SAF की हिस्सेदारी 2026 में 1% से कम रहने का अनुमान, IATA ने धीमी प्रगति पर चिंता जताई
सारांश
मुख्य बातें
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) का वैश्विक उत्पादन 2026 में 24 लाख टन रहने का अनुमान है, जो कुल एविएशन ईंधन खपत का मात्र 0.8 प्रतिशत है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि विमानन उद्योग का कार्बन उत्सर्जन घटाने का मार्ग अभी भी कितना लंबा और कठिन है।
मौजूदा स्थिति और खर्च
IATA के अनुमान के मुताबिक, एयरलाइंस इस वर्ष SAF पर लगभग 4.3 अरब डॉलर खर्च करने की राह पर हैं। इसके बावजूद उत्पादन स्तर उस सीमा से काफी नीचे बना हुआ है, जो विमानन क्षेत्र के दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक माना जाता है। गौरतलब है कि उद्योग ने 2050 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया हुआ है।
IATA की चेतावनी
IATA के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (सस्टेनेबिलिटी) एवं मुख्य अर्थशास्त्री विली वाल्श ने कहा कि नेट-ज़ीरो प्रतिबद्धता के पाँच साल बाद भी SAF के विकास की रफ्तार निराशाजनक बनी हुई है। उन्होंने चेताया कि यदि 2026 में SAF की हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से भी कम रहती है, तो भविष्य में लगभग 65 प्रतिशत ईंधन आवश्यकताओं को SAF से पूरा करने का लक्ष्य और दूर होता जाएगा।
धीमी प्रगति के कारण
वाल्श ने धीमी प्रगति के लिए दो प्रमुख कारण गिनाए — अप्रभावी सरकारी नीतियाँ और तेल कंपनियों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में अरुचि। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में ऊर्जा बाज़ारों में आए व्यवधानों से नवीकरणीय ईंधनों में निवेश को गति मिलनी चाहिए थी, लेकिन एक व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य SAF बाज़ार बनाने के लिए आवश्यक प्रोत्साहन अभी तक नहीं मिले हैं।
उद्योग की माँगें और आगे की राह
IATA ने सरकारों और उद्योग हितधारकों से कई कदम उठाने का आग्रह किया है — नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति का विस्तार, ईंधन अवसंरचना तक खुली पहुँच सुनिश्चित करना, उत्पादन प्रोत्साहन एवं निवेश ढाँचे को मज़बूत करना, और पर्याप्त मात्रा तथा व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य मूल्य निर्धारण के साथ एक वैश्विक SAF बाज़ार का विकास। आलोचकों का कहना है कि बिना बाध्यकारी नीतिगत हस्तक्षेप के यह लक्ष्य केवल कागज़ पर ही रहेगा।