26 सितंबर 2026
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सर्कुलर बैटरी इकोसिस्टम के लिए 'सेकंड-लाइफ' बैटरियों पर ध्यान जरूरी: TERI और सरकारी विशेषज्ञ

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सर्कुलर बैटरी इकोसिस्टम के लिए 'सेकंड-लाइफ' बैटरियों पर ध्यान जरूरी: TERI और सरकारी विशेषज्ञ

सारांश

नई दिल्ली के राष्ट्रीय सम्मेलन में TERI, भारी उद्योग मंत्रालय और MNRE के विशेषज्ञों ने एकमत से कहा — ईवी बैटरियों का सेकंड-लाइफ उपयोग और रीसाइक्लिंग ढाँचा बनाए बिना भारत का बैटरी इकोसिस्टम न आत्मनिर्भर होगा, न सर्कुलर।

मुख्य बातें

TERI की महानिदेशक डॉ.
विभा धवन ने कहा कि बैटरी चर्चा केवल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तक सीमित न रखी जाए — सेकंड-लाइफ एप्लिकेशन पर भी ध्यान दिया जाए।
भारी उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव विजय मित्तल ने बताया कि सरकार सेकंड-लाइफ बैटरी, ट्रेसेबिलिटी और रीसाइक्लिंग का नीतिगत ढाँचा विकसित कर रही है।
MNRE के वैज्ञानिक कुलदीप राणा ने कहा कि सेकंड-लाइफ बैटरियाँ रूफटॉप सोलर , यूपीएस और घरेलू उपकरणों में भी उपयोगी हो सकती हैं।
TERI के वरिष्ठ निदेशक ए.के.
सक्सेना ने कहा — बैटरियाँ शुरुआत से ही सर्कुलर डिज़ाइन के साथ बनाई जाएं।
IESA के प्रबंध निदेशक विनायक वालिम्बे ने घरेलू मूल्य संवर्धन को प्रतिस्पर्धी बैटरी उद्योग की कुंजी बताया।
BSES राजधानी पावर की सुगंधिता वाधेरा ने वितरण क्षेत्र में लचीले ऊर्जा संसाधनों और मज़बूत क्षमता नियोजन की ज़रूरत रेखांकित की।

नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने 26 सितंबर 2026 को एकमत से कहा कि भारत को एक मज़बूत, आत्मनिर्भर और सर्कुलर बैटरी इकोसिस्टम खड़ा करने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना काफी नहीं है — बैटरियों के सेकंड-लाइफ एप्लिकेशन, पुन: उपयोग और रीसाइक्लिंग की समग्र व्यवस्था भी उतनी ही अनिवार्य है। विशेषज्ञों के अनुसार, बैटरी निर्माण, उपयोग, सेकंड-लाइफ और एंड-ऑफ-लाइफ मैनेजमेंट पर समन्वित नीति के बिना भारत का ऊर्जा संक्रमण अधूरा रहेगा।

मुख्य घटनाक्रम

द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) की महानिदेशक डॉ. विभा धवन ने कहा कि बैटरी क्षेत्र पर बहस केवल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग के बाद बची हुई क्षमता वाली बैटरियों के सेकंड-लाइफ विकल्पों को तलाशना ज़रूरी है, जिससे उनका उपयोगी जीवन और आर्थिक मूल्य दोनों अधिकतम किए जा सकें।

सम्मेलन में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों ने भारत के तेज़ी से विकसित हो रहे बैटरी इकोसिस्टम से जुड़े अवसरों और चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की।

सरकार की प्रतिक्रिया और नीतिगत दिशा

भारी उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव विजय मित्तल ने कहा कि सरकार घरेलू विनिर्माण और सप्लाई चेन को सुदृढ़ करने के साथ-साथ सेकंड-लाइफ बैटरियों, ट्रेसेबिलिटी, मानकों और रीसाइक्लिंग से जुड़े नीतिगत ढाँचे को भी आकार दे रही है। उनके अनुसार, ये कदम भारत को एक प्रतिस्पर्धी और सर्कुलर बैटरी अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे ले जाएंगे।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के वैज्ञानिक कुलदीप राणा ने बताया कि सेकंड-लाइफ बैटरियों की उपयोगिता केवल इलेक्ट्रिक वाहनों तक नहीं है — इन्हें घरेलू उपकरणों, रूफटॉप सोलर पीवी सिस्टम्स और यूपीएस सिस्टम्स जैसे कई क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

TERI के वरिष्ठ निदेशक ए.के. सक्सेना ने कहा कि उत्पादन की मात्रा बढ़ाने की जगह मूल्य सृजन के स्थानीयकरण पर ज़्यादा ज़ोर होना चाहिए। उनका सुझाव था कि बैटरियों को शुरुआती डिज़ाइन चरण से ही सर्कुलर दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर तैयार किया जाए और सेकंड-लाइफ बैटरियों की शेष क्षमता का आकलन कर उपभोक्ताओं का भरोसा बनाया जाए।

इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस (IESA) के प्रबंध निदेशक विनायक वालिम्बे ने घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ाने को देश में एक मज़बूत और प्रतिस्पर्धी बैटरी उद्योग की बुनियाद बताया।

ऊर्जा वितरण पर असर

बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड की वरिष्ठ प्रबंधक सुगंधिता वाधेरा ने कहा कि भविष्य में बढ़ती बिजली माँग से निपटने के लिए राज्यों को क्षमता नियोजन, मज़बूत भुगतान सुरक्षा व्यवस्था और वितरण क्षेत्र में अधिक लचीले ऊर्जा संसाधनों पर काम करना होगा। गौरतलब है कि यह सम्मेलन ऐसे समय में हुआ है जब भारत अपने 2070 के नेट-ज़ीरो लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए घरेलू उन्नत रसायन सेल (ACC) निर्माण क्षमता के विस्तार पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।

आगे की राह

सम्मेलन में इस बात पर सहमति बनी कि बैटरी वैल्यू चेन के हर पड़ाव — निर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सेकंड-लाइफ पुन: उपयोग और अंतिम-जीवन प्रबंधन — को एक समन्वित नीति ढाँचे से जोड़ा जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समग्र दृष्टिकोण के बिना भारत की बैटरी अर्थव्यवस्था वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारत में बैटरी नीति की असली कमज़ोरी यह रही है कि 'सर्कुलर इकोसिस्टम' का विचार वर्षों से सुर्खियों में है, पर ठोस नियामक ढाँचा अभी भी अधूरा है। सेकंड-लाइफ बैटरियों के लिए स्पष्ट परीक्षण मानक, देयता नियम और उपभोक्ता गारंटी के बिना, बाज़ार में विश्वास नहीं बनेगा। घरेलू ACC उत्पादन की PLI योजना चल रही है, लेकिन बैटरियों के अंतिम जीवन प्रबंधन का ढाँचा उसकी तुलना में कहीं पीछे है — और यही असंतुलन दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता की राह में सबसे बड़ी बाधा है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेकंड-लाइफ बैटरी क्या होती है?
सेकंड-लाइफ बैटरी वह बैटरी होती है जो इलेक्ट्रिक वाहन में अपनी मूल क्षमता का एक निश्चित हिस्सा उपयोग होने के बाद भी अन्य कार्यों — जैसे सोलर एनर्जी स्टोरेज, यूपीएस या घरेलू उपकरणों — के लिए उपयोगी बनी रहती है। इससे बैटरी का कुल आर्थिक और पर्यावरणीय जीवन बढ़ता है।
भारत में सर्कुलर बैटरी इकोसिस्टम क्यों ज़रूरी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल बैटरी उत्पादन बढ़ाने से आत्मनिर्भरता नहीं आएगी — पुन: उपयोग और रीसाइक्लिंग की व्यापक व्यवस्था के बिना संसाधनों की बर्बादी और आयात पर निर्भरता बनी रहेगी। सर्कुलर मॉडल से भारत को वैश्विक बैटरी बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।
सरकार सेकंड-लाइफ बैटरियों के लिए क्या कर रही है?
भारी उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव विजय मित्तल के अनुसार, सरकार सेकंड-लाइफ बैटरियों, ट्रेसेबिलिटी, मानकों और रीसाइक्लिंग से जुड़ा नीतिगत ढाँचा विकसित कर रही है। यह घरेलू विनिर्माण और सप्लाई चेन को मज़बूत करने के साथ-साथ चलाया जा रहा है।
सेकंड-लाइफ बैटरियों का उपयोग किन क्षेत्रों में हो सकता है?
MNRE के वैज्ञानिक कुलदीप राणा के अनुसार, सेकंड-लाइफ बैटरियाँ रूफटॉप सोलर पीवी सिस्टम, यूपीएस सिस्टम और घरेलू उपकरणों सहित कई क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती हैं — यह उपयोगिता केवल इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित नहीं है।
TERI के विशेषज्ञों ने बैटरी डिज़ाइन पर क्या सुझाव दिया?
TERI के वरिष्ठ निदेशक ए.के. सक्सेना ने कहा कि बैटरियों को शुरुआती चरण से ही सर्कुलर दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया जाना चाहिए। साथ ही सेकंड-लाइफ बैटरियों की शेष क्षमता का आकलन कर उपभोक्ताओं का भरोसा बनाना भी ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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