कंगना रनौत के 'गटर जेनरेशन' बयान पर विपक्ष का हमला, कांग्रेस-सपा बोले — गंभीरता से लेने की ज़रूरत नहीं
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत के सोशल मीडिया पर 'जेन जी' और 'गटर जेनरेशन' को लेकर किए गए विवादास्पद पोस्ट ने 28 जुलाई को राजनीतिक हलचल मचा दी। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं ने एकजुट होकर इन टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की और सवाल उठाया कि एक सांसद की ऐसी भाषा संसदीय मर्यादा के अनुरूप है या नहीं।
कंगना ने क्या लिखा था
कंगना रनौत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पश्चिमी विचारों से प्रभावित नई पीढ़ी की भारतीय महिलाओं को 'गटर जेनरेशन' बताया। उन्होंने लिखा, 'आज वेस्टर्न सोच से प्रभावित भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी देखने को मिली। मैं इन्हें 'गटर जेनरेशन' कहती हूँ। इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छी नहीं हैं, लेकिन इतनी बदसूरत सोच और भ्रष्ट मानसिकता रखती हैं कि अच्छी हाउसवाइफ भी नहीं बन सकतीं।'
उन्होंने आगे यह भी लिखा कि ये महिलाएँ 'नशा, शराब और अनगिनत यौन संबंधों को अपनी आज़ादी बताती हैं' और 'बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं।' एक अन्य पोस्ट में उन्होंने जेन जी के विरोध-प्रदर्शनों के वीडियो देखकर 'घिन' आने की बात कही और सवाल उठाया कि ऐसे युवाओं की परवरिश कौन कर रहा है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा, 'कंगना रनौत को गंभीरता से लेने की ज़रूरत नहीं है। उन्हें छात्रों के अधिकारों, लोकतांत्रिक व्यवस्था और लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों की समझ नहीं है।'
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने पिछले विवादास्पद बयानों का हवाला देते हुए कहा, 'कंगना संसद की सदस्य ज़रूर हैं, लेकिन जब उनकी अपनी पार्टी भी उनके बयानों को गंभीरता से नहीं लेती, तो आम जनता उन्हें कैसे गंभीरता से लेगी।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कंगना पहले सुभाष चंद्र बोस को देश का पहला प्रधानमंत्री बता चुकी हैं और यह भी कह चुकी हैं कि भारत को 2014 में आज़ादी मिली।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, 'छात्रों को सीख देने से पहले कंगना को अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में बताना चाहिए। शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी करते समय तथ्यों और ज़िम्मेदारी का ध्यान रखना ज़रूरी होता है।'
सपा का तीखा पलटवार
समाजवादी पार्टी के नेता उदयवीर सिंह ने कहा, 'फिल्मों में सफल होना और राजनीति की गहरी समझ होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। कंगना की राजनीतिक समझ बहुत सीमित है।' उन्होंने यह भी कहा कि BJP सरकार में ऐसे लोगों को 'सिर्फ नाम के लिए पद दिए जाते हैं, असली काम पार्टी खुद करती है।'
आम जनता और युवाओं पर असर
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देशभर में युवाओं से जुड़े मुद्दे — रोज़गार, शिक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता — राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। आलोचकों का कहना है कि एक निर्वाचित सांसद द्वारा पूरी एक पीढ़ी को 'गटर जेनरेशन' कहना न केवल असंसदीय है, बल्कि युवाओं के प्रति गहरी असंवेदनशीलता को भी दर्शाता है। गौरतलब है कि यह कंगना रनौत का पहला विवादास्पद बयान नहीं है — सांसद बनने के बाद से उनके कई बयान सार्वजनिक विवाद का कारण बन चुके हैं।
आगे क्या
BJP की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि वे इस मुद्दे को संसदीय मंच पर भी उठा सकते हैं। कंगना रनौत के बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएँ जारी हैं।