूरा है जब तक घरेलू बचत उत्पादक निवेश में नहीं बदलती।

मुख्य बातें

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अमरजीत सिंह ने नई दिल्ली में एसोचैम के 17वें म्यूचुअल फंड समिट को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि म्यूचुअल फंड निवेश चुनिंदा वर्ग का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की वित्तीय सुरक्षा की नींव बनना चाहिए।
उद्योग तीन क्षेत्रों में योगदान दे रहा है: दीर्घकालिक निवेश अवसर , घरेलू पूंजी आपूर्ति , और कॉरपोरेट गवर्नेंस सुदृढ़ीकरण।
सिंह ने उत्पादों, वितरण और पहुँच में नवाचार की ज़रूरत पर ज़ोर दिया ताकि अधिक परिवार जुड़ सकें।
एसोचैम चेयरमैन एस.के.
जिंदल ने कहा कि अनुशासित बचत और पूंजी का प्रभावी उपयोग 'विकसित भारत' लक्ष्य की कुंजी है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्णकालिक सदस्य अमरजीत सिंह ने 4 जुलाई 2025 को स्पष्ट किया कि म्यूचुअल फंड निवेश केवल चुनिंदा वर्ग का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि देश के करोड़ों परिवारों की वित्तीय सुरक्षा और संपत्ति निर्माण की बुनियाद बनना चाहिए। नई दिल्ली में आयोजित एसोचैम के 17वें म्यूचुअल फंड समिट को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।

उद्योग की भूमिका और वर्तमान स्थिति

सिंह ने कहा कि म्यूचुअल फंड उद्योग आज भारत के वित्तीय बाज़ार का एक अहम स्तंभ बन चुका है। यह एक ओर आम परिवारों को दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण का अवसर देता है, वहीं दूसरी ओर देश की आर्थिक वृद्धि के लिए स्थिर घरेलू पूंजी उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने जोड़ा कि 'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में इस उद्योग की ज़िम्मेदारी और भी बड़ी होने वाली है।

तीन प्रमुख योगदान क्षेत्र

सेबी सदस्य ने म्यूचुअल फंड उद्योग के तीन प्रमुख योगदान क्षेत्रों की पहचान की। पहला, यह आम परिवारों को पारदर्शी और कम लागत वाले माध्यम से दीर्घकालिक निवेश का अवसर देता है। दूसरा, यह भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए स्थिर और दीर्घकालिक घरेलू पूंजी सुनिश्चित करता है। तीसरा, सूचीबद्ध कंपनियों में शेयरधारक के रूप में यह कॉरपोरेट गवर्नेंस और जवाबदेही को भी सुदृढ़ करता है।

हालाँकि उन्होंने यह भी माना कि इन तीनों क्षेत्रों में अभी बेहतर प्रदर्शन की पर्याप्त संभावनाएँ बाकी हैं।

नवाचार और व्यापक भागीदारी की ज़रूरत

सिंह ने रेखांकित किया कि भारत के लाखों-करोड़ों परिवार अभी भी म्यूचुअल फंड निवेश से जुड़े नहीं हैं। इस खाई को पाटने के लिए उत्पादों, वितरण प्रणाली और निवेशकों तक पहुँच बनाने के तरीकों में व्यापक नवाचार की ज़रूरत है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के ज़रिए खुदरा निवेशकों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है, फिर भी ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पैठ अभी भी सीमित है।

निवेशकों का भरोसा सर्वोपरि

अमरजीत सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि म्यूचुअल फंड उद्योग की सफलता की सबसे बड़ी बुनियाद निवेशकों का विश्वास है। उनके अनुसार, 'यदि यह भरोसा एक बार टूट जाता है, तो उसे दोबारा हासिल करना बेहद कठिन होता है।' उन्होंने नियामक संस्थाओं, एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC), डिस्ट्रीब्यूटरों, निवेशक संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों से मिलकर एक ऐसा निवेश माहौल बनाने का आग्रह किया, जहाँ अधिकाधिक भारतीय सुरक्षित और जागरूक तरीके से म्यूचुअल फंड से जुड़ सकें।

एसोचैम का नज़रिया

समिट में एसोचैम की नेशनल काउंसिल ऑन कमोडिटी मार्केट्स एंड इन्वेस्टमेंट्स के चेयरमैन एस.के. जिंदल ने कहा कि म्यूचुअल फंड उद्योग देश की घरेलू बचत को उत्पादक निवेश में बदलने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि अनुशासित बचत और पूंजी का प्रभावी उपयोग ही भारत को 'विकसित राष्ट्र' के लक्ष्य तक पहुँचाने में सहायक होगा। आगे चलकर नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत दोनों के लिए यह सुनिश्चित करना अहम होगा कि विस्तार की यह गति समावेशी और टिकाऊ बनी रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि नियामक स्तर पर इसे अमल में लाने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएँगे। ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में म्यूचुअल फंड की पैठ वर्षों से सीमित बनी हुई है, और 'जागरूकता' के आह्वान पहले भी होते रहे हैं। जब तक वितरण ढाँचे में संरचनात्मक बदलाव नहीं आता और भाषाई-डिजिटल बाधाएँ दूर नहीं होतीं, तब तक समावेश की यह बात महज़ मंच-भाषण बनकर रह सकती है। निवेशकों के भरोसे की बात सही है, लेकिन भरोसा बनाने के लिए पारदर्शिता और शिकायत-निवारण तंत्र को भी उतना ही मज़बूत करना होगा।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेबी सदस्य अमरजीत सिंह ने म्यूचुअल फंड को लेकर क्या कहा?
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अमरजीत सिंह ने कहा कि म्यूचुअल फंड निवेश केवल चुनिंदा वर्ग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह देश के करोड़ों परिवारों की वित्तीय सुरक्षा और संपत्ति निर्माण की बुनियाद बनना चाहिए। उन्होंने एसोचैम के 17वें म्यूचुअल फंड समिट में यह बात कही।
एसोचैम का 17वाँ म्यूचुअल फंड समिट कहाँ और कब हुआ?
यह समिट नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसमें सेबी सदस्य अमरजीत सिंह और एसोचैम के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। समिट में म्यूचुअल फंड उद्योग की भूमिका, वित्तीय समावेश और 'विकसित भारत' लक्ष्य पर चर्चा हुई।
म्यूचुअल फंड उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था में कैसे योगदान देता है?
सेबी सदस्य के अनुसार म्यूचुअल फंड उद्योग तीन तरीकों से अर्थव्यवस्था को मज़बूती देता है: पारदर्शी और कम लागत वाले दीर्घकालिक निवेश अवसर, स्थिर घरेलू पूंजी की आपूर्ति, और सूचीबद्ध कंपनियों में कॉरपोरेट गवर्नेंस को सुदृढ़ करना। हालाँकि उन्होंने माना कि इन क्षेत्रों में अभी और बेहतर प्रदर्शन की गुंजाइश है।
म्यूचुअल फंड में व्यापक भागीदारी के लिए क्या ज़रूरत है?
अमरजीत सिंह ने कहा कि उत्पादों, वितरण प्रणाली और निवेशकों तक पहुँच के तरीकों में नवाचार ज़रूरी है। नियामक संस्थाओं, AMC, डिस्ट्रीब्यूटरों और शैक्षणिक संस्थानों को मिलकर एक ऐसा माहौल बनाना होगा जहाँ अधिक भारतीय सुरक्षित और जागरूक तरीके से निवेश कर सकें।
'विकसित भारत' लक्ष्य में म्यूचुअल फंड की क्या भूमिका है?
सेबी सदस्य और एसोचैम चेयरमैन एस.के. जिंदल दोनों ने कहा कि घरेलू बचत को उत्पादक निवेश में बदलना 'विकसित भारत' के लक्ष्य की कुंजी है। अनुशासित बचत और पूंजी का प्रभावी उपयोग ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में सहायक होगा।
राष्ट्र प्रेस
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