16 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मोहम्मद अजीज: गालिब रेस्टोरेंट से बॉलीवुड तक, जिस आवाज़ ने 80-90 के दशक को अमर किया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मोहम्मद अजीज: गालिब रेस्टोरेंट से बॉलीवुड तक, जिस आवाज़ ने 80-90 के दशक को अमर किया

सारांश

कोलकाता के एक रेस्टोरेंट में टिप पाने वाला वह गायक, जो रफी साहब की तरह गाने का सपना देखता था — मोहम्मद अजीज ने 20,000 से अधिक गीत गाकर 80-90 के दशक को अमर कर दिया। उनकी कहानी संघर्ष, संयोग और असाधारण प्रतिभा की मिसाल है।

मुख्य बातें

मोहम्मद अजीज का जन्म 2 जुलाई 1954 को कोलकाता में हुआ; पूरा नाम सैयद मोहम्मद अजीत उल नबी था।
करियर की शुरुआत कोलकाता के 'गालिब' रेस्टोरेंट में लाइव गायन से हुई, जहाँ एक बंगाली फिल्म निर्माता ने उन्हें पहला मौका दिया।
1985 में फिल्म 'मर्द' का गाना 'मर्द तांगेवाला' उनका पहला बड़ा बॉलीवुड हिट बना।
उन्होंने अमिताभ बच्चन , गोविंदा , सनी देओल सहित शीर्ष सितारों के लिए गाया और 20,000 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए।
27 नवंबर 2018 को 64 वर्ष की आयु में नानावटी अस्पताल, मुंबई में दिल का दौरा पड़ने से निधन हुआ।

दिग्गज पार्श्वगायक मोहम्मद अजीज की जीवन-यात्रा किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं थी — कोलकाता के एक छोटे रेस्टोरेंट की मंच से शुरू होकर यह सफर बॉलीवुड के सबसे चमकदार नामों में शुमार होने तक पहुँची। 80 और 90 के दशक में उनकी आवाज़ ने हिंदी सिनेमा के संगीत को एक अलग ऊँचाई दी, और उनके गाए हज़ारों गीत आज भी श्रोताओं के दिलों में ज़िंदा हैं।

शुरुआती जीवन और संगीत की नींव

मोहम्मद अजीज का जन्म 2 जुलाई 1954 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ था। उनका पूरा नाम सैयद मोहम्मद अजीत उल नबी था। बचपन से ही संगीत उनकी रगों में बसा था — वह महान पार्श्वगायक मोहम्मद रफी के गीत सुन-सुनकर उनकी तरह गाने की कोशिश करते थे। रफी साहब की आवाज़ उनके लिए सिर्फ प्रेरणा नहीं, एक आदर्श थी।

अपने करियर के शुरुआती दिनों में उन्होंने कोलकाता के प्रसिद्ध 'गालिब' रेस्टोरेंट में लाइव गायन किया। उनकी सुरीली आवाज़ सुनकर वहाँ आने वाले लोग मंत्रमुग्ध हो जाते थे। कई बार श्रोता उनकी परफॉर्मेंस से प्रभावित होकर टिप भी देते थे। यही वह मंच था जहाँ से उनकी पहचान धीरे-धीरे बनने लगी।

पहला बड़ा ब्रेक और मुंबई की राह

गालिब रेस्टोरेंट में एक अहम संयोग तब हुआ जब कुछ फिल्म निर्माता वहाँ आए और उनकी आवाज़ पर ध्यान गया। एक बंगाली फिल्म निर्माता ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अपनी फिल्म में गाने का अवसर दिया — यह उनके करियर का पहला बड़ा मोड़ था। इस अवसर ने उन्हें आत्मविश्वास दिया और वह बड़े सपनों के साथ मुंबई की ओर रवाना हो गए।

मुंबई पहुँचकर उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से फिल्म उद्योग में अपनी जगह बनानी शुरू की। यह ऐसे समय में आया जब 1980 के दशक में रफी साहब के जाने के बाद बॉलीवुड में उनकी शैली में गाने वाले गायक की तलाश थी।

बॉलीवुड में धमाकेदार पहचान

संगीतकार अनु मलिक ने उन्हें पहला बड़ा बॉलीवुड मौका दिया। 1985 में फिल्म 'मर्द' का गाना 'मर्द तांगेवाला' उनके करियर का निर्णायक मोड़ बना। यह गाना सुपरहिट हुआ और रातों-रात उनका नाम घर-घर पहुँच गया।

इसके बाद उन्होंने लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, अनु मलिक और बप्पी लाहिड़ी जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ मिलकर एक के बाद एक हिट गाने दिए। उन्होंने अमिताभ बच्चन, गोविंदा, सनी देओल, संजय दत्त और अनिल कपूर जैसे शीर्ष सितारों के लिए पार्श्वगायन किया।

यादगार गीत और विरासत

उनके सबसे लोकप्रिय गीतों में 'आप के आ जाने से', 'ऐ वतन तेरे लिए', 'मेरा नाम है लखन', 'दिल दिया है जान भी देंगे', 'तू मुझे कबूल', 'तेरा बीमार मेरा दिल', 'बहुत जताते हो चाह हमसे', तथा फिल्मों 'त्रिदेव', 'चालबाज' और 'खुदा गवाह' के गाने शामिल हैं। हिंदी के अलावा उन्होंने बंगाली और उड़िया फिल्मों में भी अपनी आवाज़ दी और अपने पूरे करियर में लगभग 20,000 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए।

गौरतलब है कि यह संख्या उन्हें भारतीय फिल्म संगीत के सबसे विपुल गायकों में से एक बनाती है। उनकी आवाज़ में रफी साहब की छाया थी, फिर भी उनका अपना एक अलग अंदाज़ था जो श्रोताओं को सीधे दिल तक छूता था।

अंतिम विदाई

27 नवंबर 2018 को 64 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से मोहम्मद अजीज का निधन हो गया। बताया जाता है कि वह कोलकाता में एक कार्यक्रम में शिरकत करके मुंबई लौट रहे थे, जब एयरपोर्ट पर उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तत्काल नानावटी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके जाने से बॉलीवुड ने एक ऐसी आवाज़ खोई जो शायद फिर कभी न आए — लेकिन उनके गीत पीढ़ियों तक गूँजते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

चाहे वह मंच कितना भी छोटा क्यों न हो। लेकिन यह भी सोचने वाली बात है कि जिस गायक ने 20,000 से अधिक गीत गाए और दो दशकों तक बॉलीवुड की धड़कन बने रहे, उन्हें मुख्यधारा की संगीत चर्चाओं में वह स्थान कभी नहीं मिला जिसके वह हकदार थे। रफी साहब की विरासत को आगे बढ़ाने का श्रेय अक्सर दूसरों को दिया जाता है, जबकि अजीज साहब की आवाज़ ने उस दौर के सबसे बड़े सितारों के पर्दे पर जीवन फूँका। उनकी विदाई के बाद भी उनके गीतों की लोकप्रियता यह साबित करती है कि असली पहचान पुरस्कारों से नहीं, श्रोताओं के दिलों से मिलती है।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहम्मद अजीज कौन थे?
मोहम्मद अजीज 80 और 90 के दशक के प्रसिद्ध हिंदी फिल्म पार्श्वगायक थे, जिनका पूरा नाम सैयद मोहम्मद अजीत उल नबी था। उन्होंने अपने करियर में 20,000 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए और अमिताभ बच्चन, गोविंदा जैसे सितारों के लिए पार्श्वगायन किया।
मोहम्मद अजीज का करियर कहाँ से शुरू हुआ?
उनके करियर की शुरुआत कोलकाता के 'गालिब' रेस्टोरेंट से हुई, जहाँ वह लाइव गायन करते थे। वहाँ एक बंगाली फिल्म निर्माता ने उनकी आवाज़ सुनकर उन्हें पहला फिल्मी अवसर दिया, जिसके बाद वह मुंबई आ गए।
मोहम्मद अजीज का पहला बड़ा बॉलीवुड हिट कौन सा था?
1985 में फिल्म 'मर्द' का गाना 'मर्द तांगेवाला' उनका पहला बड़ा बॉलीवुड हिट था। संगीतकार अनु मलिक ने उन्हें यह अवसर दिया और इस गाने की सफलता ने उन्हें रातों-रात मशहूर कर दिया।
मोहम्मद अजीज के सबसे लोकप्रिय गीत कौन से हैं?
'आप के आ जाने से', 'ऐ वतन तेरे लिए', 'मेरा नाम है लखन', 'दिल दिया है जान भी देंगे' और 'तू मुझे कबूल' उनके सबसे चर्चित गीतों में शामिल हैं। उन्होंने 'त्रिदेव', 'चालबाज' और 'खुदा गवाह' जैसी फिल्मों में भी यादगार गाने गाए।
मोहम्मद अजीज का निधन कब और कैसे हुआ?
27 नवंबर 2018 को 64 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ। कोलकाता में एक कार्यक्रम के बाद मुंबई लौटते समय एयरपोर्ट पर तबीयत बिगड़ी और नानावटी अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले