21 सितंबर 2026
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क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग पर राष्ट्रीय सेमिनार: जी. किशन रेड्डी बोले — ई-वेस्ट है मूल्यवान संसाधन, जनभागीदारी ज़रूरी

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क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग पर राष्ट्रीय सेमिनार: जी. किशन रेड्डी बोले — ई-वेस्ट है मूल्यवान संसाधन, जनभागीदारी ज़रूरी

सारांश

खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय सेमिनार में ई-वेस्ट को 'मूल्यवान संसाधन' करार दिया और क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम पर कॉन्सेप्ट पेपर लॉन्च किया — यह विकसित भारत की स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा ज़रूरतों को घरेलू स्तर पर पूरा करने की दिशा में एक अहम नीतिगत संकेत है।

मुख्य बातें

केंद्रीय खान मंत्री जी.
किशन रेड्डी ने 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 'इंडियाज क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम एंड सर्कुलर इकोनॉमी' राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन किया।
सेमिनार केंद्रीय खान मंत्रालय और मटेरियल्स रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MRAI) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।
रेड्डी ने क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम पर कॉन्सेप्ट पेपर लॉन्च किया, जिसमें आत्मनिर्भर सर्कुलर इकोनॉमी की रणनीतिक रूपरेखा है।
केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने ई-वेस्ट जागरूकता को गांव-गांव तक पहुँचाने पर बल दिया।
स्पेशल कैंपेन 6.0 और स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत औपचारिक रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए क्रिटिकल मिनरल्स की रीसाइक्लिंग और एक सुदृढ़ सर्कुलर इकोनॉमी इकोसिस्टम विकसित करना अनिवार्य है। उन्होंने सरकार, उद्योग जगत, शोध संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच व्यापक साझेदारी तथा आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर विशेष बल दिया।

सेमिनार का आयोजन और मुख्य घटनाक्रम

केंद्रीय खान मंत्रालय और मटेरियल्स रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MRAI) के संयुक्त तत्वावधान में हयात रीजेंसी, नई दिल्ली में 'इंडियाज क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम एंड सर्कुलर इकोनॉमी' विषयक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार का उद्घाटन करते हुए रेड्डी ने ई-वेस्ट और अन्य प्रयुक्त उत्पादों से क्रिटिकल मिनरल्स की रिकवरी बढ़ाने और घरेलू रीसाइक्लिंग क्षमता को मज़बूत करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

सेमिनार के दौरान केंद्रीय मंत्री ने क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम पर कॉन्सेप्ट पेपर भी लॉन्च किया, जिसमें भारत में क्रिटिकल मिनरल्स की रीसाइक्लिंग, द्वितीयक स्रोतों से रिकवरी, संसाधन दक्षता और आत्मनिर्भर सर्कुलर इकोनॉमी विकसित करने की रणनीतिक रूपरेखा प्रस्तुत की गई।

ई-वेस्ट को संसाधन मानने की अपील

रेड्डी ने कहा कि ई-वेस्ट और इस्तेमाल हो चुके उत्पादों को कचरा नहीं, बल्कि मूल्यवान संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने जिम्मेदार ई-वेस्ट प्रबंधन, नवाचार, उद्यमिता और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने की अपील की। उद्योग, कंपनियों और शोधकर्ताओं से तकनीक-आधारित और टिकाऊ रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम के निर्माण के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया गया।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ खनिजों की माँग तेज़ी से बढ़ रही है और चीन जैसे देश इन संसाधनों की आपूर्ति श्रृंखला पर पकड़ मज़बूत कर रहे हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और अन्य वक्ता

केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि संसाधन दक्षता बढ़ाने और आत्मनिर्भर सर्कुलर इकोसिस्टम बनाने के लिए क्रिटिकल मिनरल्स की रिकवरी और रीसाइक्लिंग क्षमताओं को सुदृढ़ करना अनिवार्य है। उन्होंने जिम्मेदार कचरा प्रबंधन और ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग के प्रति जागरूकता को गांव-गांव तक पहुँचाने पर बल दिया।

खान मंत्रालय के सचिव केशव चंद्र ने बताया कि स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और उन्नत विनिर्माण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए क्रिटिकल मिनरल्स अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि ई-वेस्ट, औद्योगिक अपशिष्ट और एंड-ऑफ-लाइफ सामग्री क्रिटिकल मिनरल्स की रिकवरी के महत्वपूर्ण द्वितीयक स्रोत बन सकते हैं, जिससे प्राथमिक स्रोतों पर निर्भरता घटेगी और संसाधन दक्षता बढ़ेगी।

तकनीकी सत्र और विषय-वस्तु

सेमिनार में ई-वेस्ट संग्रह, लिथियम-आयन बैटरियों से धातुओं की रिकवरी, ब्लैक मास प्रोसेसिंग, नॉन-फेरस मेटल्स रीसाइक्लिंग और नीति संबंधी उपायों पर विस्तृत तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। गौरतलब है कि खान मंत्रालय ने स्पेशल कैंपेन 6.0 और स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत जिम्मेदार ई-वेस्ट प्रबंधन, सुरक्षित निस्तारण और औपचारिक रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम में उसके समुचित उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान देने की बात कही।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत एक मज़बूत घरेलू रीसाइक्लिंग ढाँचा विकसित कर ले, तो वह आयात पर निर्भरता कम करते हुए विकसित भारत की औद्योगिक नींव मज़बूत कर सकता है। इस सेमिनार में तैयार की गई रणनीतिक रूपरेखा और कॉन्सेप्ट पेपर आने वाले महीनों में नीतिगत दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि रणनीतिक रूपरेखा नीतिगत घोषणा से आगे कब बढ़ेगी। भारत अभी भी लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा खनिजों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, जबकि चीन इस आपूर्ति श्रृंखला पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर रहा है। घरेलू रीसाइक्लिंग की क्षमता तब तक सीमित रहेगी जब तक अनौपचारिक क्षेत्र — जो भारत के अधिकांश ई-वेस्ट को संभालता है — को औपचारिक ढाँचे में नहीं लाया जाता। जनभागीदारी की अपील स्वागतयोग्य है, परंतु इसके लिए ठोस प्रोत्साहन तंत्र और जवाबदेही ढाँचा अभी भी अनुपस्थित है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम क्या है और यह भारत के लिए क्यों ज़रूरी है?
क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें ई-वेस्ट और प्रयुक्त उत्पादों से लिथियम, कोबाल्ट जैसे दुर्लभ खनिजों की रिकवरी की जाती है। भारत की स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा और उन्नत विनिर्माण ज़रूरतों के लिए इन खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करना रणनीतिक दृष्टि से अनिवार्य है।
21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में क्या हुआ?
केंद्रीय खान मंत्रालय और MRAI के संयुक्त तत्वावधान में हयात रीजेंसी, नई दिल्ली में 'इंडियाज क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम एंड सर्कुलर इकोनॉमी' राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित हुआ। इसमें खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कॉन्सेप्ट पेपर लॉन्च किया और ई-वेस्ट को मूल्यवान संसाधन के रूप में देखने की अपील की।
इस सेमिनार में किन तकनीकी विषयों पर चर्चा हुई?
सेमिनार में ई-वेस्ट संग्रह, लिथियम-आयन बैटरियों से धातुओं की रिकवरी, ब्लैक मास प्रोसेसिंग, नॉन-फेरस मेटल्स रीसाइक्लिंग और नीति संबंधी उपायों पर विस्तृत तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
स्पेशल कैंपेन 6.0 और स्वच्छता ही सेवा अभियान का क्रिटिकल मिनरल्स से क्या संबंध है?
खान मंत्रालय के अनुसार, इन दोनों अभियानों के तहत जिम्मेदार ई-वेस्ट प्रबंधन, सुरक्षित निस्तारण और औपचारिक रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम में उसके समुचित उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह ई-वेस्ट को क्रिटिकल मिनरल्स के द्वितीयक स्रोत के रूप में उपयोग करने की दिशा में एक कदम है।
भारत में क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग की अगली दिशा क्या होगी?
सेमिनार में जारी कॉन्सेप्ट पेपर में आत्मनिर्भर सर्कुलर इकोनॉमी की रणनीतिक रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रूपरेखा आने वाले महीनों में नीतिगत दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और घरेलू रीसाइक्लिंग क्षमता बढ़ाने से आयात निर्भरता कम होगी।
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