म्यूचुअल फंड हर भारतीय की वित्तीय नींव बने: सेबी सदस्य अमरजीत सिंह का एसोचैम समिट में आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्णकालिक सदस्य अमरजीत सिंह ने 4 जुलाई 2025 को स्पष्ट किया कि म्यूचुअल फंड निवेश केवल चुनिंदा वर्ग का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि देश के करोड़ों परिवारों की वित्तीय सुरक्षा और संपत्ति निर्माण की बुनियाद बनना चाहिए। नई दिल्ली में आयोजित एसोचैम के 17वें म्यूचुअल फंड समिट को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।
उद्योग की भूमिका और वर्तमान स्थिति
सिंह ने कहा कि म्यूचुअल फंड उद्योग आज भारत के वित्तीय बाज़ार का एक अहम स्तंभ बन चुका है। यह एक ओर आम परिवारों को दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण का अवसर देता है, वहीं दूसरी ओर देश की आर्थिक वृद्धि के लिए स्थिर घरेलू पूंजी उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने जोड़ा कि 'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में इस उद्योग की ज़िम्मेदारी और भी बड़ी होने वाली है।
तीन प्रमुख योगदान क्षेत्र
सेबी सदस्य ने म्यूचुअल फंड उद्योग के तीन प्रमुख योगदान क्षेत्रों की पहचान की। पहला, यह आम परिवारों को पारदर्शी और कम लागत वाले माध्यम से दीर्घकालिक निवेश का अवसर देता है। दूसरा, यह भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए स्थिर और दीर्घकालिक घरेलू पूंजी सुनिश्चित करता है। तीसरा, सूचीबद्ध कंपनियों में शेयरधारक के रूप में यह कॉरपोरेट गवर्नेंस और जवाबदेही को भी सुदृढ़ करता है।
हालाँकि उन्होंने यह भी माना कि इन तीनों क्षेत्रों में अभी बेहतर प्रदर्शन की पर्याप्त संभावनाएँ बाकी हैं।
नवाचार और व्यापक भागीदारी की ज़रूरत
सिंह ने रेखांकित किया कि भारत के लाखों-करोड़ों परिवार अभी भी म्यूचुअल फंड निवेश से जुड़े नहीं हैं। इस खाई को पाटने के लिए उत्पादों, वितरण प्रणाली और निवेशकों तक पहुँच बनाने के तरीकों में व्यापक नवाचार की ज़रूरत है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के ज़रिए खुदरा निवेशकों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है, फिर भी ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पैठ अभी भी सीमित है।
निवेशकों का भरोसा सर्वोपरि
अमरजीत सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि म्यूचुअल फंड उद्योग की सफलता की सबसे बड़ी बुनियाद निवेशकों का विश्वास है। उनके अनुसार, 'यदि यह भरोसा एक बार टूट जाता है, तो उसे दोबारा हासिल करना बेहद कठिन होता है।' उन्होंने नियामक संस्थाओं, एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC), डिस्ट्रीब्यूटरों, निवेशक संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों से मिलकर एक ऐसा निवेश माहौल बनाने का आग्रह किया, जहाँ अधिकाधिक भारतीय सुरक्षित और जागरूक तरीके से म्यूचुअल फंड से जुड़ सकें।
एसोचैम का नज़रिया
समिट में एसोचैम की नेशनल काउंसिल ऑन कमोडिटी मार्केट्स एंड इन्वेस्टमेंट्स के चेयरमैन एस.के. जिंदल ने कहा कि म्यूचुअल फंड उद्योग देश की घरेलू बचत को उत्पादक निवेश में बदलने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि अनुशासित बचत और पूंजी का प्रभावी उपयोग ही भारत को 'विकसित राष्ट्र' के लक्ष्य तक पहुँचाने में सहायक होगा। आगे चलकर नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत दोनों के लिए यह सुनिश्चित करना अहम होगा कि विस्तार की यह गति समावेशी और टिकाऊ बनी रहे।