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ट्रंप का जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध टैरिफ ऐलान: 2 साल शून्य, फिर 100% और 200% शुल्क

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ट्रंप का जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध टैरिफ ऐलान: 2 साल शून्य, फिर 100% और 200% शुल्क

सारांश

ट्रंप का यह ऐलान अमेरिकी दवा उद्योग को घरेलू धरातल पर खड़ा करने की महत्वाकांक्षी कोशिश है। 1 अगस्त 2026 से दो साल शून्य टैरिफ, फिर 100% और 200% शुल्क — यह चरणबद्ध दबाव रणनीति वैश्विक जेनेरिक दवा आपूर्तिकर्ताओं के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 जुलाई 2026 को जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध टैरिफ नीति की घोषणा की।
1 अगस्त 2026 से दो वर्षों तक आयातित जेनेरिक दवाओं पर शून्य टैरिफ लागू रहेगा।
इसके बाद एक वर्ष के लिए 100 प्रतिशत और तत्पश्चात 200 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा।
नीति का उद्देश्य दवा कंपनियों को अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
घोषणा में किसी देश, कंपनी या टैरिफ प्रशासन की विस्तृत व्यवस्था का उल्लेख नहीं किया गया।
पेटेंटेड और ब्रांडेड दवाओं की नीति इस नई व्यवस्था से अलग रहेगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 जुलाई 2026 को जेनेरिक दवाओं पर एक चरणबद्ध टैरिफ नीति की घोषणा की, जिसका उद्देश्य दवा उत्पादन को वापस अमेरिका में लाना है। इस नीति के तहत 1 अगस्त 2026 से आयातित जेनेरिक दवाएं दो वर्षों तक शून्य टैरिफ पर अमेरिका में प्रवेश करती रहेंगी, जिसके बाद उन पर क्रमशः 100 प्रतिशत और फिर 200 प्रतिशत शुल्क लागू होगा।

टैरिफ की समयरेखा

राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा घोषित टाइमलाइन के अनुसार, 1 अगस्त 2026 से जेनेरिक दवाओं का आयात दो वर्षों तक बिना किसी शुल्क के होता रहेगा। इसके बाद एक वर्ष के लिए 100 प्रतिशत टैरिफ लागू किया जाएगा, और तत्पश्चात 200 प्रतिशत ड्यूटी लगाई जाएगी। ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, '1 अगस्त, 2026 से, अमेरिका में लाई जाने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर दो साल के लिए जीरो परसेंट टैरिफ लागू रहेगा, जिसके बाद एक साल के लिए टैरिफ को बढ़ाकर 100 प्रतिशत और उसके बाद 200 प्रतिशत कर दिया जाएगा।'

नीति का उद्देश्य

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इस चरणबद्ध टैरिफ ढाँचे का मकसद दवा निर्माताओं को अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा, 'यह अमेरिका में जेनेरिक फार्मास्युटिकल प्रोडक्शन को फिर से शुरू करने के लिए किया गया है, जिसमें उन कंपनियों पर पेनल्टी लगाई जाएगी जो उन्हें दिए गए समय के अंदर प्लांट और इक्विपमेंट नहीं बनाने का फैसला करती हैं।' राष्ट्रपति ने यह भी जोड़ा कि 'इस पॉलिसी का मकसद यूनाइटेड स्टेट्स के लोगों की सुरक्षा करना है।'

अस्पष्ट पहलू और खुले सवाल

गौरतलब है कि ट्रंप के बयान में किसी विशेष देश या कंपनी का नाम नहीं लिया गया। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि टैरिफ प्रणाली को कैसे प्रशासित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, यह अनुत्तरित रहा कि दो वर्षों की अवधि में प्लांट स्थापित करने वाली कंपनियाँ स्वतः छूट के लिए पात्र होंगी, या उन्हें उच्च शुल्क लागू होने से पहले उत्पादन शुरू करना अनिवार्य होगा।

पेटेंटेड दवाओं से अलग नीति

ट्रंप ने जेनेरिक दवाओं के लिए इस नई टाइमलाइन को पेटेंटेड और ब्रांडेड दवाओं की नीति से अलग बताया। उन्होंने कहा, 'पेटेंटेड, ब्रांडेड, या इनोवेटिव दवाओं पर पॉलिसी, जो इतनी सफल रही है, वैसी ही रहेगी।' राष्ट्रपति ने दावा किया कि फार्मास्युटिकल कंपनियाँ पहले से ही पूरे देश में अपनी मैन्युफैक्चरिंग उपस्थिति बढ़ा रही हैं और 'पूरे अमेरिका में फार्मास्युटिकल फैसिलिटीज का निर्माण ऐसे स्तर पर किया जा रहा है जैसा पहले कभी नहीं देखा गया।'

वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर संभावित असर

यह नीति ऐसे समय में आई है जब भारत और चीन जैसे देश अमेरिका को जेनेरिक दवाओं के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। विश्लेषकों के अनुसार, दो वर्ष की शून्य-टैरिफ खिड़की कंपनियों को अमेरिका में विनिर्माण क्षमता विकसित करने का अवसर देती है, लेकिन इतने कम समय में पूर्ण उत्पादन-तैयार संयंत्र स्थापित करना चुनौतीपूर्ण होगा। इस नीति के दीर्घकालिक प्रभाव वैश्विक फार्मा आपूर्ति शृंखला को नए सिरे से आकार दे सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन क्रियान्वयन के विवरण में जो खालीपन है वह चिंताजनक है — न कोई देश-विशेष ढाँचा, न छूट की शर्तें, न टैरिफ प्रशासन का तरीका। दो वर्षों में अमेरिका में पूर्ण फार्मा उत्पादन संयंत्र खड़ा करना व्यावहारिक रूप से अत्यंत कठिन है, और यदि कंपनियाँ ऐसा नहीं कर पाईं तो 200 प्रतिशत शुल्क का बोझ अंततः अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। भारत जैसे देश, जो अमेरिका के जेनेरिक दवा बाज़ार में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं, इस नीति के सबसे बड़े प्रभावित पक्ष हो सकते हैं — और यह पहलू अभी तक मुख्यधारा की चर्चा में उचित स्थान नहीं पा सका है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप की जेनेरिक दवा टैरिफ नीति क्या है?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 जुलाई 2026 को घोषणा की कि 1 अगस्त 2026 से आयातित जेनेरिक दवाओं पर दो वर्षों तक शून्य टैरिफ लागू रहेगा, इसके बाद एक वर्ष के लिए 100 प्रतिशत और फिर 200 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा। इस नीति का उद्देश्य दवा उत्पादन को अमेरिका में वापस लाना है।
यह टैरिफ कब से लागू होगा?
शून्य टैरिफ की अवधि 1 अगस्त 2026 से शुरू होगी और दो वर्षों तक चलेगी। इसके बाद क्रमशः 100 प्रतिशत और 200 प्रतिशत शुल्क लागू होगा।
इस नीति से भारतीय दवा कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?
भारत अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, इसलिए यह नीति भारतीय फार्मा निर्यातकों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। हालांकि ट्रंप की घोषणा में किसी देश का नाम नहीं लिया गया, लेकिन दो वर्षों के बाद लागू होने वाला उच्च शुल्क भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित कर सकता है।
पेटेंटेड और ब्रांडेड दवाओं पर क्या नीति रहेगी?
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि पेटेंटेड, ब्रांडेड और इनोवेटिव दवाओं पर मौजूदा नीति यथावत रहेगी। जेनेरिक दवाओं के लिए घोषित चरणबद्ध टैरिफ ढाँचा केवल जेनेरिक श्रेणी पर लागू होगा।
क्या अमेरिका में नया प्लांट लगाने वाली कंपनियों को छूट मिलेगी?
घोषणा में इस बारे में स्पष्टता नहीं दी गई है। यह अनुत्तरित है कि दो वर्षों में अमेरिका में संयंत्र स्थापित करने वाली कंपनियाँ उच्च शुल्क से स्वतः मुक्त होंगी या उन्हें उत्पादन शुरू करना अनिवार्य होगा।
राष्ट्र प्रेस
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