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कंगना रनौत के 'गटर जेनरेशन' बयान पर विपक्ष का हमला, कांग्रेस-सपा बोले — गंभीरता से लेने की ज़रूरत नहीं

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कंगना रनौत के 'गटर जेनरेशन' बयान पर विपक्ष का हमला, कांग्रेस-सपा बोले — गंभीरता से लेने की ज़रूरत नहीं

सारांश

BJP सांसद कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर नई पीढ़ी की महिलाओं को 'गटर जेनरेशन' बताया और जेन जी के प्रदर्शनों पर तीखी टिप्पणी की। इस पर कांग्रेस और सपा ने एकजुट होकर पलटवार किया — कहा कि जो सांसद सुभाष चंद्र बोस को पहला प्रधानमंत्री बता चुकी हों, उनके बयानों को गंभीरता से लेने का कोई कारण नहीं।

मुख्य बातें

BJP सांसद कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर नई पीढ़ी की महिलाओं को 'गटर जेनरेशन' और जेन जी के प्रदर्शनों को 'घिन' लायक बताया।
कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा — कंगना को छात्र अधिकारों और लोकतंत्र की समझ नहीं।
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने याद दिलाया कि कंगना पहले सुभाष चंद्र बोस को पहला PM और 2014 को असली आज़ादी का साल बता चुकी हैं।
सपा नेता उदयवीर सिंह ने कहा — फिल्मी सफलता और राजनीतिक समझ अलग चीज़ें हैं; BJP में ऐसे लोगों को सिर्फ नाम के लिए पद मिलते हैं।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा — छात्रों को सीख देने से पहले कंगना अपनी शैक्षणिक योग्यता बताएँ।
BJP की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत के सोशल मीडिया पर 'जेन जी' और 'गटर जेनरेशन' को लेकर किए गए विवादास्पद पोस्ट ने 28 जुलाई को राजनीतिक हलचल मचा दी। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं ने एकजुट होकर इन टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की और सवाल उठाया कि एक सांसद की ऐसी भाषा संसदीय मर्यादा के अनुरूप है या नहीं।

कंगना ने क्या लिखा था

कंगना रनौत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पश्चिमी विचारों से प्रभावित नई पीढ़ी की भारतीय महिलाओं को 'गटर जेनरेशन' बताया। उन्होंने लिखा, 'आज वेस्टर्न सोच से प्रभावित भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी देखने को मिली। मैं इन्हें 'गटर जेनरेशन' कहती हूँ। इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छी नहीं हैं, लेकिन इतनी बदसूरत सोच और भ्रष्ट मानसिकता रखती हैं कि अच्छी हाउसवाइफ भी नहीं बन सकतीं।'

उन्होंने आगे यह भी लिखा कि ये महिलाएँ 'नशा, शराब और अनगिनत यौन संबंधों को अपनी आज़ादी बताती हैं' और 'बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं।' एक अन्य पोस्ट में उन्होंने जेन जी के विरोध-प्रदर्शनों के वीडियो देखकर 'घिन' आने की बात कही और सवाल उठाया कि ऐसे युवाओं की परवरिश कौन कर रहा है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा, 'कंगना रनौत को गंभीरता से लेने की ज़रूरत नहीं है। उन्हें छात्रों के अधिकारों, लोकतांत्रिक व्यवस्था और लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों की समझ नहीं है।'

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने पिछले विवादास्पद बयानों का हवाला देते हुए कहा, 'कंगना संसद की सदस्य ज़रूर हैं, लेकिन जब उनकी अपनी पार्टी भी उनके बयानों को गंभीरता से नहीं लेती, तो आम जनता उन्हें कैसे गंभीरता से लेगी।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कंगना पहले सुभाष चंद्र बोस को देश का पहला प्रधानमंत्री बता चुकी हैं और यह भी कह चुकी हैं कि भारत को 2014 में आज़ादी मिली।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, 'छात्रों को सीख देने से पहले कंगना को अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में बताना चाहिए। शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी करते समय तथ्यों और ज़िम्मेदारी का ध्यान रखना ज़रूरी होता है।'

सपा का तीखा पलटवार

समाजवादी पार्टी के नेता उदयवीर सिंह ने कहा, 'फिल्मों में सफल होना और राजनीति की गहरी समझ होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। कंगना की राजनीतिक समझ बहुत सीमित है।' उन्होंने यह भी कहा कि BJP सरकार में ऐसे लोगों को 'सिर्फ नाम के लिए पद दिए जाते हैं, असली काम पार्टी खुद करती है।'

आम जनता और युवाओं पर असर

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देशभर में युवाओं से जुड़े मुद्दे — रोज़गार, शिक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता — राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। आलोचकों का कहना है कि एक निर्वाचित सांसद द्वारा पूरी एक पीढ़ी को 'गटर जेनरेशन' कहना न केवल असंसदीय है, बल्कि युवाओं के प्रति गहरी असंवेदनशीलता को भी दर्शाता है। गौरतलब है कि यह कंगना रनौत का पहला विवादास्पद बयान नहीं है — सांसद बनने के बाद से उनके कई बयान सार्वजनिक विवाद का कारण बन चुके हैं।

आगे क्या

BJP की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि वे इस मुद्दे को संसदीय मंच पर भी उठा सकते हैं। कंगना रनौत के बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएँ जारी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तत्काल विवाद, और BJP की चुप्पी। सवाल यह नहीं कि विपक्ष ने आलोचना की — सवाल यह है कि सत्तारूढ़ दल अपने ही सांसद के बयानों से बार-बार किनारा क्यों करता है। यदि पार्टी वास्तव में इन विचारों से असहमत है, तो आधिकारिक खंडन क्यों नहीं? और यदि सहमत है, तो चुप्पी खुद एक बयान है। पूरी एक पीढ़ी को 'गटर' कहना महज़ अशिष्टता नहीं — यह उस राजनीतिक संस्कृति का लक्षण है जो असहमति को अपमान से दबाने की कोशिश करती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कंगना रनौत ने 'गटर जेनरेशन' किसे कहा?
कंगना रनौत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पश्चिमी विचारों से प्रभावित नई पीढ़ी की उन भारतीय महिलाओं को 'गटर जेनरेशन' कहा, जिन्हें उन्होंने पढ़ाई में कमज़ोर और नशे व स्वच्छंद जीवनशैली को आज़ादी बताने वाला बताया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी महिलाएँ माता-पिता पर निर्भर रहते हुए स्वतंत्रता का दिखावा करती हैं।
कांग्रेस ने कंगना रनौत के बयान पर क्या कहा?
कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि कंगना को गंभीरता से लेने की ज़रूरत नहीं क्योंकि उन्हें छात्र अधिकारों और लोकतंत्र की समझ नहीं है। सुखदेव भगत ने पिछले विवादों का हवाला देते हुए कहा कि जब उनकी खुद की पार्टी उन्हें गंभीरता से नहीं लेती, तो जनता क्यों लेगी।
सपा ने इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया दी?
सपा नेता उदयवीर सिंह ने कहा कि फिल्मी सफलता और राजनीतिक समझ दो अलग चीज़ें हैं और कंगना की राजनीतिक समझ सीमित है। उन्होंने यह भी कहा कि BJP में ऐसे लोगों को सिर्फ नाम के लिए पद दिए जाते हैं, असली काम पार्टी खुद करती है।
कंगना रनौत के पहले के विवादास्पद बयान कौन से हैं?
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत के अनुसार, कंगना रनौत पहले सुभाष चंद्र बोस को देश का पहला प्रधानमंत्री बता चुकी हैं और यह भी कह चुकी हैं कि भारत को असली आज़ादी 2014 में मिली। ये दोनों बयान उस समय भी व्यापक विवाद का कारण बने थे।
BJP ने कंगना के इस बयान पर क्या रुख अपनाया?
28 जुलाई तक BJP की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विपक्षी नेताओं ने इसी चुप्पी को निशाना बनाते हुए कहा कि पार्टी का खामोश रहना खुद एक संकेत है।
राष्ट्र प्रेस
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