ट्रंप के जेनेरिक दवा टैरिफ का भारतीय फार्मा कंपनियों पर अगले दो वर्षों में सीमित असर: इन्फोमेरिक्स
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध टैरिफ लगाने की घोषणा के बावजूद, इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के ताज़ा विश्लेषण के अनुसार भारतीय फार्मा कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल पर अगले दो वित्तीय वर्षों में प्रभाव सीमित रहने की संभावना है। रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि टैरिफ लागू होने से पहले दिया गया ट्रांजिशन पीरियड इन कंपनियों को अपनी कारोबारी रणनीति में समायोजन का पर्याप्त अवसर देता है।
अमेरिकी बाज़ार में भारत की स्थिति
आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका ने भारत से 9.47 अरब डॉलर मूल्य के फार्मास्यूटिकल उत्पाद आयात किए, जो भारत के कुल फार्मा निर्यात का लगभग 30 फीसदी है। भारतीय कंपनियाँ इस समय अमेरिका में उपलब्ध लगभग 47 फीसदी जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करती हैं। अमेरिका में कुल नुस्खे वाली दवाओं में जेनेरिक दवाओं की हिस्सेदारी करीब 90 फीसदी है, हालाँकि कुल प्रिस्क्रिप्शन दवा खर्च में इनका योगदान मात्र 13 फीसदी है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के चीफ रेटिंग्स ऑफिसर रोहित इनामदार ने कहा, 'उत्पादन आधार को अमेरिका में स्थानांतरित करना आसान नहीं होगा। सप्लाई चेन की जटिलताएँ, नियामकीय मंजूरियाँ, शुरुआती पूंजी निवेश (कैपेक्स) और लागत-लाभ का समीकरण जैसी कई चुनौतियाँ सामने आएंगी।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि की-स्टार्टिंग मटेरियल (KSM) और एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) का उत्पादन मुख्यतः भारत और चीन की स्थापित सप्लाई चेन पर निर्भर है, जिसे अमेरिका में दोहराना अल्पकाल में संभव नहीं।
कंपनियों की वित्तीय सेहत
इन्फोमेरिक्स ने 25 प्रमुख सूचीबद्ध फार्मा कंपनियों के विश्लेषण में पाया कि वित्त वर्ष 2025-26 में उनका EBITDA मार्जिन 26.1 फीसदी रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 28.3 फीसदी से कुछ कम है। इस अवधि में कंपनियों की आय में लगभग 11 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई और कर्ज चुकाने की क्षमता भी मज़बूत बनी रही। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय फार्मा कंपनियाँ घरेलू बाज़ार के साथ-साथ यूरोप, दक्षिण अफ्रीका, मेक्सिको, ब्राज़ील और रूस जैसे उभरते बाज़ारों में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही हैं।
अमेरिकी निर्भरता में गिरावट
गौरतलब है कि सात प्रमुख भारतीय फार्मा कंपनियों के कुल कारोबार में अमेरिकी बाज़ार की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2024-25 के 36.8 फीसदी से घटकर वित्त वर्ष 2025-26 में 33.4 फीसदी रह गई है। हालाँकि, सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज, अरबिंदो फार्मा, जाइडस लाइफसाइंसेज और ल्यूपिन जैसी कंपनियाँ — जिनकी 35 से 50 फीसदी आय अमेरिका से आती है — अपेक्षाकृत अधिक दबाव में आ सकती हैं।
टैरिफ की समयसीमा और आगे की राह
घोषित टैरिफ योजना के अनुसार, 31 जुलाई 2028 तक अमेरिका में आयातित जेनेरिक दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। इसके बाद 1 अगस्त 2028 से एक वर्ष के लिए 100 फीसदी टैरिफ लागू होगा और 1 अगस्त 2029 से इसे बढ़ाकर 200 फीसदी कर दिया जाएगा। जो कंपनियाँ अमेरिका में उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करती हैं, वे इस अतिरिक्त टैरिफ से बच सकती हैं। विश्लेषकों के अनुसार, अगले तीन वर्षों में भारतीय फार्मा उद्योग की रणनीतिक प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह टैरिफ झटका बनता है या बदलाव का अवसर।