22 जुलाई 2026
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ट्रंप का जेनेरिक दवाओं पर 200% टैरिफ का ऐलान, निफ्टी फार्मा 2% से अधिक लुढ़का

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ट्रंप का जेनेरिक दवाओं पर 200% टैरिफ का ऐलान, निफ्टी फार्मा 2% से अधिक लुढ़का

सारांश

ट्रंप का जेनेरिक दवाओं पर 200% टैरिफ का ऐलान भारतीय फार्मा उद्योग के लिए सीधी चुनौती है। निफ्टी फार्मा 2% से अधिक टूटा, ग्लैंड फार्मा से सन फार्मा तक सभी दिग्गज दबाव में। अगस्त 2028 से लागू होने वाली इस नीति ने भारतीय कंपनियों को 'अमेरिका में बनाओ या भारी शुल्क भरो' के दोराहे पर खड़ा कर दिया है।

मुख्य बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जेनेरिक दवाओं पर अगस्त 2028 से 100% और अगस्त 2029 से 200% टैरिफ लगाने का ऐलान किया।
1 अगस्त 2026 से अगले दो वर्षों तक जेनेरिक दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं — कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन स्थानांतरित करने का समय दिया गया।
निफ्टी फार्मा इंट्राडे में 2% से अधिक टूटा; ग्लैंड फार्मा ( 4.62% ) और जेबी केमिकल्स ( 3.87% ) सर्वाधिक नुकसान में।
BSE सेंसेक्स 658 अंक गिरकर 76,811 पर; निफ्टी 50 182 अंक की कमज़ोरी के साथ 24,002 पर।
पेटेंट, ब्रांडेड और इनोवेटिव दवाओं पर मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से 200 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद 22 जुलाई 2026 को भारतीय फार्मा शेयरों में तीखी बिकवाली देखी गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का प्रमुख फार्मा सूचकांक निफ्टी फार्मा इंट्राडे कारोबार में 2 प्रतिशत से अधिक टूट गया, जो भारतीय दवा उद्योग के लिए इस नीति के दूरगामी असर का संकेत है।

टैरिफ की संरचना: क्या है ट्रंप का प्लान

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर की गई घोषणा में स्पष्ट किया कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आयात होने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो वर्षों तक कोई टैरिफ नहीं लगाया जाएगा। इसके बाद अगस्त 2028 से एक वर्ष के लिए 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा और अगस्त 2029 से इसे बढ़ाकर 200 प्रतिशत कर दिया जाएगा। पेटेंट, ब्रांडेड और इनोवेटिव दवाओं पर मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

ट्रंप का तर्क: 'मेड इन अमेरिका' दवाएँ

ट्रंप ने कहा कि इस नीति का मकसद जेनेरिक दवाओं के उत्पादन को अमेरिका में वापस लाना है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अमेरिका में अपने उत्पादन संयंत्र और उपकरण स्थापित करने का अवसर दिया जाएगा। जो कंपनियाँ ऐसा नहीं करेंगी, उन्हें बढ़े हुए टैरिफ के रूप में दंड का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस नीति का उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों के हितों की रक्षा करना और देश में दवा निर्माण को बढ़ावा देना है।

फार्मा शेयरों पर असर: कौन-कौन से स्टॉक टूटे

सुबह 10:30 बजे IST तक प्रमुख फार्मा कंपनियों के शेयर दबाव में थे। ग्लैंड फार्मा (4.62%) और जेबी केमिकल्स (3.87%) सर्वाधिक नुकसान में रहे। पीरामल फार्मा (3.92%), ल्यूपिन (3.81%), अजंता फार्मा (3.03%), सिप्ला (1.87%), मैनकाइंड फार्मा (1.69%), डॉ. रेड्डी लैब्स (1.49%), बायोकॉन (1.01%) और सन फार्मा (1.00%) भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।

व्यापक बाज़ार पर दबाव

फार्मा क्षेत्र की बिकवाली का असर समग्र भारतीय शेयर बाज़ार पर भी पड़ा। खबर लिखे जाने तक BSE सेंसेक्स 658 अंक (0.85%) की गिरावट के साथ 76,811 पर और निफ्टी 50 182 अंक (0.77%) की कमज़ोरी के साथ 24,002 पर था। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय फार्मा उद्योग अमेरिका को अपने सबसे बड़े निर्यात बाज़ारों में गिनता है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा जेनेरिक दवा निर्यातक है और अमेरिकी बाज़ार में इसकी हिस्सेदारी उल्लेखनीय है। यदि यह टैरिफ नीति लागू होती है, तो भारतीय कंपनियों के पास या तो अमेरिका में उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करने या फिर भारी शुल्क का बोझ उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। उद्योग विशेषज्ञों की नज़र अब भारत सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की दिशा पर टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक रणनीतिक दबाव है — 'अमेरिका में बनाओ या बाज़ार खो दो।' भारत दुनिया का सबसे बड़ा जेनेरिक दवा निर्यातक है और अमेरिका उसका सबसे बड़ा खरीदार; ऐसे में यह नीति भारतीय कंपनियों की लागत संरचना और मार्जिन को गहराई से प्रभावित कर सकती है। दो वर्षों की छूट की खिड़की देखने में उदार लगती है, लेकिन अमेरिका में विनिर्माण संयंत्र स्थापित करना छोटी और मझोली भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए व्यावहारिक रूप से असंभव के करीब है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत सरकार इसे द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में उठाएगी या उद्योग को अपने दम पर रास्ता खोजने के लिए छोड़ देगी।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने जेनेरिक दवाओं पर कितना टैरिफ लगाने का ऐलान किया है?
ट्रंप ने घोषणा की है कि अगस्त 2028 से अमेरिका में आयातित जेनेरिक दवाओं पर 100% और अगस्त 2029 से 200% टैरिफ लागू होगा। 1 अगस्त 2026 से अगले दो वर्षों तक कोई टैरिफ नहीं लगेगा, ताकि कंपनियाँ अमेरिका में उत्पादन स्थानांतरित कर सकें।
इस ऐलान से भारतीय फार्मा शेयरों पर क्या असर पड़ा?
22 जुलाई 2026 को निफ्टी फार्मा 2% से अधिक टूट गया। ग्लैंड फार्मा (4.62%), पीरामल फार्मा (3.92%), ल्यूपिन (3.81%) और जेबी केमिकल्स (3.87%) सबसे अधिक नुकसान में रहे। सिप्ला, सन फार्मा, डॉ. रेड्डी लैब्स और बायोकॉन भी लाल निशान में थे।
ट्रंप की इस नीति का उद्देश्य क्या है?
ट्रंप के अनुसार इस नीति का मकसद जेनेरिक दवाओं का उत्पादन अमेरिका में वापस लाना और अमेरिकी नागरिकों के हितों की रक्षा करना है। जो कंपनियाँ निर्धारित समय-सीमा में अमेरिका में उत्पादन संयंत्र नहीं लगाएंगी, उन्हें बढ़े हुए टैरिफ के रूप में दंड का सामना करना होगा।
क्या ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर भी यह टैरिफ लागू होगा?
नहीं। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि पेटेंट, ब्रांडेड और इनोवेटिव दवाओं पर मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। यह टैरिफ केवल जेनेरिक दवाओं पर लागू होगा।
इस खबर का भारतीय शेयर बाज़ार पर क्या असर पड़ा?
फार्मा क्षेत्र की बिकवाली से समग्र बाज़ार भी दबाव में आया। BSE सेंसेक्स 658 अंक (0.85%) गिरकर 76,811 पर और निफ्टी 50 182 अंक (0.77%) की कमज़ोरी के साथ 24,002 पर था।
राष्ट्र प्रेस
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