भारत में यूएई से आया क्रूड ऑयल टैंकर 'जग लाडकी', मुंद्रा पोर्ट पर किया डॉक
सारांश
Key Takeaways
- जग लाडकी टैंकर ने मुंद्रा पोर्ट पर डॉक किया।
- इसमें 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल है।
- फुजैराह बंदरगाह से लोड किया गया।
- भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
- अदाणी पोर्ट्स का कच्चे तेल आयात में महत्वपूर्ण योगदान।
मुद्रा, १८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय झंडे वाला क्रूड ऑयल टैंकर 'जग लाडकी', जो कि यूएई से आया था, बुधवार को भारत के तट पर पहुंच चुका है। इसने गुजरात में अदाणी ग्रुप द्वारा संचालित मुंद्रा पोर्ट पर डॉक किया है।
इस टैंकर में लगभग ८०,८८६ मीट्रिक टन कच्चा तेल है, जिसे फुजैराह बंदरगाह से लोड किया गया था। टैंकर की लंबाई २७४.१९ मीटर और चौड़ाई ५०.०४ मीटर है। इसका डेडवेट टन भार लगभग १६४,७१६ टन और ग्रॉस टन भार ८४,७३५ टन है।
फुजैराह बंदरगाह, मध्य पूर्व के उन चुनिंदा बंदरगाहों में से एक है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है। ईरान-अमेरिका, इजरायल युद्ध के चलते, फारस की खाड़ी का यह संकरा रास्ता प्रभावित हो गया है, जिससे विश्व के कुल कच्चे तेल का २० प्रतिशत आवागमन होता है।
मुंद्रा स्थित अदाणी पोर्ट्स में इसका आगमन, कच्चे तेल के भारी आयात को संभालने के लिए इस सुविधा की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
यह डिलीवरी एक प्रमुख रिफाइनरी के लिए सहायक है, जो क्षेत्र में आपूर्ति में व्यवधान के दौरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ऐसे शिपमेंट पर निर्भर करती है।
अदाणी पोर्ट्स मुंद्रा ने टैंकर जग लाडकी को सुरक्षित रूप से लंगर डालने और भारत की महत्वपूर्ण ऊर्जा लाइनों की सुरक्षा में समुद्री समन्वय प्रदान किया है।
ईरान-अमेरिका, इजरायल युद्ध के बीच, केंद्र सरकार देश की निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
इससे पहले, शिवालिक और नंदा देवी दो एलपीजी लदे जहाज भारत पहुंच चुके हैं। शिवालिक ने भी मुद्रा पोर्ट पर सोमवार को डॉक किया था।
वहीं, नंदा देवी ने कंडला पोर्ट के पास वडीनार पोर्ट पर डॉक किया था। वडीनार पोर्ट, गुजरात में कच्छ की खाड़ी के पास स्थित एक प्रमुख ऑफ-शोर ऑयल टर्मिनल है, जो दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण (पूर्व में कांडला पोर्ट) का हिस्सा है।
शिवालिक और नंदा देवी दोनों में ९२,७०० टन के करीब एलपीजी थी, जिसमें शिवालिक में ४६,००० टन से ज्यादा और नंदा देवी में ४७,००० टन से ज्यादा एलपीजी थी।