सेंसेक्स 1,225 अंक उछला, लगातार चौथे दिन तेजी; FMCG और रियल्टी ने बाजार को दी रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को 1,225.07 अंक यानी 1.62 प्रतिशत की छलांग लगाकर 76,917.85 पर बंद हुआ — जो लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बाजार की मजबूती को दर्शाता है। इसी के साथ NSE निफ्टी 50 भी 370.05 अंक या 1.58 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,810.85 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की वापसी ने इस तेजी को आधार दिया।
कौन-से सेक्टर रहे अगुवा
निफ्टी FMCG इस सत्र का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा, जो 3.65 प्रतिशत चढ़ा। उसके बाद निफ्टी रियल्टी ने 2.33 प्रतिशत और निफ्टी कंज़म्पशन ने 2.29 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। खपत और उपभोक्ता-आधारित क्षेत्रों की यह अगुवाई घरेलू माँग के प्रति निवेशकों के बढ़ते भरोसे को इंगित करती है।
निफ्टी प्राइवेट बैंक 1.98 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 1.84 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 1.71 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज और निफ्टी इंडिया डिफेंस दोनों 1.33 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 1.10 प्रतिशत तथा निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.84 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।
कमजोर रहे ये सेक्टर
व्यापक तेजी के बावजूद कुछ सूचकांक दबाव में रहे। निफ्टी PSU बैंक सबसे अधिक -1.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। इसके अलावा निफ्टी मेटल -0.14 प्रतिशत और निफ्टी एनर्जी -0.11 प्रतिशत की मामूली गिरावट पर बंद हुए।
मिडकैप और स्मॉलकैप में भी मजबूती
लार्जकैप के साथ-साथ व्यापक बाजार में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 612.85 अंक यानी 1.06 प्रतिशत की मजबूती के साथ 58,596.25 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 57.55 अंक यानी 0.31 प्रतिशत की तेजी के साथ 18,652.85 पर रहा।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय इक्विटी बाजारों में सुधार के पीछे तीन मुख्य कारक हैं — कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कमी और FII की फिर से बढ़ती दिलचस्पी। दूसरी तिमाही के मजबूत कॉरपोरेट नतीजों ने घरेलू विकास के नजरिए पर निवेशकों का भरोसा और पुख्ता किया है।
यह ऐसे समय में आया है जब विदेशी निवेशकों ने लंबे समय की बिकवाली के बाद बाजार में वापसी की है, जिससे वित्तीय और उपभोग-आधारित सेक्टर में व्यापक भागीदारी बढ़ी है।
आगे क्या देखना होगा
विश्लेषकों का कहना है कि यह सुधार कितना टिकाऊ होगा, यह कंपनियों के निरंतर बेहतर नतीजों, FII के लगातार निवेश और तेल की कीमतों तथा वैश्विक यील्ड में नरमी बने रहने पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत दिशा भी बाजार के लिए अहम बाहरी कारक बनी रहेगी।