भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर ले जाने की तैयारी: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने लिए दो बड़े फैसले
सारांश
मुख्य बातें
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 29 जून 2026 को नई दिल्ली में भारतीय फिल्म उद्योग को आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए — एक उच्च स्तरीय अध्ययन समूह का गठन और राज्यों के लिए एक मॉडल सिनेमा नियमन का निर्माण। ये फैसले केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में लिए गए, जिसमें मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और फिल्म क्षेत्र के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
अध्ययन समूह का गठन
मंत्रालय द्वारा गठित इस उच्च स्तरीय अध्ययन समूह की अध्यक्षता प्रख्यात गीतकार और लेखक प्रसून जोशी करेंगे। समूह में फिल्म उद्योग के विशेषज्ञ, तकनीकी साझेदार और अन्य संबंधित क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समूह तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगा।
समूह का प्राथमिक उद्देश्य भारतीय सिनेमा के सामने मौजूद अवसरों और चुनौतियों का गहन अध्ययन कर इंडस्ट्री को आगे ले जाने के लिए ठोस सुझाव देना होगा। इसके साथ ही यह भारतीय फिल्मों को वैश्विक बाज़ार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के उपाय भी तलाशेगा।
तकनीकी एकीकरण पर विशेष ध्यान
अध्ययन समूह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वर्चुअल प्रोडक्शन जैसी उभरती तकनीकों के भारतीय सिनेमा पर पड़ने वाले प्रभाव का भी विश्लेषण करेगा। यह सुझाव दिया जाएगा कि भारतीय फिल्म निर्माता इन तकनीकों का किस प्रकार बेहतर उपयोग कर सकते हैं। गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर AI-आधारित प्रोडक्शन टूल्स ने फिल्म निर्माण की लागत और समय दोनों में उल्लेखनीय कमी लाई है।
वित्तीय सुगमता और नीतिगत ढाँचा
समूह फिल्म निर्माताओं के लिए वित्तीय व्यवस्था को सरल बनाने पर भी विचार करेगा। इसमें संस्थागत वित्त की उपलब्धता, नए फंडिंग विकल्पों का विकास और फिल्म निर्माण व वितरण के दौरान आने वाली आर्थिक बाधाओं का समाधान शामिल है। समूह राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ समन्वय कर भारतीय सिनेमा के दीर्घकालिक विकास के लिए एक व्यापक नीतिगत ढाँचा तैयार करने की दिशा में काम करेगा।
मॉडल सिनेमा नियमन: राज्यों के लिए एकरूपता की पहल
मंत्रालय का दूसरा बड़ा कदम सिनेमा और थिएटर के नियमन से जुड़ा है। चूँकि सिनेमा और थिएटर संवैधानिक रूप से राज्य सूची के अंतर्गत आते हैं, इसलिए विभिन्न राज्यों में लाइसेंस और अनुमतियों के लिए अलग-अलग नियम लागू हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह असमान व्यवस्था विशेष रूप से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में सिनेमा बुनियादी ढाँचे के विस्तार में बाधा बनती रही है।
इस समस्या के समाधान के लिए मंत्रालय ने सभी हितधारकों से व्यापक परामर्श के बाद एक मॉडल राज्य सिनेमा नियमन तैयार किया है, जिसे अब सभी राज्य सरकारों को भेजा गया है। राज्यों से इसे अपनाने का अनुरोध किया गया है और मंत्रालय ने इसके क्रियान्वयन में सहयोग देने का भी आश्वासन दिया है।
उद्योग पर संभावित असर
मंत्रालय का मानना है कि इन दोनों पहलों से भारतीय फिल्म उद्योग में निवेश, तकनीकी विकास और नए अवसरों को बल मिलेगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय सिनेमा वैश्विक ओटीटी प्लेटफार्मों और बदलती दर्शक आदतों के बीच नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एकीकृत नियमन और तकनीकी सहयोग से विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में सिनेमा स्क्रीन की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।