TCS की ट्रेड सीक्रेट याचिका अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की, कंपनी को ₹220 मिलियन डॉलर का झटका
सारांश
मुख्य बातें
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) को 15 जून 2026 को उस समय बड़ा कानूनी झटका लगा जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की 'रिट ऑफ सर्टिओरारी' याचिका खारिज कर दी और DXC टेक्नोलॉजी के पक्ष में 168 मिलियन डॉलर के हर्जाने के फैसले को बहाल रखा। कंपनी ने मंगलवार को एक्सचेंज फाइलिंग के ज़रिए यह जानकारी साझा की, जिसमें बताया गया कि कुल नुकसान 220 मिलियन डॉलर तक पहुँच गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद 2019 में डलास की फेडरल कोर्ट में दायर उस मुकदमे से शुरू हुआ, जो DXC टेक्नोलॉजी की पूर्ववर्ती कंपनी 'कंप्यूटर साइंसेज़ कॉर्पोरेशन' ने TCS के खिलाफ दायर किया था। आरोप था कि TCS ने बीमा कंपनी 'ट्रांसअमेरिका' के लगभग 2,200 कर्मचारियों को नियुक्त किया और उनकी गोपनीय आंतरिक जानकारी का उपयोग एक प्रतिस्पर्धी लाइफ-इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म बनाने में किया।
अदालती फैसलों का क्रम
2023 में जूरी ने TCS पर जानबूझकर ट्रेड सीक्रेट्स चुराने का दोष मानते हुए 210 मिलियन डॉलर के भुगतान की सिफारिश की थी। हालाँकि, यूएस डिस्ट्रिक्ट जज ब्रेंटली स्टार ने इसे घटाकर 168 मिलियन डॉलर किया — जिसमें 56 मिलियन डॉलर वास्तविक हर्जाने के रूप में और 112 मिलियन डॉलर दंडात्मक हर्जाने के रूप में शामिल थे। इसके बाद 2025 में फिफ्थ यूएस सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। अब सर्वोच्च न्यायालय की अस्वीकृति के साथ TCS के सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो गए हैं।
TCS की दलीलें और वित्तीय प्रावधान
TCS ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया था कि DXC को वास्तविक नुकसान सिद्ध किए बिना 'अनुचित लाभ' के आधार पर हर्जाना नहीं मिलना चाहिए था और दंडात्मक राशि अनुपातहीन रूप से अधिक है। परंतु कोर्ट ने यह तर्क स्वीकार नहीं किया।
एक्सचेंज फाइलिंग में TCS ने स्पष्ट किया: 'अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स के अनुसार, इस मामले से जुड़ी राशि के लिए हमने अपने अकाउंट्स में पहले ही 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रावधान कर दिया है। अब कंपनी नुकसान, ब्याज और कानूनी खर्च के लिए अतिरिक्त 70 मिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि का प्रावधान करेगी, जिसे वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में एक बार होने वाले असाधारण खर्च के तौर पर दिखाया जाएगा।'
कंपनी पर वित्तीय असर
कुल 220 मिलियन डॉलर का यह बोझ — जिसमें 150 मिलियन डॉलर पहले से बुक किए जा चुके हैं और 70 मिलियन डॉलर अतिरिक्त Q1 FY2027 में असाधारण मद के तहत दर्ज होंगे — TCS की तिमाही आय पर एकमुश्त दबाव डालेगा। गौरतलब है कि यह TCS के वार्षिक राजस्व के अनुपात में सीमित है, लेकिन निवेशकों की नज़र में कंपनी की अमेरिकी कानूनी जोखिम प्रबंधन क्षमता पर सवाल उठाता है।
आगे की राह
सुप्रीम कोर्ट की अस्वीकृति के बाद TCS के पास अब कोई अपील का रास्ता नहीं बचा है। कंपनी को निर्धारित हर्जाना चुकाना होगा। यह मामला भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अमेरिकी ट्रेड सीक्रेट कानूनों के तहत बढ़ते जोखिम की याद दिलाता है, विशेषकर तब जब वे बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की भर्ती करती हैं।