22 जुलाई 2026
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ट्रंप के जेनेरिक दवा टैरिफ का भारतीय फार्मा कंपनियों पर असर सीमित रहेगा, 2028 से होगा लागू: विश्लेषक

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ट्रंप के जेनेरिक दवा टैरिफ का भारतीय फार्मा कंपनियों पर असर सीमित रहेगा, 2028 से होगा लागू: विश्लेषक

सारांश

ट्रंप के जेनेरिक दवा टैरिफ से भारतीय फार्मा को तत्काल खतरा नहीं — 2028 तक छूट, 40-60% कम उत्पादन लागत की बढ़त बरकरार, और अमेरिका में नया प्लांट लगाने में कम से कम तीन साल। विश्लेषकों का कहना है कि असर सीमित रहेगा।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध टैरिफ की घोषणा की — 1 अगस्त 2026 से दो वर्ष की छूट, फिर 100% और बाद में 200% शुल्क।
विश्लेषकों के अनुसार भारतीय फार्मा कंपनियों पर असर 2028 से पहले बेहद सीमित रहेगा।
भारत में दवा निर्माण की लागत अमेरिका की तुलना में 40 से 60 प्रतिशत कम है, जो प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखती है।
अमेरिका में नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट तैयार होने में कम से कम 2 वर्ष और मंजूरी में 12-15 महीने अतिरिक्त लगेंगे।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को $9.7 अरब की दवाएं निर्यात कीं — कुल फार्मा निर्यात का 38% ।
अमेरिका में उपयोग होने वाली जेनेरिक दवाओं में भारत की मात्रा के आधार पर 40% हिस्सेदारी है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जेनेरिक दवाओं पर घोषित नए टैरिफ का अमेरिकी बाज़ार में दवाएं आपूर्ति करने वाली भारतीय फार्मा कंपनियों पर प्रभाव बेहद सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि यह शुल्क व्यवस्था 2028 से पहले लागू नहीं होगी। 22 जुलाई को विश्लेषकों ने यह आकलन सामने रखा।

टैरिफ की संरचना क्या है

राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि 1 अगस्त 2026 से आयातित जेनेरिक दवाओं को दो वर्षों तक टैरिफ से छूट मिलेगी। इसके बाद पहले 100 प्रतिशत और फिर 200 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जाएगा। इस चरणबद्ध व्यवस्था का उद्देश्य विदेशी दवा निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत को अकसर 'दुनिया की फार्मेसी' कहा जाता है — वह मात्रा के आधार पर अमेरिका में उपयोग होने वाली जेनेरिक दवाओं में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है।

भारतीय फार्मा की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के एसवीपी एवं इंस्टीट्यूशनल रिसर्च एनालिस्ट (हेल्थकेयर) तुषार मनुधाने ने कहा, 'अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली करीब 90 प्रतिशत जेनेरिक प्रिस्क्रिप्शन दवाएं आयात की जाती हैं। ऐसे में जब भी यह टैरिफ लागू होगा, इसका असर अमेरिका को दवाएं निर्यात करने वाले सभी देशों पर होगा — यह केवल भारत तक सीमित नहीं है।'

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत जैसे देशों को आउटसोर्सिंग का मुख्य कारण यह है कि यहाँ दवाओं के निर्माण की लागत अमेरिका की तुलना में 40 से 60 प्रतिशत कम है। मनुधाने के अनुसार, टैरिफ लागू होने के बाद भी भारत की यह प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त पूरी तरह समाप्त नहीं होगी।

अमेरिका में नया प्लांट लगाना आसान नहीं

मनुधाने ने बताया कि यदि अमेरिका में नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित भी किया जाए, तो उसे तैयार होने में कम से कम दो वर्ष लगेंगे। इसके बाद प्लांट के निरीक्षण और उत्पादों की मंजूरी की प्रक्रिया में 12 से 15 महीने का अतिरिक्त समय लगेगा। इससे नए प्रतिस्पर्धियों के बाज़ार में आने में और अधिक देरी होगी।

गौरतलब है कि कई भारतीय फार्मा कंपनियों की अमेरिका में सहायक कंपनियाँ पहले से मौजूद हैं। साथ ही, भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले उत्पादों के ट्रांसफर प्राइस और अमेरिकी बाज़ार में उनकी अंतिम बिक्री कीमत में काफी अंतर होता है — और माना जा रहा है कि टैरिफ उस कीमत पर लगाया जाएगा जिस पर उत्पाद अमेरिकी बाज़ार में प्रवेश करता है।

भारत का फार्मा निर्यात: आँकड़े

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को $9.7 अरब (लगभग ₹81,000 करोड़) मूल्य की दवाओं का निर्यात किया, जो उसके कुल $25.8 अरब के वैश्विक फार्मा निर्यात का 38 प्रतिशत था।

इन सभी कारणों को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी बाज़ार में दवाएं आपूर्ति करने वाली भारतीय फार्मा कंपनियों पर इस टैरिफ का प्रभाव निकट भविष्य में बेहद सीमित रहेगा। असली परीक्षा तब होगी जब 2028 के बाद शुल्क की दरें बढ़ेंगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव पड़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तत्काल व्यापार नीति कम — दो वर्ष की छूट और अमेरिका में प्लांट स्थापना की जटिलताएं यह स्पष्ट करती हैं कि निकट भविष्य में आपूर्ति श्रृंखला में बड़ा बदलाव संभव नहीं। असली सवाल यह है कि क्या भारतीय कंपनियाँ इस दो वर्ष की खिड़की का उपयोग अमेरिकी विनियामक मंजूरियाँ आगे बढ़ाने और आपूर्ति अनुबंध मज़बूत करने में करेंगी। यदि 2028 तक वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में कोई बड़ा पुनर्गठन नहीं हुआ, तो भारत की 40-60% लागत बढ़त इसे अमेरिकी बाज़ार का अपरिहार्य आपूर्तिकर्ता बनाए रखेगी।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप के जेनेरिक दवा टैरिफ से भारतीय फार्मा कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?
विश्लेषकों के अनुसार असर बेहद सीमित रहेगा, क्योंकि टैरिफ 2028 से पहले पूरी तरह लागू नहीं होगा और भारत की उत्पादन लागत अमेरिका से 40-60% कम है। यह प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त टैरिफ के बाद भी बनी रहने की उम्मीद है।
ट्रंप का जेनेरिक दवा टैरिफ कब से लागू होगा?
1 अगस्त 2026 से आयातित जेनेरिक दवाओं को दो वर्षों तक टैरिफ से छूट मिलेगी। इसके बाद 2028 से पहले 100% और फिर 200% तक शुल्क लागू होगा।
अमेरिका में जेनेरिक दवाओं में भारत की कितनी हिस्सेदारी है?
मात्रा के आधार पर अमेरिका में उपयोग होने वाली जेनेरिक दवाओं में भारत की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को $9.7 अरब की दवाएं निर्यात कीं, जो कुल वैश्विक फार्मा निर्यात का 38% था।
क्या भारतीय कंपनियाँ अमेरिका में दवा कारखाना लगा सकती हैं?
तकनीकी रूप से संभव है, लेकिन अमेरिका में नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट तैयार होने में कम से कम दो वर्ष और उसके बाद निरीक्षण व उत्पाद मंजूरी में 12 से 15 महीने अतिरिक्त लगेंगे। इससे अमेरिकी बाज़ार में नए प्रतिस्पर्धियों के आने में काफी देरी होगी।
ट्रंप टैरिफ का उद्देश्य क्या है?
राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार इस चरणबद्ध टैरिफ व्यवस्था का उद्देश्य विदेशी दवा निर्माता कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना और फार्मास्युटिकल उत्पादन को अमेरिका में स्थानांतरित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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