कंगना रनौत के 'जेनजी' बयान पर महुआ माजी का पलटवार: 'कोई गंभीरता से नहीं लेता'
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) सांसद महुआ माजी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद कंगना रनौत के 'जेनजी' वाले विवादास्पद बयान को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि रनौत की बातों को कोई भी गंभीरता से नहीं लेता। 28 जुलाई को नई दिल्ली में माजी ने यह टिप्पणी उस संदर्भ में की, जब कंगना रनौत ने परीक्षा गड़बड़ियों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे युवाओं की भाषा पर सवाल उठाए थे।
विवाद की पृष्ठभूमि
BJP सांसद कंगना रनौत ने हाल ही में परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान युवाओं द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने यह भी पूछा था कि यदि भविष्य में इन युवाओं को कानूनी लड़ाई के लिए सर्वोच्च न्यायालय के वकीलों की ज़रूरत पड़ी, तो क्या वे या उनके माता-पिता उसका खर्च उठा पाएंगे। रनौत ने यह भी कहा था कि ये युवा अपने माता-पिता पर बोझ बनेंगे।
महुआ माजी की प्रतिक्रिया
माजी ने मजाकिए अंदाज़ में कहा कि कंगना रनौत के बयान ऐसे लगते हैं जैसे वे न्यूटन के गति नियमों पर टिप्पणी कर रही हों। उन्होंने कहा कि रनौत हमेशा बेतुके बयान देती हैं और जनता उन्हें गंभीरता से नहीं लेती।
शिक्षा संस्थानों पर चिंता
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के IIT मद्रास के निदेशक से जुड़े बयान पर माजी ने कहा कि उन्हें कामकोटी की विशेषज्ञता की पूरी जानकारी नहीं है। हालाँकि, उन्होंने यह ज़रूर कहा कि कई संघ प्रचारकों को शैक्षणिक संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया है, जो आवश्यक बौद्धिक स्तर पर काम नहीं करते। माजी के अनुसार, इससे छात्रों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है और भारतीय शिक्षण संस्थान तेज़ी से पिछड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री कहते हैं कि पूरा देश देख रहा है और हम विश्व गुरु बन सकते हैं। हकीकत यह है कि हमारे यहाँ ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज या बर्कले जैसे विश्वविद्यालय नहीं हैं — विश्व गुरु बनने की बात तो बहुत दूर है।' माजी ने यह भी कहा कि भारत के प्रतिभाशाली लोग विदेशों में शोध कर रहे हैं क्योंकि देश में उनकी प्रतिभा का सम्मान नहीं होता। सोशल साइंस जैसे क्षेत्रों में शोध के लिए लगभग कोई फंडिंग उपलब्ध नहीं है।
छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई
दिल्ली पुलिस और छात्रों के बीच हुई झड़प पर माजी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर आँसू गैस का इस्तेमाल किया गया और बिहार में AK-47 के इस्तेमाल की तस्वीरें भी सामने आई हैं। माजी ने कहा कि ऐसी कार्रवाई तानाशाही देशों में होती है, भारत जैसे लोकतंत्र में नहीं।
पेपर लीक और सरकार की प्राथमिकताएँ
माजी ने महाराष्ट्र में पेपर लीक के बाद एक परिवार द्वारा अपनी बेटी की मौत का शोक मनाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि उसी समय सरकार पूर्व शिक्षा मंत्री का स्वागत कर रही थी। उनके अनुसार, इससे देश की बेटियों को गलत संदेश गया है। यह पूरा विवाद ऐसे समय में उभरा है जब परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।