19 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

SEBI का बड़ा स्पष्टीकरण: चचेरे भाई-बहन भी बन सकते हैं कंपनी में स्वतंत्र निदेशक

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
SEBI का बड़ा स्पष्टीकरण: चचेरे भाई-बहन भी बन सकते हैं कंपनी में स्वतंत्र निदेशक

सारांश

SEBI ने साफ किया है कि प्रमोटरों या निदेशकों के चचेरे भाई-बहन अपने-आप ‘रिलेटेड पर्सन’ नहीं माने जाएँगे। मैथन अलॉयज की अर्जी पर दिए इस स्पष्टीकरण से अन्य शर्तें पूरी होने पर वे सूचीबद्ध कंपनियों में स्वतंत्र निदेशक बन सकते हैं — एक ऐसा रुख जो परिवार-आधारित कारोबारी समूहों की बोर्ड संरचना पर सीधा असर डाल सकता है।

मुख्य बातें

SEBI ने 2 जून को स्पष्ट किया कि प्रमोटरों/निदेशकों के चचेरे भाई-बहन स्वतः ‘रिलेटेड पर्सन’ नहीं माने जाएँगे।
यह स्पष्टीकरण मैथन अलॉयज द्वारा मांगे गए अनौपचारिक मार्गदर्शन के जवाब में आया।
कंपनी अधिनियम व LODR के तहत ‘रिश्तेदार’ की परिभाषा पति/पत्नी, माता-पिता, बच्चे और सगे भाई-बहनों तक सीमित है।
चचेरे भाई-बहन स्वतंत्र निदेशक बन सकते हैं, बशर्ते शेयरधारिता व वित्तीय हितों समेत अन्य शर्तें पूरी हों।
SEBI ने कहा — यह मार्गदर्शन तथ्य-आधारित है, बाध्यकारी निर्णय नहीं।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 2 जून को एक अहम स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि किसी कंपनी के प्रमोटरों या निदेशकों के चचेरे भाई-बहनों को लिस्टिंग नियमों के तहत स्वतः ‘रिलेटेड पर्सन’ नहीं माना जाएगा। इस व्याख्या से अन्य वैधानिक शर्तें पूरी होने पर ऐसे चचेरे भाई-बहनों के लिए सूचीबद्ध कंपनियों में स्वतंत्र निदेशक के पद पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।

मामला कैसे उठा

यह स्पष्टीकरण मैथन अलॉयज द्वारा मांगे गए अनौपचारिक मार्गदर्शन (informal guidance) के जवाब में आया है। कंपनी ने नियामक से व्याख्या मांगी थी कि क्या प्रमोटर समूह के किसी सदस्य का चचेरा भाई मौजूदा नियमों के तहत स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्ति के लिए योग्य हो सकता है।

यह सवाल तब उठा जब कंपनी ने प्रमोटर समूह के एक सदस्य से संबंधित व्यक्ति को नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा और जानना चाहा कि क्या यह नियुक्ति SEBI के लिस्टिंग दायित्व और प्रकटीकरण आवश्यकताएं (LODR) विनियमों की स्वतंत्रता शर्तों का उल्लंघन करेगी।

‘रिश्तेदार’ की परिभाषा क्या कहती है

बाजार नियामक के अनुसार, इस प्रश्न का उत्तर लागू कानूनों में ‘रिश्तेदार’ की कानूनी परिभाषा पर निर्भर करता है। SEBI ने स्पष्ट किया कि कंपनी अधिनियम और LODR विनियमों के तहत ‘रिश्तेदार’ की परिभाषा केवल निकट परिवार के सदस्यों — पति/पत्नी, माता-पिता, बच्चे और सगे भाई-बहनों — तक सीमित है, और इसमें चचेरे भाई-बहन शामिल नहीं हैं।

कंपनी द्वारा प्रस्तुत तथ्यों की जांच के बाद नियामक ने कहा कि स्वतंत्र निदेशक की पात्रता का आकलन करते समय चचेरे भाई-बहनों को स्वतः ‘संबंधित व्यक्ति’ की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। इस आधार पर प्रस्तावित उम्मीदवार स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्ति के योग्य हो सकते हैं।

शर्तें अभी भी लागू

हालांकि SEBI ने यह भी रेखांकित किया कि कंपनियों को अन्य सभी स्वतंत्रता आवश्यकताओं का अनुपालन जारी रखना होगा। इनमें शेयरधारिता, वित्तीय हित, आर्थिक संबंध और अन्य वैधानिक परीक्षणों से जुड़ी शर्तें शामिल हैं।

नियामक ने यह भी कहा कि उसका यह मार्गदर्शन पूरी तरह आवेदक द्वारा प्रस्तुत तथ्यों पर आधारित है, और इसे SEBI का बाध्यकारी निर्णय नहीं माना जाना चाहिए। अलग तथ्य या परिस्थितियाँ होने पर व्याख्या भी भिन्न हो सकती है।

क्यों मायने रखता है यह स्पष्टीकरण

गौरतलब है कि भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों में स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति को लेकर कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मानक पिछले कुछ वर्षों में लगातार सख्त हुए हैं। ऐसे में चचेरे भाई-बहनों को लेकर रही अस्पष्टता का दूर होना प्रमोटर-नियंत्रित परिवार-आधारित व्यापारिक समूहों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, जो भारत में कॉर्पोरेट परिदृश्य का बड़ा हिस्सा हैं।

आगे आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि कितनी सूचीबद्ध कंपनियाँ इस स्पष्टीकरण का उपयोग बोर्ड संरचना में बदलाव के लिए करती हैं, और क्या निवेशक समूह व प्रॉक्सी सलाहकार फर्में इस व्याख्या पर कोई नई बहस छेड़ती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर कॉर्पोरेट गवर्नेंस के लिहाज़ से नाज़ुक है। भारत के अधिकांश सूचीबद्ध समूह परिवार-नियंत्रित हैं, और चचेरे भाई-बहन अक्सर व्यापारिक नेटवर्क, शेयरधारिता और प्रबंधन निर्णयों में करीबी भूमिका निभाते हैं। ‘रिश्तेदार’ की संकीर्ण परिभाषा कानून की भाषा में सही है, लेकिन ‘स्वतंत्रता’ की आत्मा को कमज़ोर कर सकती है यदि शेयरधारिता और आर्थिक संबंधों के परीक्षण उतनी ही सख्ती से लागू न हों। प्रॉक्सी सलाहकार फर्मों और संस्थागत निवेशकों के लिए यह नज़र रखने का विषय है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SEBI ने चचेरे भाई-बहनों को लेकर क्या स्पष्ट किया है?
SEBI ने 2 जून को कहा कि किसी कंपनी के प्रमोटरों या निदेशकों के चचेरे भाई-बहन स्वतः ‘रिलेटेड पर्सन’ नहीं माने जाएँगे। इसका मतलब है कि अन्य वैधानिक शर्तें पूरी होने पर वे सूचीबद्ध कंपनी में स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त किए जा सकते हैं।
यह स्पष्टीकरण क्यों जारी हुआ?
यह स्पष्टीकरण मैथन अलॉयज द्वारा मांगे गए अनौपचारिक मार्गदर्शन के जवाब में आया, जिसमें कंपनी ने पूछा था कि क्या प्रमोटर समूह के सदस्य का चचेरा भाई LODR के तहत स्वतंत्र निदेशक के रूप में योग्य हो सकता है।
LODR और कंपनी अधिनियम में ‘रिश्तेदार’ की परिभाषा क्या है?
दोनों कानूनों में ‘रिश्तेदार’ की परिभाषा निकट परिवार तक सीमित है — पति/पत्नी, माता-पिता, बच्चे और सगे भाई-बहन। SEBI के अनुसार, चचेरे भाई-बहन इस परिभाषा में शामिल नहीं हैं।
क्या केवल यह स्पष्टीकरण नियुक्ति के लिए पर्याप्त है?
नहीं। SEBI ने स्पष्ट किया है कि कंपनियों को शेयरधारिता, वित्तीय हितों, आर्थिक संबंधों और अन्य वैधानिक परीक्षणों से जुड़ी सभी स्वतंत्रता शर्तों का पालन जारी रखना होगा। यह मार्गदर्शन तथ्य-आधारित है, बाध्यकारी निर्णय नहीं।
क्या इस व्याख्या को सभी कंपनियों पर लागू माना जा सकता है?
SEBI ने कहा है कि यह मार्गदर्शन पूरी तरह आवेदक कंपनी द्वारा प्रस्तुत तथ्यों पर आधारित है। अलग तथ्य या परिस्थितियाँ होने पर व्याख्या भिन्न हो सकती है, इसलिए अन्य कंपनियों को अपने मामले की अलग जांच करनी होगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले