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पीयूष गोयल: एफटीए से बिहार के कृषि, वस्त्र व फार्मा उत्पादों को मिल रहा वैश्विक बाज़ार

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पीयूष गोयल: एफटीए से बिहार के कृषि, वस्त्र व फार्मा उत्पादों को मिल रहा वैश्विक बाज़ार

सारांश

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि एफटीए की बदौलत बिहार के कृषि, वस्त्र, चमड़ा और फार्मा उत्पाद अब वैश्विक बाज़ारों में दस्तक दे रहे हैं। पिछले पाँच वर्षों में भारत ने 9 प्रमुख व्यापार समझौते किए हैं और FY26 में 863.1 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निर्यात हासिल किया है।

मुख्य बातें

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 8 अगस्त 2026 को कहा कि एफटीए से बिहार के उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है।
बिहार के कृषि, वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग, रसायन और फार्मा उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ार खुल रहे हैं।
भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 863.1 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निर्यात दर्ज किया।
पिछले पाँच वर्षों में भारत ने 9 प्रमुख एफटीए किए — यूएई, ऑस्ट्रेलिया, यूके, न्यूजीलैंड, ओमान सहित।
श्रम-प्रधान क्षेत्र — टेक्सटाइल, परिधान और चमड़ा — को इन समझौतों से सर्वाधिक लाभ मिलने की उम्मीद।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 8 अगस्त 2026 को कहा कि बिहार की प्रतिभा और उत्पाद अब वैश्विक बाज़ारों में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के नए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के ज़रिये बिहार के कृषि, कृषि-प्रसंस्कृत, वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग, रसायन और फार्मास्युटिकल उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों के द्वार खुल रहे हैं।

बिहार के लिए क्या बदल रहा है

गोयल के अनुसार, बिहार के उत्पाद अब केवल घरेलू बाज़ार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि दुनिया के विभिन्न देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। इससे राज्य के किसानों, छोटे उद्योगों और निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 863.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड निर्यात का आँकड़ा हासिल किया है।

पिछले पाँच वर्षों के प्रमुख एफटीए

सरकार के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में भारत ने 9 महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। इनमें भारत-मॉरीशस सीईसीपीए, भारत-यूएई सीईपीए, भारत-ऑस्ट्रेलिया ईसीटीए, भारत-ईएफटीए टीईपीए, भारत-ओमान सीईपीए, भारत-यूके सीईटीए और भारत-न्यूजीलैंड एफटीए शामिल हैं। इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक साझेदार देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाना, बाज़ार पहुँच का विस्तार करना और दोनों पक्षों की आर्थिक क्षमताओं का बेहतर उपयोग करना है।

श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर असर

एफटीए से भारतीय उद्योगों, किसानों और उद्यमियों को निर्यात के नए अवसर मिलते हैं। विशेष रूप से टेक्सटाइल, परिधान और चमड़ा उद्योग जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को इन समझौतों से बड़ा फ़ायदा होने की संभावना है। साथ ही रोज़गार सृजन, निवेश वृद्धि और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में भी सहायता मिलने का अनुमान है।

सरकार की रणनीति और क्रियान्वयन

निर्यात बाज़ारों में विविधता लाने के लिए सरकार निर्यात संवर्धन मिशन, विदेशों में भारतीय मिशन, निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी), उद्योग संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रही है। इन समझौतों में गैर-टैरिफ बाधाओं (एनटीबी) को दूर करने और तकनीकी बाधाओं को कम करने के लिए विशेष प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। सरकार द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों के ज़रिये लगातार व्यापारिक साझेदार देशों के साथ बातचीत कर भारतीय निर्यातकों के लिए बेहतर बाज़ार पहुँच सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है। आगे और एफटीए पर वार्ता जारी रहने की उम्मीद है, जो बिहार समेत अन्य राज्यों के निर्यातकों के लिए नए द्वार खोल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राज्य का निर्यात अवसंरचना — बंदरगाह कनेक्टिविटी, कोल्ड चेन, प्रसंस्करण इकाइयाँ — इन नए बाज़ारों की माँग पूरी करने में सक्षम है। गौरतलब है कि भारत के कुल निर्यात में बिहार की हिस्सेदारी ऐतिहासिक रूप से बेहद कम रही है, और एफटीए तभी काम करते हैं जब आपूर्ति शृंखला तैयार हो। 863.1 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निर्यात उत्साहजनक है, पर यह लाभ बिहार के किसानों और छोटे उद्योगों तक कितना पहुँचता है — इसका उत्तर आँकड़ों में नहीं, ज़मीन पर मिलेगा।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीयूष गोयल ने बिहार और एफटीए पर क्या कहा?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 8 अगस्त 2026 को एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि मोदी सरकार के नए मुक्त व्यापार समझौतों से बिहार के कृषि, वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग, रसायन और फार्मा उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों के द्वार खुल रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों, छोटे उद्योगों और निर्यातकों को इससे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
भारत ने पिछले पाँच वर्षों में कौन-कौन से एफटीए किए हैं?
पिछले पाँच वर्षों में भारत ने 9 प्रमुख मुक्त व्यापार समझौते किए हैं — भारत-मॉरीशस सीईसीपीए, भारत-यूएई सीईपीए, भारत-ऑस्ट्रेलिया ईसीटीए, भारत-ईएफटीए टीईपीए, भारत-ओमान सीईपीए, भारत-यूके सीईटीए और भारत-न्यूजीलैंड एफटीए इनमें शामिल हैं। इनका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाना और भारतीय उत्पादों की बाज़ार पहुँच का विस्तार करना है।
भारत का वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात कितना रहा?
भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 863.1 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निर्यात हासिल किया। यह देश के अब तक के सर्वाधिक वार्षिक निर्यात आँकड़ों में से एक है, और एफटीए इस विविधीकरण में सहायक भूमिका निभा रहे हैं।
एफटीए से बिहार के किन क्षेत्रों को सबसे अधिक फ़ायदा होगा?
सरकार के अनुसार, टेक्सटाइल, परिधान और चमड़ा जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को एफटीए से सर्वाधिक लाभ मिलने की संभावना है। इसके अलावा कृषि-प्रसंस्कृत उत्पाद, फुटवियर, इंजीनियरिंग, रसायन और फार्मास्युटिकल क्षेत्र भी नए निर्यात अवसरों से लाभान्वित होंगे।
मुक्त व्यापार समझौतों से गैर-टैरिफ बाधाएँ कैसे दूर होती हैं?
एफटीए में तकनीकी बाधाओं को कम करने और विभिन्न देशों के मानकों व नियमों को बेहतर तरीके से समझने के लिए विशेष प्रावधान शामिल किए जाते हैं। इससे भारतीय उत्पादों की विदेशी बाज़ारों तक पहुँच आसान होती है और गैर-टैरिफ बाधाओं (एनटीबी) को दूर करने में सहायता मिलती है।
राष्ट्र प्रेस
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