ट्रंप के जेनेरिक दवा टैरिफ का भारतीय फार्मा कंपनियों पर असर सीमित रहेगा, 2028 से होगा लागू: विश्लेषक
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जेनेरिक दवाओं पर घोषित नए टैरिफ का अमेरिकी बाज़ार में दवाएं आपूर्ति करने वाली भारतीय फार्मा कंपनियों पर प्रभाव बेहद सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि यह शुल्क व्यवस्था 2028 से पहले लागू नहीं होगी। 22 जुलाई को विश्लेषकों ने यह आकलन सामने रखा।
टैरिफ की संरचना क्या है
राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि 1 अगस्त 2026 से आयातित जेनेरिक दवाओं को दो वर्षों तक टैरिफ से छूट मिलेगी। इसके बाद पहले 100 प्रतिशत और फिर 200 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जाएगा। इस चरणबद्ध व्यवस्था का उद्देश्य विदेशी दवा निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत को अकसर 'दुनिया की फार्मेसी' कहा जाता है — वह मात्रा के आधार पर अमेरिका में उपयोग होने वाली जेनेरिक दवाओं में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है।
भारतीय फार्मा की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के एसवीपी एवं इंस्टीट्यूशनल रिसर्च एनालिस्ट (हेल्थकेयर) तुषार मनुधाने ने कहा, 'अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली करीब 90 प्रतिशत जेनेरिक प्रिस्क्रिप्शन दवाएं आयात की जाती हैं। ऐसे में जब भी यह टैरिफ लागू होगा, इसका असर अमेरिका को दवाएं निर्यात करने वाले सभी देशों पर होगा — यह केवल भारत तक सीमित नहीं है।'
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत जैसे देशों को आउटसोर्सिंग का मुख्य कारण यह है कि यहाँ दवाओं के निर्माण की लागत अमेरिका की तुलना में 40 से 60 प्रतिशत कम है। मनुधाने के अनुसार, टैरिफ लागू होने के बाद भी भारत की यह प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त पूरी तरह समाप्त नहीं होगी।
अमेरिका में नया प्लांट लगाना आसान नहीं
मनुधाने ने बताया कि यदि अमेरिका में नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित भी किया जाए, तो उसे तैयार होने में कम से कम दो वर्ष लगेंगे। इसके बाद प्लांट के निरीक्षण और उत्पादों की मंजूरी की प्रक्रिया में 12 से 15 महीने का अतिरिक्त समय लगेगा। इससे नए प्रतिस्पर्धियों के बाज़ार में आने में और अधिक देरी होगी।
गौरतलब है कि कई भारतीय फार्मा कंपनियों की अमेरिका में सहायक कंपनियाँ पहले से मौजूद हैं। साथ ही, भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले उत्पादों के ट्रांसफर प्राइस और अमेरिकी बाज़ार में उनकी अंतिम बिक्री कीमत में काफी अंतर होता है — और माना जा रहा है कि टैरिफ उस कीमत पर लगाया जाएगा जिस पर उत्पाद अमेरिकी बाज़ार में प्रवेश करता है।
भारत का फार्मा निर्यात: आँकड़े
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को $9.7 अरब (लगभग ₹81,000 करोड़) मूल्य की दवाओं का निर्यात किया, जो उसके कुल $25.8 अरब के वैश्विक फार्मा निर्यात का 38 प्रतिशत था।
इन सभी कारणों को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी बाज़ार में दवाएं आपूर्ति करने वाली भारतीय फार्मा कंपनियों पर इस टैरिफ का प्रभाव निकट भविष्य में बेहद सीमित रहेगा। असली परीक्षा तब होगी जब 2028 के बाद शुल्क की दरें बढ़ेंगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव पड़ेगा।