20 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

SEBI का बड़ा स्पष्टीकरण: चचेरे भाई-बहन भी बन सकते हैं लिस्टेड कंपनी के स्वतंत्र निदेशक

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
SEBI का बड़ा स्पष्टीकरण: चचेरे भाई-बहन भी बन सकते हैं लिस्टेड कंपनी के स्वतंत्र निदेशक

सारांश

SEBI ने साफ किया है कि प्रमोटरों या निदेशकों के चचेरे भाई-बहन लिस्टिंग नियमों के तहत स्वतः ‘रिलेटेड पर्सन’ नहीं माने जाएँगे। मैथन अलॉयज की अर्जी पर दिए इस अनौपचारिक मार्गदर्शन से, बाकी वैधानिक शर्तें पूरी होने पर, ऐसे रिश्तेदार स्वतंत्र निदेशक पद के लिए योग्य हो सकते हैं।

मुख्य बातें

SEBI ने स्पष्ट किया कि प्रमोटरों/निदेशकों के चचेरे भाई-बहन स्वतः ‘रिलेटेड पर्सन’ नहीं माने जाएँगे।
यह स्पष्टीकरण मैथन अलॉयज द्वारा मांगे गए अनौपचारिक मार्गदर्शन के जवाब में आया।
कंपनी अधिनियम व LODR के तहत ‘रिश्तेदार’ की परिभाषा पति/पत्नी, माता-पिता, बच्चों व भाई-बहन तक सीमित।
शेयरधारिता, वित्तीय हित व आर्थिक संबंधों से जुड़ी अन्य स्वतंत्रता शर्तें यथावत लागू रहेंगी।
यह मार्गदर्शन तथ्य-आधारित है, SEBI का बाध्यकारी निर्णय नहीं।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक अहम स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि किसी लिस्टेड कंपनी के प्रमोटरों या निदेशकों के चचेरे भाई-बहनों को लिस्टिंग नियमों के तहत स्वतः ‘संबंधित व्यक्ति’ (related person) नहीं माना जाएगा। इस व्याख्या से अन्य वैधानिक शर्तें पूरी होने पर ऐसे चचेरे भाई-बहनों के लिए स्वतंत्र निदेशक (Independent Director) के पद पर नियुक्ति का रास्ता खुल गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह स्पष्टीकरण मैथन अलॉयज (Maithan Alloys) द्वारा मांगे गए अनौपचारिक मार्गदर्शन (informal guidance) के जवाब में आया। कंपनी ने नियामक से पूछा था कि क्या उसके प्रमोटर समूह के किसी सदस्य का चचेरा भाई मौजूदा नियमों के तहत स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त होने के योग्य हो सकता है।

यह सवाल तब उठा जब कंपनी ने प्रमोटर समूह के सदस्य से संबंध रखने वाले एक व्यक्ति की नियुक्ति का प्रस्ताव रखा और जानना चाहा कि क्या यह कदम SEBI के लिस्टिंग दायित्व एवं प्रकटीकरण आवश्यकताएँ (LODR) विनियमों के तहत स्वतंत्रता की शर्तों का उल्लंघन करेगा।

‘रिश्तेदार’ की कानूनी परिभाषा क्या कहती है

बाजार नियामक के अनुसार, इस मामले की व्याख्या लागू कानूनों के तहत ‘रिश्तेदार’ (relative) की कानूनी परिभाषा पर निर्भर करती है। SEBI ने स्पष्ट किया कि कंपनी अधिनियम और LODR विनियमों के तहत ‘रिश्तेदार’ की परिभाषा केवल निकट परिवार तक — यानी पति/पत्नी, माता-पिता, बच्चे और भाई-बहन — सीमित है, और इसमें चचेरे भाई-बहन शामिल नहीं हैं।

कंपनी द्वारा प्रस्तुत तथ्यों की जांच के बाद नियामक ने कहा कि स्वतंत्र निदेशक की पात्रता तय करते समय चचेरे भाई-बहनों को अपने-आप ‘संबंधित व्यक्ति’ नहीं माना जाएगा, और प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर प्रस्तावित उम्मीदवार स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त होने के योग्य हो सकते हैं।

शर्तें अब भी लागू

हालांकि, SEBI ने स्पष्ट किया कि कंपनियों को शेयरधारिता, वित्तीय हितों, आर्थिक संबंधों तथा अन्य वैधानिक परीक्षणों से जुड़ी सभी स्वतंत्रता आवश्यकताओं का अनुपालन पहले की तरह जारी रखना होगा। यानी सिर्फ रिश्ते की परिभाषा से छूट मिलने का अर्थ यह नहीं कि उम्मीदवार स्वतः योग्य हो जाएगा।

नियामक ने यह भी जोड़ा कि यह मार्गदर्शन पूरी तरह आवेदक द्वारा प्रस्तुत तथ्यों पर आधारित है और इसे SEBI का बाध्यकारी निर्णय नहीं माना जाना चाहिए। अलग तथ्य या परिस्थितियाँ अलग व्याख्या को जन्म दे सकती हैं।

कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर असर

गौरतलब है कि स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका भारत के कॉर्पोरेट गवर्नेंस ढाँचे की रीढ़ मानी जाती है, और SEBI पिछले कुछ वर्षों में इन नियुक्तियों को लेकर मानदंड लगातार सख्त करता आया है। ऐसे में यह स्पष्टीकरण कंपनियों के लिए पात्र उम्मीदवारों के पूल को थोड़ा व्यापक कर सकता है, बशर्ते बाकी स्वतंत्रता मानकों पर वे खरे उतरें।

आने वाले समय में बोर्डरूम नियुक्तियों में इस व्याख्या का असर देखने को मिल सकता है, खासकर पारिवारिक स्वामित्व वाली लिस्टेड कंपनियों में, जहाँ विस्तारित परिवार के सदस्यों को बोर्ड में लाने की कोशिशें अक्सर नियामकीय जांच के दायरे में आती रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर इसके निहितार्थ बड़े हैं — खासकर भारत की उन सैकड़ों पारिवारिक स्वामित्व वाली लिस्टेड कंपनियों के लिए जहाँ ‘स्वतंत्र’ निदेशक की परिभाषा पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। ‘रिश्तेदार’ की परिभाषा को निकट परिवार तक सीमित रखकर नियामक ने तकनीकी स्पष्टता तो दी है, पर असली कसौटी अब वित्तीय व आर्थिक संबंधों के परीक्षण पर टिकी है, जिन्हें कागज़ पर पकड़ना कहीं कठिन है। बोर्डरूम स्वतंत्रता की संस्कृति केवल पारिवारिक दूरी से नहीं, हितों के टकराव की सख्त जाँच से बनेगी।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SEBI ने चचेरे भाई-बहनों को लेकर क्या स्पष्ट किया है?
SEBI ने कहा है कि प्रमोटरों या निदेशकों के चचेरे भाई-बहनों को लिस्टिंग नियमों के तहत स्वतः ‘रिलेटेड पर्सन’ नहीं माना जाएगा। इसलिए अन्य वैधानिक शर्तें पूरी होने पर वे स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्ति के पात्र हो सकते हैं।
यह स्पष्टीकरण किस कंपनी की अर्जी पर आया?
यह स्पष्टीकरण मैथन अलॉयज द्वारा मांगे गए अनौपचारिक मार्गदर्शन के जवाब में आया है। कंपनी ने जानना चाहा था कि क्या प्रमोटर समूह के सदस्य का चचेरा भाई LODR विनियमों के तहत स्वतंत्र निदेशक बन सकता है।
कंपनी अधिनियम और LODR में ‘रिश्तेदार’ की परिभाषा क्या है?
SEBI के अनुसार, ‘रिश्तेदार’ की परिभाषा केवल निकट परिवार के सदस्यों — पति/पत्नी, माता-पिता, बच्चे और भाई-बहन — तक सीमित है। चचेरे भाई-बहन इस परिभाषा में शामिल नहीं हैं।
क्या इस स्पष्टीकरण के बाद कोई भी चचेरा भाई स्वतंत्र निदेशक बन सकता है?
नहीं, केवल रिश्ते की परिभाषा से छूट मिली है। उम्मीदवार को शेयरधारिता, वित्तीय हितों, आर्थिक संबंधों और अन्य वैधानिक परीक्षणों सहित स्वतंत्रता की सभी शर्तें पूरी करनी होंगी।
क्या SEBI का यह मार्गदर्शन बाध्यकारी है?
नहीं, SEBI ने स्पष्ट किया है कि यह मार्गदर्शन आवेदक द्वारा प्रस्तुत तथ्यों पर आधारित है और इसे बाध्यकारी निर्णय नहीं माना जाना चाहिए। अलग तथ्य या परिस्थितियाँ अलग व्याख्या को जन्म दे सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले