9 एफटीए से पश्चिम बंगाल के चाय, मत्स्य और हस्तशिल्प क्षेत्र को बड़ा फायदा: पीयूष गोयल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार, 2 अगस्त को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संपन्न हुए नौ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (एफटीए) से पश्चिम बंगाल के प्रमुख क्षेत्रों को ठोस आर्थिक लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक बेहतर पहुँच से राज्य के निर्यात और रोज़गार दोनों को नई गति मिलेगी।
मुख्य घोषणाएँ
गोयल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई पोस्ट में कहा कि इन व्यापार समझौतों से चाय उत्पादकों, मछुआरों और पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों के साथ-साथ राज्य के युवाओं और महिलाओं को अधिक अवसर मिलेंगे। उनके अनुसार, इन एफटीए से उत्पादन में वृद्धि, निर्यात का विस्तार और टिकाऊ रोज़गार के नए द्वार खुलेंगे।
गोयल ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए 9 अहम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स से पश्चिम बंगाल को काफी फायदा होगा।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि व्यापार समझौतों से मिलने वाले लाभ 'विकसित भारत' के विज़न को आगे बढ़ाने में भी सहायक होंगे।
पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था पर असर
पश्चिम बंगाल भारत का प्रमुख चाय उत्पादक राज्य है और इसकी मत्स्य पालन तथा हस्तशिल्प अर्थव्यवस्था लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है। एफटीए के ज़रिए विकसित देशों के बाज़ारों में शुल्क-मुक्त या रियायती प्रवेश मिलने से इन क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने की उम्मीद है।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में औद्योगिक निवेश को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। राज्य सरकार के एक सूत्र के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत में कम से कम 42 उद्योगपतियों ने राज्य के वाणिज्य और उद्योग मंत्री तापस रॉय से संपर्क कर पश्चिम बंगाल में निवेश की इच्छा जताई है। मंत्री ने उन्हें पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है।
निवेश और नीतिगत पृष्ठभूमि
सूत्र के अनुसार, राज्य विधानसभा के मौजूदा बजट सत्र के दौरान औद्योगिक निवेश से जुड़ी कई घोषणाएँ संभव हैं। गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने के बाद केंद्र ने नीति आयोग से राज्य की अर्थव्यवस्था और उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए एक दीर्घकालिक ब्लूप्रिंट तैयार करने को कहा था।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिरी के नेतृत्व में यह कार्य पहले ही शुरू हो चुका है। सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सरकार ने भी राज्य के औद्योगिक क्षेत्र में विकास सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई है।
क्या होगा आगे
एफटीए के लाभों का वास्तविक असर निर्यात आँकड़ों और रोज़गार सृजन में कब और किस हद तक दिखेगा, यह क्रियान्वयन की गति पर निर्भर करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि चाय और हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में एफटीए का लाभ तभी मिलेगा जब गुणवत्ता मानकों और आपूर्ति श्रृंखला को भी मज़बूत किया जाए।