8 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

'तारक मेहता' के प्रोड्यूसर असित मोदी बोले — पहले भारतीय बनें, धर्म-जाति बाद में

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
'तारक मेहता' के प्रोड्यूसर असित मोदी बोले — पहले भारतीय बनें, धर्म-जाति बाद में

सारांश

'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के 18 साल पूरे होने पर प्रोड्यूसर असित मोदी का साफ़ संदेश — धर्म, जाति और भाषा से पहले खुद को भारतीय मानें। मुंबई की चॉल से लेकर राजकोट की प्रेरित कॉलोनी तक, उनका शो सिर्फ हँसाता नहीं — समाज जोड़ता है।

मुख्य बातें

'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के प्रोड्यूसर असित मोदी ने 8 अगस्त 2026 को विशेष बातचीत में सामाजिक एकता पर बड़ा बयान दिया।
उनका शो 18 साल पूरे कर चुका है — भारतीय टेलीविज़न पर एक दुर्लभ उपलब्धि।
असित मोदी ने कहा — धर्म, जाति और भाषा से ऊपर उठकर पहले भारतीय बनने से समाज की अनेक समस्याएं हल हो सकती हैं।
मुंबई की चॉल संस्कृति को उन्होंने सामूहिक जीवन की मिसाल बताया, जहाँ पड़ोसी परिवार की तरह होते थे।
राजकोट में एक कॉलोनी उनके शो की विचारधारा से प्रेरित होकर बनाई गई बताई जाती है।

'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के प्रोड्यूसर असित मोदी ने 8 अगस्त 2026 को एक विशेष बातचीत में कहा कि यदि भारत के लोग धर्म, जाति और भाषा से ऊपर उठकर खुद को सबसे पहले भारतीय मानने लगें, तो समाज की अनेक समस्याएं स्वतः सुलझ सकती हैं। यह बयान उस समय आया जब उनका मशहूर हास्य धारावाहिक अपने 18 साल पूरे कर चुका है — भारतीय टेलीविज़न पर एक दुर्लभ उपलब्धि।

मुख्य बात: पहले भारतीय, फिर बाकी सब

असित मोदी ने कहा, 'आज जब भी हम किसी से मिलते हैं, तो सबसे पहला सवाल यही होता है — आप किस धर्म के हैं, जाति क्या है, किस समुदाय से आते हैं या कौन-सी भाषा बोलते हैं? मैं हमेशा कहता हूं कि अगर हम सबसे पहले यह कहें कि मैं भारतीय हूं, तो यह समस्या हल हो जाएगी और सब लोग मिल-जुलकर रह सकेंगे।' उनके इस विचार में सामाजिक एकता की गहरी पैरवी है, जो उनके शो की मूल भावना से भी मेल खाती है।

मुंबई की चॉल से मिली सामूहिकता की सीख

प्रोड्यूसर ने अपने बचपन की यादें साझा करते हुए बताया कि मुंबई के भूलेश्वर, कालबादेवी और दादर जैसे इलाकों की चॉलों में पड़ोसी ही परिवार का दर्जा रखते थे। उन्होंने कहा, 'मैं और दिलीप भाई — हम दोनों चॉल में रहे हैं। घर छोटे होते थे, इसलिए पड़ोसी ही हमारा परिवार बन जाते थे। आज भी मैं उन पड़ोसियों से जुड़ा हुआ हूं जो मेरे छह-सात साल की उम्र में मेरे पड़ोसी थे।' यह ऐसे समय में आया है जब शहरीकरण और न्यूक्लियर फैमिली की संस्कृति ने पड़ोसियों के बीच की दूरी को तेज़ी से बढ़ाया है।

आज की 'पड़ोसी-अजनबी' संस्कृति पर चिंता

असित मोदी ने आधुनिक शहरी जीवनशैली पर चिंता जताते हुए कहा, 'आजकल लोग यह भी नहीं जानते कि उनके पड़ोस में कौन रहता है। कई लोग तो वॉचमैन या लिफ्ट ऑपरेटर से मुस्कुराकर बात तक नहीं करते।' उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जो लोग हमारी सेवा करते हैं — वॉचमैन, लिफ्टमैन और अन्य — उनके प्रति कृतज्ञता का भाव होना चाहिए। गौरतलब है कि यह वही मूल्य हैं जो 'तारक मेहता' की 'गोकुलधाम सोसायटी' की कहानी में बार-बार उभरते हैं।

शो का समाज पर असर और राजकोट का उदाहरण

प्रोड्यूसर ने बताया कि 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' ने देशभर में कई समुदायों को प्रेरित किया है। उन्होंने कहा, 'हमारे शो का विचार सफल रहा है। लोगों ने हमें बताया है कि वे ऐसे समुदाय बनाने के लिए हमारे शो से प्रेरित हुए हैं।' उन्हें राजकोट की एक कॉलोनी में जाने का आमंत्रण भी मिला है, जो शो की विचारधारा से प्रेरित होकर बनाई गई बताई जाती है। उनका संदेश स्पष्ट था — विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन बहस की बजाय शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

आगे की राह

असित मोदी का यह बयान उस व्यापक बहस में एक सांस्कृतिक आवाज़ जोड़ता है जो भारत में सामाजिक सद्भाव को लेकर चल रही है। 18 साल से अधिक समय तक दर्शकों के दिलों में बसे इस शो के निर्माता की यह सोच बताती है कि मनोरंजन सिर्फ हँसाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का ज़रिया भी बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह सिर्फ नॉस्टेल्जिया की चाशनी में लिपटा आदर्शवाद है? 18 साल में शो ने करोड़ों दर्शक जोड़े, पर सामाजिक ध्रुवीकरण के आँकड़े बताते हैं कि स्क्रीन पर एकता और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई पाटना अभी बाकी है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असित मोदी ने धर्म-जाति पर क्या कहा?
असित मोदी ने कहा कि यदि लोग खुद को सबसे पहले भारतीय मानें — धर्म, जाति या भाषा से पहले — तो समाज की कई समस्याएं अपने आप हल हो जाएंगी। उनका मानना है कि यही सोच आपसी भाईचारे और सहअस्तित्व की नींव है।
'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' कितने साल पुराना शो है?
'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' ने 2026 में अपने 18 साल पूरे किए हैं, जो भारतीय टेलीविज़न पर किसी हास्य धारावाहिक के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जाती है।
असित मोदी ने मुंबई की चॉल संस्कृति का ज़िक्र क्यों किया?
असित मोदी ने मुंबई की चॉल संस्कृति को सामूहिक जीवन की मिसाल के रूप में पेश किया, जहाँ भूलेश्वर, कालबादेवी और दादर जैसे इलाकों में पड़ोसी परिवार की तरह होते थे। उन्होंने इसे आज की 'न्यूक्लियर फैमिली' और पड़ोसी-अजनबी संस्कृति के विपरीत रखा।
क्या 'तारक मेहता' शो ने वास्तव में किसी समुदाय को प्रेरित किया है?
असित मोदी के अनुसार, राजकोट में एक कॉलोनी उनके शो की विचारधारा से प्रेरित होकर बनाई गई है और उन्हें वहाँ जाने का आमंत्रण भी मिला है। उन्होंने बताया कि कई लोगों ने उन्हें बताया है कि वे ऐसे समुदाय बनाने के लिए शो से प्रेरित हुए।
असित मोदी का पड़ोसियों के बारे में क्या संदेश है?
असित मोदी ने कहा कि पड़ोसी ही हमारा पहला परिवार होता है और हमें वॉचमैन, लिफ्टमैन तथा सेवा करने वाले हर व्यक्ति के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए। उनका मानना है कि साथ मिलकर रहना और मुस्कुराकर बात करना आज के दौर में सबसे ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले