भारत के ऊर्जा ट्रांजिशन में चिली की भूमिका: राजदूत जुआन अंगुलो ने क्रिटिकल मिनरल्स साझेदारी पर दिया जोर
सारांश
मुख्य बातें
चिली के राजदूत जुआन अंगुलो ने 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि उनका देश क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति के माध्यम से भारत के ऊर्जा सुरक्षा ट्रांजिशन में एक दीर्घकालिक और भरोसेमंद भागीदार बनने का इरादा रखता है। उन्होंने व्यापार, निवेश और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्रों में भारत-चिली संबंधों को और गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
कॉपर और क्रिटिकल मिनरल्स: चिली की रणनीतिक ताकत
राजदूत अंगुलो ने बताया कि चिली दुनिया के सबसे बड़े कॉपर उत्पादकों में से एक है और वहाँ की कंपनियाँ वैश्विक स्तर पर प्रमुख माइनिंग कंपनियों में गिनी जाती हैं। उन्होंने कहा कि कॉपर इंडस्ट्री को लेकर भारतीय कंपनियों के साथ बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी है। उनके अनुसार, 'यह भारत के लिए जरूरी है और हम उन्हें यह मुहैया कराना चाहते हैं।'
अंगुलो ने यह भी रेखांकित किया कि भविष्य के उद्योगों को बड़े पैमाने पर ऊर्जा, संसाधन और विशेष रूप से क्रिटिकल मिनरल्स की आवश्यकता होगी — और चिली इस जरूरत को पूरा करने की स्थिति में है।
एआई और तकनीक में सहयोग की संभावना
द्विपक्षीय तकनीकी सहयोग पर बोलते हुए राजदूत ने कहा, 'एआई भविष्य है। हम इस क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग के दायरे को देख रहे हैं।' उन्होंने बताया कि चिली ने हाल ही में चिली ओपन लैंग्वेज लॉन्च किया है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने स्वीकार किया कि चिली का बाज़ार आकार में छोटा है, परंतु इस क्षेत्र में काम करने वाले उनके विशेषज्ञ उच्च गुणवत्ता वाले हैं।
अंगुलो ने यह भी जोड़ा कि एआई के प्रभावी उपयोग के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है — जो क्रिटिकल मिनरल्स की माँग को और बढ़ाती है। इस तरह, एआई और ऊर्जा ट्रांजिशन के बीच की कड़ी दोनों देशों के सहयोग को और प्रासंगिक बनाती है।
पश्चिम एशिया संकट और व्यापार पर असर
पश्चिम एशिया की मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताते हुए राजदूत ने कहा कि तेल मार्गों में व्यवधान से महंगाई और समुद्री परिवहन की लागत में वृद्धि होगी, जो चिली के निर्यात को सीधे प्रभावित करेगी। उन्होंने कहा, 'हम वर्तमान हालात को लेकर काफी संवेदनशील और चिंतित हैं।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ पहले से दबाव में हैं।
निवेश फ्रेमवर्क: SIPA और द्विपक्षीय साझेदारी
भारत-चिली निवेश संबंधों को संस्थागत रूप देने के लिए राजदूत अंगुलो ने बताया कि दोनों देश फिलहाल SIPA फ्रेमवर्क पर बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी भारत के ऊर्जा ट्रांजिशन को गति देने में सहायक होगी और दोनों पक्षों के लिए पारस्परिक लाभ की स्थिति बनाएगी।
अंगुलो ने अपनी बात इस महत्वाकांक्षी कथन के साथ समाप्त की: 'दीर्घकालिक नजरिए से हम भारत के ऊर्जा सुरक्षा ट्रांजिशन का हिस्सा बनना चाहेंगे।' यह बयान भारत और चिली के बीच उभरती रणनीतिक साझेदारी की दिशा को स्पष्ट करता है, जो आने वाले वर्षों में और मजबूत होने की संभावना है।