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सेंसेक्स 264 अंक टूटा, 76,224 पर खुला; ऑयल-गैस सेक्टर सबसे बड़ा लूजर, कच्चे तेल में उछाल

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सेंसेक्स 264 अंक टूटा, 76,224 पर खुला; ऑयल-गैस सेक्टर सबसे बड़ा लूजर, कच्चे तेल में उछाल

सारांश

हॉर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने कच्चे तेल को $95 के पार पहुँचाया और भारतीय बाजार को सपाट खुलने पर मजबूर किया। सेंसेक्स 264 अंक टूटा, ऑयल-गैस सेक्टर सबसे बड़ा शिकार रहा — लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप ने उलट चाल दिखाई।

मुख्य बातें

BSE सेंसेक्स 26 मई को 264.82 अंक (0.35%) गिरकर 76,224.14 पर खुला।
NSE निफ्टी 50 27.60 अंक (0.11%) की कमजोरी के साथ 24,004.10 पर था।
निफ्टी ऑयलएंडगैस सबसे बड़ा लूजर इंडेक्स; निफ्टी आईटी और निफ्टी पीएसयू बैंक हरे निशान में।
निफ्टी मिडकैप 100 0.13% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 0.56% की बढ़त में।
हॉर्मुज स्ट्रेट तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड $95.05 और WTI $91.65 प्रति बैरल पर।
अधिकांश एशियाई बाजार कमजोर; अमेरिकी बाजार राष्ट्रीय अवकाश के कारण बंद।

भारतीय शेयर बाजार मंगलवार, 26 मई को कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच सपाट खुला। BSE सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 264.82 अंक (0.35%) की गिरावट के साथ 76,224.14 पर था, जबकि NSE निफ्टी 50 27.60 अंक (0.11%) की कमजोरी के साथ 24,004.10 पर कारोबार कर रहा था। बाजार पर दबाव का मुख्य कारण हॉर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद उपजी भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रहा।

सेक्टर-वार प्रदर्शन

शुरुआती कारोबार में निफ्टी ऑयलएंडगैस सबसे बड़ा लूजर इंडेक्स रहा। इसके अलावा निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी ऑटो, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कंज्प्शन, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मेटल, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग लाल निशान में थे।

दूसरी ओर, निफ्टी मीडिया, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी आईटी हरे निशान में बने रहे। यह उल्लेखनीय है कि रक्षा और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने व्यापक बाजार की कमजोरी से खुद को अलग रखा।

मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी

लार्जकैप के विपरीत, मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में खरीदारी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 81.35 अंक (0.13%) की बढ़त के साथ 62,047.95 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 101 अंक (0.56%) की मजबूती के साथ 18,303 पर कारोबार कर रहा था।

सेंसेक्स के गेनर्स और लूजर्स

सेंसेक्स पैक में टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टीसीएस, बीईएल, एसबीआई, एचसीएल टेक, अदाणी पोर्ट्स, एचडीएफसी बैंक, एचयूएल, मारुति सुजुकी और टाटा स्टील गेनर्स की सूची में थे।

वहीं, इंडिगो, भारती एयरटेल, सन फार्मा, टाइटन, ट्रेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट, इटरनल, एमएंडएम, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, एलएंडटी और आईटीसी दबाव में रहे।

वैश्विक बाजार और भू-राजनीतिक कारण

अधिकांश एशियाई बाजारों में कमजोरी रही। टोक्यो, शंघाई, जकार्ता और मनीला के बाजार गिरावट में थे, जबकि हांगकांग और सोल हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी शेयर बाजार राष्ट्रीय अवकाश के कारण मंगलवार को बंद रहे।

बाजार की कमजोरी के पीछे अमेरिका द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान से जुड़ी छोटी नौकाओं पर की गई कार्रवाई को कारण माना जा रहा है। अमेरिका ने कहा कि उसने वहाँ माइन्स बिछा रही नौकाओं को निशाना बनाया। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच शांति वार्ता अभी भी जारी बताई जा रही है।

कच्चे तेल पर असर

भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 1.74% की मजबूती के साथ $95.05 प्रति बैरल और WTI क्रूड 1.48% की तेजी के साथ $91.65 प्रति बैरल पर पहुँच गया। आयात पर निर्भर भारत के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें चालू खाता घाटे और मुद्रास्फीति दोनों के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं। आने वाले सत्रों में ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

चालू खाता घाटे और मुद्रास्फीति की तिहरी चुनौती की याद दिलाता है जो 2022 में भारत को झेलनी पड़ी थी। उस वक्त RBI को आपात दर वृद्धि करनी पड़ी थी। दिलचस्प यह है कि इस बार मिडकैप और स्मॉलकैप ने लार्जकैप से उलट चाल चली — यह संकेत है कि घरेलू निवेशक वैश्विक अनिश्चितता से बेपरवाह हैं, जो एक सकारात्मक संकेत भी है और अति-आत्मविश्वास का जोखिम भी। यदि ईरान-अमेरिका वार्ता विफल होती है, तो ऊर्जा आयात पर निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था को इस बार कहीं अधिक गहरे दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

26 मई को सेंसेक्स और निफ्टी कितने अंक गिरे?
26 मई को BSE सेंसेक्स 264.82 अंक (0.35%) की गिरावट के साथ 76,224.14 पर और NSE निफ्टी 50 27.60 अंक (0.11%) की कमजोरी के साथ 24,004.10 पर खुला। यह गिरावट मुख्यतः वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण रही।
आज शेयर बाजार में गिरावट की वजह क्या है?
बाजार की कमजोरी का मुख्य कारण हॉर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़ी नौकाओं पर की गई सैन्य कार्रवाई को माना जा रहा है। इस घटना से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और एशियाई बाजारों में व्यापक बिकवाली देखी गई।
निफ्टी ऑयलएंडगैस सेक्टर पर इतना दबाव क्यों है?
हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है। वहाँ तनाव बढ़ने से आपूर्ति में व्यवधान की आशंका ने तेल कंपनियों के शेयरों पर दबाव बनाया, क्योंकि ऊँची कच्चे तेल की कीमतें घरेलू रिफाइनरी और मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित करती हैं।
क्या मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेजी रही?
हाँ, लार्जकैप की गिरावट के बावजूद निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 81.35 अंक (0.13%) की बढ़त के साथ 62,047.95 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 101 अंक (0.56%) की मजबूती के साथ 18,303 पर था। यह घरेलू-केंद्रित कंपनियों में निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।
कच्चे तेल की कीमतें कहाँ पहुँचीं और इसका भारत पर क्या असर होगा?
ब्रेंट क्रूड 1.74% की मजबूती के साथ $95.05 प्रति बैरल और WTI क्रूड 1.48% की तेजी के साथ $91.65 प्रति बैरल पर पहुँच गया। तेल आयात पर निर्भर भारत के लिए इससे व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी का जोखिम बढ़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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